दैनिक पूजा के लिए सही देवता का चयन कैसे करें – How to Choose the Right Deity for Daily Puja

दैनिक पूजा के लिए सही देवता का चयन कैसे करें - How to Choose the Right Deity for Daily Puja दैनिक पूजा के लिए सही देवता का चयन कैसे करें - How to Choose the Right Deity for Daily Puja

दैनिक पूजा के लिए सही देवता का चयन एक गहन व्यक्तिगत और सार्थक निर्णय हो सकता है। यह आलेख विभिन्न देवताओं, उनकी अनूठी विशेषताओं और यह निर्धारित करने के तरीके पर प्रकाश डालता है कि आपकी व्यक्तिगत आध्यात्मिक यात्रा में कौन देवता सबसे अधिक संगत है। दैनिक पूजा के लिए उपयुक्त देवता के चयन की प्रक्रिया का अन्वेषण किया गया है। यह मार्गदर्शन प्रदान किया गया है कि आप अपनी व्यक्तिगत मान्यताओं, आकांक्षाओं और इच्छित विशिष्ट लाभों के अनुरूप देवता का चयन कैसे करें। इसके साथ ही हम यह भी अन्वेषण करेंगे कि स्वयं के लिये इष्ट का चयन करें तो कैसे करें ?

दैनिक पूजा के लिए सही देवता का चयन कैसे करें – How to Choose the Right Deity for Daily Puja

क्या आप अपनी आध्यात्मिक यात्रा में भटके हुए हैं? निश्चित नहीं हैं कि कौन सा देवता आपकी आत्मा के साथ प्रतिध्वनित होता है? आपके और ईश्वर के बीच एक गहरा संबंध है। अपनी दैनिक पूजा के लिए सही देवता चुनने के पीछे छिपे ज्ञान को उजागर करें और आत्मज्ञान के लिए एक व्यक्तिगत मार्ग खोजें।

परिचय: सही देवता चुनने का महत्व

“क्या आप अपनी दैनिक पूजा में ये सामान्य गलतियाँ कर रहे हैं? इन व्यावहारिक सुझावों से जानें कि कैसे सुनिश्चित करें कि आपकी साधना सार्थक और प्रभावी हो।”

जहां तक दैनिक पूजा के लिए सही देवता चुनने का प्रश्न है तो यह प्रश्न ही अनुचित है, क्योंकि नित्य कर्म के लिए जहां देव कर्म का विधान है या अन्य जो भी नित्य कर्म के विधान है उनमें देवता हों, पितर हों इन सब का निर्धारण शास्त्रों द्वारा किया जा चुका है पुनः चयन करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है और यह एक तरह से शास्त्र का उल्लंघन करना है। वास्तविकता यह है कि यह चर्चा दैनिक पूजा के लिए देवता के चयन से संबंधित है ना की इष्ट देवता के चयन से यह AI द्वारा प्रस्तावित आलेख का शीर्षक है और आगे के भी जो शीर्षक आपको देखेंगे सभी AI द्वारा ही प्रस्तावित हैं ।

यही तो दुराग्रह है षड्यंत्रकारी सनातन द्रोही जो है वह इस प्रकार से आपको भ्रमित करने का प्रयास करते हैं कि यदि सजग ना रहे तो भ्रमित हो जाए और अभी वर्तमान में जो वीडियो बनाए जाते हैं आलेख लिखे जाते हैं उन सभी को इसी प्रकार के सुझाव या परामर्श दिए जाते हैं और इसी प्रकार से दुराग्रहियों के षड्यंत्र का शिकार होकर वह लोग वीडियो बनाते हैं आलेख लिखते हैं जो धर्म के विषय में सामान्य जनों को  दिग्भ्रमित करने वाला है। हम जो प्रस्तावित है उसके अनुसार शीर्षक आदि देकर इस विषय की चर्चा तो कर रहे हैं किंतु जो उसका लक्ष्य है और सनातन के विरुद्ध है उसके प्रतिकूल कर रहे हैं।

