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हरितालिका तीज पूजा विधि और कथा

पूजा का काल प्रदोषकाल ही होता है अतः प्रदोषकाल में ही पूजा करे। पवित्रीकरणादि करके सर्वप्रथम संकल्प करे। यदि चौदह वर्षों तक ही करना हो तो प्रथम वर्ष चौदह वर्ष करने का संकल्प करे, अन्य वर्षों में संकल्प करे। यदि 14 वर्ष से अधिक भी करना हो तो 14 वर्षों वाला संकल्प प्रथम वर्ष न करे।

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हरितालिका तीज पूजा विधि और कथा

तीज त्यौहार : हरितालिका तीज का महत्व व व्रत-पूजा विधि

जैसे दिन में आँखें मूंद लेने से रात नहीं हो जाती उसी तरह सत्य को नकारने मात्र से वह असत्य नहीं हो जाता। विधवा का नयी व्यवस्थानुसार पुनर्विवाह कर देने से जीवन में व्यस्तता तो आ जाती है किन्तु वैधव्य का दुःख समाप्त नहीं होता। हरितालिका तीज व्रत वैधव्य निवारण के लिये किया जाता है।

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तीज कब है 2024, हरतालिका तीज कब है

हरितालिका तीज के संबंध में दृश्य और अदृश्य में पंचांगों में तिथि काल में 3 घंटे का अंतर होते हुये भी दोनों ही प्रकार से 5 सितम्बर 2024 गुरुवार को द्वितीयायुता तृतीया है एवं 6 सितम्बर शुक्रवार को चतुर्थीयुता तृतीया है। 2024 में सभी प्रकार के पंचांगों से विचार करने पर भी 6 सितम्बर शुक्रवार को ही हरितालिका तीज व्रत सिद्ध होता है।

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कृष्ण जन्माष्टमी कब है ? जन्माष्टमी 2024

कृष्ण जन्माष्टमी कब है ? जन्माष्टमी 2024

वेधसिद्ध अर्थात दृश्य पंचांगों द्वारा 26 अगस्त 2024 सोमवार को ही औदयिक व निशीथव्यापिनी दोनों अष्टमी उपलब्ध है, 27 अगस्त को तनिक भी नहीं है इस कारण 26 अगस्त सोमवार को ही जन्माष्टमी व्रत की सिद्धि होती है।

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रक्षाबंधन निर्णय 2024

रक्षाबंधन निर्णय 2024 : रक्षाबंधन कब करें विस्तृत जानकारी

यह सिद्ध होता है कि रक्षाबंधन व होलिका में भद्रा का पूर्ण त्याग करना चाहिये बिना किसी परिहार का विचार किये। चूंकि 19 अगस्त 2024 को भद्रा की समाप्ति 1:32 बजे मध्याह्न में हो रही है अतः मध्याह्न 1:32 के पश्चात् ही रक्षाबंधन करना चाहिये।

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मंगल शांति के उपाय | मंगल शांति पूजा

मंगल शांति के उपाय | मंगल शांति पूजा 5th

मंगल शांति के उपाय : मंगल शांति का तात्पर्य है मंगल के अशुभ फलों के निवारण की शास्त्रोक्त विधि। यदि मंगल निर्बल हो तो सबल करने के लिये मूंगा आदि धारण करना लाभकारी होता है। किन्तु यदि मंगल के कोई अशुभ प्रभाव हों तो उसका निवारण रत्न धारण करना नहीं होता, अशुभ प्रभाव का निवारण करने के लिये शांति ही करनी चाहिये।

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ये कौन लोग मंदिरों में जमे हुये हैं जब-जैसे जो करे पूजा करा देते हैं

किन्तु पुनः प्रश्न है कि ज्ञाननगरी काशी में भगवान विश्वनाथ मंदिर में भी ऐसे ब्राह्मण किस प्रकार जमे हुये हैं जो बिना धोती-धारण किये पूजा करा रहे थे ? अमित शाह ने एक हाथ से प्रणाम किया, तो ब्राह्मणों ने बताया क्यों नहीं कि दोनों हाथ से प्रणाम करें ?

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दशाश्वमेध घाट पर मोदी का गंगा पूजन और समझने वाली गंभीर तथ्य

आज मोदी ने लोकसभा चुनाव के लिये तीसरी बार मुक्तिधाम काशी से अपना नामांकन कराया, जिसका आरम्भ दशाश्वमेध घाट पर गंगा पूजन करके किया। इस आलेख में सकारात्मक तथ्य तो उजागर किया ही गया है साथ ही नकारात्मक पक्ष जो कोई नहीं उठाने वाला है उजागर किया गया है और अपेक्षा की जाती है कि…

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चंद्र ग्रह शांति विधि

चंद्र ग्रह शांति विधि | कमजोर चंद्रमा के लक्षण और उपाय 4th

चंद्र ग्रह शांति विधि : हम सभी जानते हैं कि चन्द्रमा मन का कारक है और चन्द्रमा यदि अशुभ हो तो क्या-क्या दुष्परिणाम होते हैं ? मुख्य रूप से चन्द्रमा मन को ही प्रभावित करता है एवं कमजोर चंद्रमा के लक्षण और उपाय समझने के लिये पूर्व में ही आलेख प्रकाशित किया

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सूर्य ग्रह शांति – surya shanti

सूर्य ग्रह शांति | surya shanti

सूर्य ग्रह शांति – रत्नादि धारण का तात्पर्य निर्बल ग्रह को बलयुक्त करना। अर्थात रत्नादि धारण करने का तात्पर्य अनिष्टफलों का निवारण करना नहीं होता है, तथापि किञ्चित लाभ अवश्य प्राप्त होता है।

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