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पूजा क्या है ?

पूजा क्या है – Puja Kya hai

पूजा क्या है – Puja Kya hai : प्रत्येक मनुष्य जीवन में सुख, समृद्धि, शांति आदि की इच्छा करता है और जीवन के बाद भी स्वर्गादि की प्राप्ति हो। ये सभी कामना हैं जो दो प्रकार के सिद्ध होते हैं; पहला लौकिक और दूसरा पारलौकिक। शास्त्रों में चार पुरुषार्थ कहे गये हैं – धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। लेकिन पुरुषार्थ चतुष्टय भी इन दोनों प्रकारों में सन्निहित है। पूजा की सामान्य परिभाषा इस प्रकार से की जाती है कि जो लौकिक व पारलौकिक सुखों/भोगों को उत्त्पन्न करती है वह पूजा है। वास्तविक अर्थ में कल्याण कामना से भगवान, देवताओं, गुरु और ब्राह्मणों की विविध द्रव्यों से आराधना करना ही पूजा है। अन्यत्र आदर-सम्मान-सेवा-सुश्रुषा करना पूजा का समानार्थी है।

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दीपक के नीचे रखे चावल का क्या करें - deepak ke niche rakhe chawal ka kya karen

दीपक के नीचे रखे चावल का क्या करें – deepak ke niche rakhe chawal ka kya karen

दीपक के नीचे रखे चावल का क्या करें : दीपक के नीचे चावल तब रखा जाता है, जब दीपक के लिए आसन नहीं होता, क्योंकि दीपक को भूमि पर सीधे नहीं रखा जाता हैं। चावल को वैकल्पिक आसन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। और कारण यह होता है कि दीपक में भी देवत्व होता है, और शास्त्रों के अनुसार भूमि पर दीपक को रखने के निषेध होता है। इसलिए, दीपक के लिए आसन की आवश्यकता होती है, और जब यह नहीं होता, तब चावल का प्रयोग किया जाता है। दीपक देवताओं के दाहिनी ओर और देवियों के बांयी ओर रखनी चाहिए।

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उल्काभ्रमण का शास्त्रीय प्रमाण

उल्काभ्रमण का शास्त्रीय प्रमाण क्या है? पितृ विसर्जन कब करें? पितृ विसर्जन कैसे किया जाता है?

उल्काभ्रमण का शास्त्रीय प्रमाण क्या है? पितृ विसर्जन कब करें? पितृ विसर्जन कैसे किया जाता है? – पितृपक्ष में यमलोक से पितृगण पृथ्वी पर अन्न-जलादि की आकांक्षा से आते हैं; और पितरों के आने से ही महालय सिद्ध होता है। पितृपक्ष में तर्पण-श्राद्ध आदि के द्वारा पितरों को अन्न-जलादि प्रदान किया जाता है। यदि पितर गण यमलोक से आते हैं तो वापस भी जाना ही चाहिए। कार्तिक अमावास्या को पितर वापस यमलोक जाते हैं।

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अकाल मृत्यु से बचने के लिए क्या करना चाहिए : yam deep daan

अकाल मृत्यु से बचने के लिए क्या करना चाहिए : yam deep daan

अकाल मृत्यु से बचने के लिए क्या करना चाहिए : yam deep daan – अकाल मृत्यु का वास्तविक तात्पर्य है सहज मृत्यु न होकर वृद्धावस्था से पूर्व रोग, दुर्घटना आदि कारणों से मृत्यु होना । जिस किसी घर में अकालमृत्यु होती है वह घर विपत्ति में आ जाता है, शोकाकुल रहता है। अकालमृत्यु निवारण हेतु महामृत्युंजय जप

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