दैनिक पूजा का यह जो देवता चयन संबंधी प्रस्ताव है यह यूट्यूब द्वारा प्रस्तावित किया गया है कि ऐसी चर्चा कीजिए जिसमें दैनिक पूजा के लिए देवता का चयन कैसे करें यह तो स्पष्ट कर चुके हैं कि दैनिक पूजा में देवता चयन करना यह स्वयं में ही त्रुटि पूर्ण संदेश है। हम इष्ट देवता का चयन कर सकते हैं किंतु दैनिक पूजा के स्थान पर नित्य कर्म जो वास्तव में होता है उसमें देव यज्ञ के लिए पंचदेवता पूजन का विधान मिलता है।

अब सोचने की जो बात है की नित्य पूजा में जब शास्त्र द्वारा पंचदेवता की पूजा का विधान किया गया है तो फिर यहां पर चयन की आवश्यकता कहां है, कोई आवश्यकता नहीं है पंचदेवता की पूजा होगी । दैनिक पूजा कहना स्वयं में ही त्रुटि पूर्ण है हम नित्यकर्म कह सकते हैं और नित्य कर्म में देव उपासना भी है किंतु चूँकि विषय देवता के चयन की है तो यह इष्ट देवता के प्रकरण में आता है कि इष्ट देवता का चयन कैसे करें और इष्ट देवता की भी नित्य पूजा होगी किंतु इष्ट देवता की पूजा से भी पूर्व दैनिक पूजा जो शब्द है उसके अनुसार पंचदेवता की ही पूजा होगी।

  • दैनिक पूजा का आध्यात्मिक महत्व:  अब देखिए यह कह रहा है दैनिक पूजा का आध्यात्मिक महत्व अरे दैनिक पूजा शब्द ही असंगत है अपूर्ण है। दैनिक पूजा नहीं नित्य कर्म होता है और नित्य कर्म का आध्यात्मिक महत्व होता है। प्रतिदिन हम जो जीवनचार्य जीते हैं उसमें हमसे अनेक अनेक पाप होते हैं चाहे घर की स्वच्छता करें, शरीर वस्त्र इत्यादि की स्वच्छता करें भोजन पकाए भोजन करें अन्य कार्य करें सायन करें सर्वत्र हमसे पाप होते ही रहते हैं। इसका शमन कैसे होगा तो इसके संबंध में आता है कि नित्य कर्म करने वालों के यह सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और यही इसका मुख्य विषय है। आगे इसी को तप भी कहा गया है गृहस्थ जीवन के लिए निरंतर अटूट विश्वास के साथ यथाकाल नित्यकर्म करना धर्म अनुसार जीवन यापन करना यही तपस्या भी है।
  • विभिन्न देवता और उनके अनूठे गुण:  अब यहां देखिए विभिन्न देवताओं और उनके गुण की चर्चा करने के लिए कह रहा है । इस प्रकरण में भी जो चर्चा करने के लिए प्रयास करेंगे तो वह न जाने क्या-क्या क्या-क्या कहने लगेंगे। चलिए इसके अनुसार नहीं लेकिन जो शीर्षक है विभिन्न देवता और उनके गुण तो तीन गुण कह गए हैं हम यदि प्रामाणिक रूप से समझने का प्रयास करें तो सत रज और तम यह तीन गुण होते हैं और यह तीन गुण विष्णु, ब्रह्मा और शिव के हैं। यद्यपि ऐसा भी पूर्ण सत्य नहीं है । इनको त्रिगुणातीत कहा जाता है तीनों गुणों से परे तो फिर इनका और गुण क्या होगा तो इनका गुण है नहीं क्योंकि ये गुणातीत होते हैं । किंतु इसी प्रकार की चर्चा यदि अन्यत्र कहीं आपको मिले तो वहां आपको समझ में आएगा कि किस प्रकार से सनातन के विरुद्ध वैश्विक षड्यंत्र चल रहा है और सनातन के विषय में चर्चा करने वाले उसको संपादित कर रहे हैं।
  • अपनी पूजा पद्धति को व्यक्तिगत बनाना:  अब यहां देखिए यहां कह रहा है की अपनी पूजा पद्धति को व्यक्तिगत बनाना यह प्रस्ताव है । इसके अनुसार हमको चर्चा यही करनी है, सोचिये यह कैसे संभव है? व्यक्तिगत पूजा पद्धति क्या होती है सोचिए? जो शास्त्रोक्त पूजा पद्धति है और जो है शास्त्रों में वर्णित है और वही पूजा पद्धति है अब हम व्यक्तिगत पूजा पद्धति कहां से बना लें। क्या सुनाएं, क्या बताएं, क्या जनमानस को दिग्भ्रमित करें? यह जो कह रहा है व्यक्तिगत बनाना इसमें गोपनीयता कही जा सकती थी कि गोपनीयता संबंधी चर्चा कीजिए लेकिन यह कह रहा है व्यक्तिगत बनाना।
  • एक गहन आध्यात्मिक संबंध को बढ़ावा देने और व्यक्तिगत कल्याण को बढ़ावा देने में दैनिक पूजा की भूमिका पर प्रकाश डालें। :- यह भी एक परामर्श ही है और निर्देशित करता है कि इस प्रकार से आप चर्चा करें यहां पर पुनः दैनिक पूजा शब्द का ही प्रयोग कर रहा है। अरे दैनिक पूजा शब्द ही असंगत है नित्य कर्म होना चाहिए। दैनिक पूजा कहते हैं तो उसका तात्पर्य होता है नित्यकर्म का त्याग करके स्वेच्छा से कुछ भी कर लेना मनमर्जी करना जैसा कि देखने को मिलता है और यह कहता है कि उसी को बढ़ावा दीजिए उसके लिए आप चर्चा कीजिए कि भाई तुम ऐसा करो इस देवता की पूजा करो प्रतिदिन अमुक देवता की पूजा करो । जहां तक व्यक्तिगत कल्याण की बात है तो इसमें कुछ संगति है व्यक्तिगत कल्याण शब्द का प्रयोग करें तो यह लौकिक सुख का बोधक है आत्म कल्याण कहे तो लौकिक और पारलौकिक दोनों अर्थ होता है, किंतु यह आत्म कल्याण के स्थान पर व्यक्तिगत कल्याण का प्रयोग करता है।

