यहां पढ़िये तारा हृदय स्तोत्र - Tara Hriday stotram

यहां पढ़िये तारा हृदय स्तोत्र – Tara Hriday stotram

यहां पढ़िये तारा हृदय स्तोत्र – Tara Hriday stotram : भैरवीतन्त्र में तारा हृदय स्तोत्र मिलता है जिसे उग्रतारा हृदय स्तोत्र भी कहा जाता है। यहां भैरवी तंत्रोक्त उग्रतारा हृदय स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है। दशमहाविद्या में से किसी भी महाविद्या की उपासना करनी हो योग्य गुरु का मार्गदर्शन अनिवार्य होता है।

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यहां पढ़िये तारा कवच स्तोत्र - Tara Kavach stotram

यहां पढ़िये तारा कवच स्तोत्र – Tara Kavach stotram

यहां पढ़िये उग्रतारा प्रत्यङ्गिरा कवच – Tara Kavach stotram : तारा कवच अथवा उग्रतारा कवच रुद्रयामल तंत्र में वर्णित है और इसके साथ ही एक अन्य तारा प्रत्यङ्गिरा कवच स्तोत्र भी है जिसे उग्रतारा प्रत्यङ्गिरा कवच, नीलसरस्वती कवच आदि नामों से भी जाना जाता है। यहां रुद्रयामोक्त तारा कवच और तारा प्रत्यंगिरा कवच दोनों दिया गया है।

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यहां पढ़िये तारा सहस्रनाम स्तोत्र - Tara Sahasranam stotram

यहां पढ़िये तकारादि तारा सहस्रनाम स्तोत्र – Tara Sahasranam stotram 2

यहां पढ़िये तकारादि तारा सहस्रनाम स्तोत्र – Tara Sahasranam stotram 2 : अक्षोभ्यसंहितायोक्त तारा सहस्रनाम पूर्व में प्रकाशित किया जा चुका है और यहां ब्रह्मयामलोक्त तकारादि तारा सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है जो विशेष महत्वपूर्ण है।

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यहां पढ़िये तारा सहस्रनाम स्तोत्र - Tara Sahasranam stotram

यहां पढ़िये तारा सहस्रनाम स्तोत्र – Tara Sahasranam stotram

यहां पढ़िये तारा सहस्रनाम स्तोत्र – Tara Sahasranam stotram : दशमहाविद्या में से एक माँ तारा विशेष महत्वपूर्ण हैं और यदि सहस्रनाम की बात करें तो अनेकों सहस्रनाम देखने को मिलता है जिसमे से एक विशेष महत्वपूर्ण सहस्रनाम श्रीबृहन्नीलतन्त्र में भैरवभैरवी के संवाद रूप में मिलता है। यहां श्रीबृहन्नीलतन्त्रोक्त तारा सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है जो विशेष महत्वपूर्ण है।

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यहां पढ़ें तारा स्तोत्र अष्टोत्तर शतनाम : tara stotra 108 Name

यहां पढ़ें तारा स्तोत्र अष्टोत्तर शतनाम : tara stotra 108 Name

यहां पढ़ें तारा स्तोत्र अष्टोत्तर शतनाम : tara stotra 108 Name : विभिन्न देवी देवताओं के स्तोत्रों में अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का अपना विशेष महत्व होता है। महाविद्या तारा के भी कई अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र हैं जिनमें से तीन तारा स्तोत्र यहां दिया गया है। प्रथम तारा अष्टोत्तर शतनाम स्वर्णमालातन्त्र और मुण्डमालातन्त्रोक्त है, द्वितीय बृहन्नीलतन्त्रोक्त और तृतीय श्रीकालीविलासतन्त्रोक्त है। तीनों तारा अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है।

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यहां पढ़िये ताराष्टक अथवा श्री नीलसरस्वती स्तोत्र - Nil saraswati stotram

यहां पढ़िये ताराष्टक अथवा श्री नीलसरस्वती स्तोत्र – Nil saraswati stotram

यहां पढ़िये ताराष्टक अथवा श्री नीलसरस्वती स्तोत्र – Nil saraswati stotram : दशमहाविद्याओं में माता तारा भी एक प्रमुख महाविद्या हैं। सभी देवताओं की भांति इनका भी एक अष्टक स्तोत्र है जिसे ताराष्टक के साथ-साथ नीलसरस्वती स्तोत्र भी कहते हैं। यहां श्री नीलसरस्वती स्तोत्र (Nil saraswati stotram) अर्थात ताराष्टक स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है।

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