धर्मो रक्षति रक्षितः का अर्थ

धर्मो रक्षति रक्षितः – पूर्ण श्लोक अर्थ सहित

धर्मो रक्षति रक्षितः पूर्ण श्लोक क्या है ? धर्मो रक्षति रक्षितः श्लोक का अर्थ क्या है ? इस लेख में हम इस श्लोक के ऊपर विस्तृत चर्चा करेंगे। क्या आप धर्मो रक्षति रक्षितः पूर्ण श्लोक को जानते हैं ? यह श्लोक किस ग्रंथ का है ? धर्मो रक्षति रक्षितः का क्या अर्थ है ? हम यहाँ इस विषय पर गंभीरता से विचार करेंगे। इसके संदर्भ को समझने का प्रयास करेंगे।

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आत्महत्या के कारण – आत्महत्या रोकथाम के उपाय

आत्महत्या के कारण – आत्महत्या रोकथाम के उपाय

आत्महत्या की मूल समस्या आत्मबल की कमी मानी जाती है। सूर्य के सबल होने से आत्मबल बढ़ता है। निराशावादी और असफलतापूर्ण व्यक्ति के आत्मबल में कमी होती है। इस मुद्दे को दूर करने के लिए आत्महत्या रोकथाम के प्रयासों पर चर्चा करनी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आत्मशक्ति को बढ़ाने, सूर्य उपासना, आशावादी सोच, और परिवारिक एकता को बढ़ाने, और सनातन विद्या को मान्यता देने के बारे में सुझाव दिए गए हैं। आत्महत्या को दूर करने का सफल रास्ता आत्मबल में वृद्धि करना है।

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आत्महत्या क्या है ? आत्महत्या के कारण - या मूल कारण क्या हैं ?

आत्महत्या क्या है ? आत्महत्या के कारण – या मूल कारण क्या हैं ?

ईश्वर द्वारा प्रदत्त अमूल्य जीवन को स्वतंत्र रूप से समाप्त करना आत्महत्या है, जिस पर विचारणीय रूप से कम ही चर्चा होती है। इस लेख में, आत्महत्या का स्वरूप, इसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई, और क्यों किसी को आत्महत्या का अधिकार नहीं होता है पर विचार किया गया है। आत्मायुक्त शरीर का सम्मान किया जाना चाहिए क्योंकि इसमें ईश्वर का ही अंश विद्यमान होता है। आत्महत्या को अक्षम्य पाप माना जाता है और इसके प्रतीक आत्महत्या को रोकने का उपाय आत्मा से संबंधित जीवन को समझने और सूर्य की उपासना करने में निहित है।

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कोहरा दान

कोहरा क्या है ? अक्षय नवमी के दिन क्या करना चाहिए ?

अक्षय नवमी का महत्व सनातन धर्म में अत्यंत उच्च है। इस साल 2023 में यह पर्व 21 नवम्बर मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन कूष्माण्ड (कोहरा) दान करने का विशेष महत्व होता है, जिससे पुण्य प्राप्त किया जाता है। कूष्माण्ड दान से पापों की शमन होती है और पुत्र, पौत्र, धन सम्पत्ती की वृद्धि होती है। इसमें दान की विधि और मंत्र भी सम्पूर्ण रूप से निर्धारित किए गए हैं, जिन्हें जानकर व्यक्ति अधिक से अधिक पुण्य प्राप्त कर सकता है।

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दण्ड क्या है ? दण्ड का उद्देश्य क्या है?

दण्ड क्या है : “दण्ड” शब्द कई अर्थों में प्रयोग होता है: एक डंडा, चोट, सजा, एक समय मापन की इकाई, व्यायाम, और एक प्रणाम. राजनीतिक उपायों में भी इसकी पहचान दण्ड के रूप में की जाती है। इसका अन्य विशेष अर्थ छठ महापर्व में पाया जाता है, जब व्रती सूर्य को प्रणाम कर दण्ड देते हैं, जिसका उद्देश्य किसी कामना की पूर्ति होती है। यहाँ पर “दण्ड” शब्द का अर्थ पूजा घाट तक दण्डवत प्रणाम कर जाना होता है। इसे सूर्य को दण्ड देना कहा जाता है।

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कार्तिकेय की पूजा क्यों नहीं होती है