अपने आध्यात्मिक पथ को समझना

अपने आध्यात्मिक पथ को समझना यह शीर्षक उचित है ऐसा होना चाहिए। जैसे यदि हम कहीं जाते हैं यात्रा करते हैं तो जो मार्ग है उसे मार्ग का ज्ञान होना चाहिए कि किस दिशा में है कितना लंबा है। बाइक से या चार चक्के से जाते हैं तो पंप ईंधन का स्रोत कहां-कहां पर है, यह सब ज्ञात रहना चाहिए।

इसी प्रकार से हम आध्यात्मिक यात्रा पर चलते हैं तो हमें अपने पथ का भी ज्ञान होना आवश्यक है की किस प्रकार से यात्रा करें कैसे चले की पथभ्रष्ट ना हों। आध्यात्मिक पथ की बात तो करता है लेकिन विज्ञान की नाक हर जगह घुसेड देगा। आध्यात्मिक पथ का क्या तात्पर्य है जो शास्त्रों में वर्णित है यही ना। शास्त्रों में जो बताया गया है वही आध्यात्मिक पथ है। यह विहित है, यह करो या निषिद्ध है यह मत करो।

यही तो मार्ग है शास्त्रों के अनुसार ही तो आध्यात्मिक यात्रा संभव है। शास्त्रों की जब बात आएगी तो परंपरा, रूढ़िवादिता, कुरीतियां इत्यादि कहकर शास्त्र का विरोध करने के लिए प्रेरित करेंगे। किंतु इस शीर्षक से मैं सहमत हूं – आध्यात्मिक यात्रा करने वालों को आध्यात्मिक पथ का भी ज्ञान होना चाहिए और यह कैसे प्राप्त होगा यह शास्त्रों से प्राप्त होगा शास्त्रों का अध्ययन कीजिए, श्रवण कीजिए, मनन कीजिए तो समझ में आएगा। शास्त्र ही बताएंगे ना की नित्य कर्म क्या-क्या है उनके विधान क्या-क्या है शास्त्र तो दैनिक पूजा का प्रयोग कहीं नहीं करता है यह आईडिया देने वाला जो AI है, दैनिक पूजा का प्रयोग बार-बार करता है।

