यहां पढ़िये ताराष्टक अथवा श्री नीलसरस्वती स्तोत्र – Nil saraswati stotram

यहां पढ़िये ताराष्टक अथवा श्री नीलसरस्वती स्तोत्र - Nil saraswati stotram

दशमहाविद्याओं में माता तारा भी एक प्रमुख महाविद्या हैं। सभी देवताओं की भांति इनका भी एक अष्टक स्तोत्र है जिसे ताराष्टक के साथ-साथ नीलसरस्वती स्तोत्र भी कहते हैं। यहां श्री नीलसरस्वती स्तोत्र (Nil saraswati stotram) अर्थात ताराष्टक स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है।

जिनकी 10 भुजाये है और क्रमशः उन भुजाओ में खड्ग, चक्र, गदा, बाण, धनुष, परिघ, त्रिशूल, भुशुण्डी, मुण्ड और शङ्ख धारण किया है।

ऐसी तीन नेत्रों वाली त्रिनेत्रा सभी अङ्गो में आभूषणों से विभूषित नीलमणि जैसी आभावाली दशमुखों वाली और दश पैरों वाली महाकाली माता; जिनकी स्तुति मधु कैटभ का वध करने के लिए विष्णु के सो जाने पर साक्षात् ब्रह्मदेव (ब्रह्माजी) ने की थी; का मैं ध्यान करता (या करती) हूँ।

कर्मकांड विधि में शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रामाणिक चर्चा की जाती है एवं कई महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा पूर्व भी की जा चुकी है। तथापि सनातनद्रोही उचित तथ्य को जनसामान्य तक पहुंचने में अवरोध उत्पन्न करते हैं। एक बड़ा वैश्विक समूह है जो सनातन विरोध की बातों को प्रचारित करता है। गूगल भी उसी समूह का सहयोग करते पाया जा रहा है अतः जनसामान्य तक उचित बातों को जनसामान्य ही पहुंचा सकता है इसके लिये आपको भी अधिकतम लोगों से साझा करने की आवश्यकता है।

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