कार्तिकेय की पूजा क्यों नहीं होती है

कार्तिकेय की पूजा क्यों नहीं होती है : दक्षिण भारत में मुरुगन के नाम से उनकी पूजा होती है, जो उत्तर भारत में कम होती है। हालांकि, कार्तिकेय उत्तर में भी पूजे जाते हैं और उसके कई प्रमाण हैं, जैसे कि दुर्गा पूजा, यज्ञानुष्ठान, और स्कंद षष्ठी त्यौहार। विभिन्न मान्यताओं के हिसाब से, महिलाएं कार्तिकेय की पूजा नहीं करतीं हैं क्योंकि उन्होंने कभी नारी जाति को श्राप दिया था। वह कहते हैं कि जो स्त्री उनका मांस और खाल से रहित स्वरूप देखेगी, वह सात जन्मों तक विधवा रहेगी।

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छठ पूजा की विधि

छठ पूजा का महत्व क्या है – 8 Points

छठ पूजा का महत्व क्या है : अपनी विशेष उपासना विधि और आकर्षकों के कारण, छठ पूजा एक भारतीय सांस्कृतिक धरोहर मानी जाती है। प्रचलित झूठी और मनगढंत बातें छठ पूजा के वास्तविक महत्व को छिपाती हैं। यह लेख विस्तार पूर्वक छठ पूजा के विभिन्न पहलुओं को उजागर करता है, जिसके माध्यम से हमें इसकी गूढ़ बातें और महत्व का ज्ञान होता है।

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कर्मकांड के प्रकार

कर्मकांड के प्रकार

कर्मकांड के प्रकार : कर्मकांड के विभाजन की चर्चा करते समय हमें ‘कर्म (actions)’ के प्रकार को समझना नहीं चाहिए। यह भी स्पष्ट है कि वेदों के आधार पर कर्मकांड के प्रकार का विभाजन करने का विचार भी प्रासंगिक नहीं होता है। कर्मकांड को वास्तव में केवल दो प्रकार से विभाजित किया जा सकता है: 1) अब्राह्मण कर्मकांड, जिसे स्वयं किया जा सकता है और इसमें ब्राह्मण की आवश्यकता नहीं होती। 2) सब्रह्माण कर्मकांड, जिसे बिना ब्राह्मण के सम्पादन नहीं किया जा सकता है। अत: कर्मकांड की प्रकारों का निर्धारण कर्मों के आधार पर होता है, लेकिन वे कर्म के प्रकार से भिन्न हो

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26 एकादशी के नाम

कर्मकांड में क्या क्या आता है ?

कर्मकांड में क्या क्या आता है : यह पोस्ट जीवन में कर्मकाण्ड की आवश्यकता व्याख्या करती है। ऐसा दावा किया गया है कि जन्म से लेकर मृत्यु तक और सोने से जागने तक, हमारे सभी कर्म कर्मकाण्ड के अंतर्गत आते हैं। कर्मकाण्ड में प्रत्येक कर्म की विधियाँ, विहित, निषिद्ध इत्यादि संकलित होती हैं जो धार्मिक ग्रंथों में मिलती हैं। सुख, दुःख या शांति की प्राप्ति के लिए हमें अनुचित कर्म करने पड़ते हैं, जिसकी विधि शास्त्रों में वर्णित है। ऐसा भी माना गया है कि कर्म का त्याग करना संभव नहीं है, हालाँकि कर्म फल की इच्छा का त्याग किया जा सकता है।

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कर्मकांड क्या है – Karmkand kya hai

कर्मकांड क्या है – Karmkand kya hai : कर्मकांड से पहले ‘कर्म’ और ‘कांड’ को समझना जरूरी है। कर्म जीवन में हमारे द्वारा किए गए सभी कार्य हैं, जो अनेक दृष्टीकोणों से विश्लेषित किए जा सकते हैं। ‘कांड’ हमारे द्वारा किए गए कार्यों के खंड, भाग या घटना होते हैं। ‘कर्मकांड’ में, ‘कर्म’ अध्यात्मिकता का एक खंड होता है और इस खंड के विधान को ‘कर्मकांड’ कहते हैं। इसका उद्देश्य लौकिक और पारलौकिक सुख की प्राप्ति का मार्ग प्रदान करना है।

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