कार्तिकेय की पूजा क्यों नहीं होती है : दक्षिण भारत में मुरुगन (कार्तिकेय) की पूजा होती है, जो उत्तर भारत में कम होती है। लेकिन कार्तिकेय उत्तर में भी पूजे जाते हैं और इसके कई प्रमाण भी हैं, जैसे कि : दुर्गा पूजा, यज्ञानुष्ठान, और स्कंद षष्ठी व्रत आदि। विभिन्न मान्यताओं के हिसाब से, महिलाएं कार्तिकेय की पूजा नहीं करतीं हैं क्योंकि उन्होंने कभी नारी जाति को श्राप दिया था कि जो स्त्री उनका मांस और खाल से रहित स्वरूप देखेगी, वह सात जन्मों तक विधवा रहेगी।

कार्तिकेय की पूजा क्यों नहीं होती है
दक्षिण भारत मे मुरूगन के नाम से उनकी बहुत पूजा होती है लेकिन तारकासुर को मारने के बाद वो दक्षिण मे ही रह गए थे इसलिए उत्तर भारत मे उनकी पूजा नहीं होती। ये उत्तर गूगल द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। बहुत सारे देवताओं के मंदिर नहीं होते तो क्या इसका ये अर्थ है कि उनकी पूजा नहीं होती है ? लेकिन ऐसी कोई बात नहीं है। यह तथ्य असत्य है।
कार्तिकेय की पूजा होती है और इस सम्बन्ध में यहाँ कुछ प्रमाण प्रस्तुत किये जा रहे हैं :
- दुर्गा पूजा के अवसर पर पंडालों में कार्तिकेय की भी प्रतिमा बनायी जाती है और पूजा की जाती है।
- यज्ञ-अनुष्ठानों में भी विभिन्न वेदियों पर कार्तिकेय की पूजा होती है।
- शिव पूजा करते समय शिव परिवार पूजा में कार्तिकेय की पूजा की जाती है।
- मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष की स्कंद षष्ठी कहलाती है जो स्कंद अर्थात कार्तिकेय के निमित्त ही होता है।
इस प्रकार यह प्रश्न ही गलत है कि कार्तिकेय की पूजा क्यों नहीं होती है।
कार्तिकेय की कहानी
लेकिन कुछ कहानी एवं मान्यताओं के अनुसार महिलाएं कार्तिकेय की पूजा नहीं करती हैं और इसकी कहानी विवाह से जुड़ी है। गणेश और कार्तिकेय में प्रथम किसका विवाह हो इसके लिये पृथ्वी की परिक्रमा वाली शर्त रखी गई। कार्तिकेय अपना वाहन मोर लेकर पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए निकल गये तब गणेश जी ने माता पार्वती और पिता शंकर भगवान की परिक्रमा करके बुद्धिमत्ता पूर्ण तर्क प्रस्तुत किया कि हमनें सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की परिक्रमा कर ली पृथ्वी क्या है। और इस कारण गणेश भगवान का विवाह हो गया।
जब कार्तिकेय पृथ्वी की परिक्रमा करके लौटे तब क्रोधित हो गए, और अपना मांस तथा खाल उतारकर माता पार्वती के सामने रख दिया। इसके बाद कार्तिकेय ने समस्त नारी जाति को श्राप दिया कि जो स्त्री उनके इस स्वरूप के दर्शन करेगी वह सात जन्मों तक विधवा रहेगी। कार्तिकेय के इस श्राप के कारण आज भी कहां पर उनकी पूजा नहीं होती वो स्थान कोई नहीं बताता। श्राप में यह कहा गया कि उनका मांस और खाल रहित स्वरूप को देखना वैधव्य का कारण होगा।
कर्मकांड विधि में शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रामाणिक चर्चा की जाती है एवं कई महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा पूर्व भी की जा चुकी है। तथापि सनातनद्रोही उचित तथ्य को जनसामान्य तक पहुंचने में अवरोध उत्पन्न करते हैं। एक बड़ा वैश्विक समूह है जो सनातन विरोध की बातों को प्रचारित करता है। गूगल भी उसी समूह का सहयोग करते पाया जा रहा है अतः जनसामान्य तक उचित बातों को जनसामान्य ही पहुंचा सकता है इसके लिये आपको भी अधिकतम लोगों से साझा करने की आवश्यकता है।