  • दर्शकों को उनकी अनूठी यात्रा और आध्यात्मिक आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए, उनकी व्यक्तिगत मान्यताओं और मूल्यों पर चिंतन करने के लिए प्रोत्साहित करें। :- यह आईडिया जो है उचित है; यह कह रहा है कि जो हमारे व्यक्तिगत मान्यताएं होती हैं, जो हमने मन में बिना शास्त्र ज्ञान के यहां-वहां देख सुनकर बातें बैठा लिया उसका चिंतन करें उन मूल्यों का परीक्षण करें कि क्या यह उचित है अथवा नहीं इसके विषय में शास्त्र क्या कहते हैं हमारी इस मान्यता से हमारे आध्यात्मिक यात्रा पर अर्थात आत्म कल्याण पर कैसा प्रभाव पड़ेगा? क्या कोई बाधा भी आएगी? इसको एक उदाहरण से भी हम समझ सकते हैं यह सुनने को मिलता है। बहुत सारे लोग आप बोलते रहते हैं “मन चंगा कठौती में गंगा” यद्यपि यह संत रविदास से संबंधित है तथापि सामान्य जन जो इसका प्रयोग करते हैं वह विपरीत करते हैं इसका भाव ही विपरीत ग्रहण कर लेते हैं मन चंगा होगा तब तो कठौती में गंगा आएगी यदि तुमको प्रतीत हो रहा है कि मेरा मन चंगा है तो कठौती में गंगा लाकर देखो आत्म परीक्षण कर लो और यदि ऐसा नहीं हो कर पा रहे हो तो यह तुम्हारी आध्यात्मिक यात्रा का बाधक है।
  • ऐसे देवता के साथ जुड़ने के महत्व पर प्रकाश डालें जो आपके मूल मूल्यों का प्रतीक हो और आपके वांछित विकास का समर्थन करता हो। :- एक प्रकार से संगत भी है कि आप क्या चाहते हैं और जो चाहते हैं उसके अनुसार विशेष देवता की पूजा करें किंतु यह दैनिक पूजा कैसे है? यह दैनिक पूजा तो नहीं है यह तो जितनी कामना हो उतनी कामना के अनुसार या कामना पूर्ति होने तक संबंधित देवता की आराधना की जाएगी जैसे आरोग्य के लिए सूर्य भगवान कहे गए हैं ज्ञान के लिए भगवान शंकर कह गए हैं मोक्ष के लिए भगवान विष्णु कह गए हैं तो यह थोड़ा सा संगत है किन्तु नित्यकर्म या दैनिक पूजा से सम्बंधित नहीं है।

अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं की पहचान करना

अपनी आकांक्षाओं और इच्छाओं की पहचान करने के लिए कह रहा है तो इसमें एक मात्र कामना शब्द का प्रयोग होगा कर्मकांड में विभिन्न कामनाओं के लिए विभिन्न प्रकार की पूजाएं होती है अनुष्ठान होते हैं तथापि यह शीर्षक संगत ही माना जाए।

  • दर्शकों को उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं और इच्छाओं की पहचान करने में मार्गदर्शन करें जिन्हें वे अपनी दैनिक पूजा पद्धति के माध्यम से पूरा करना चाहते हैं। :- इस पंक्ति में जो कहा जा रहा है इसका तात्पर्य यह है कि अपनी कामना क्या है उसे कामना के अनुसार दैनिक पूजा स्वीकारें। तो यह पुनः असंगत है अरे नित्यकर्म अनिवार्य है, उसमें विकल्पता ही नहीं है कामना के अनुसार जो कर्म होते हैं उसे दैनिक पूजा नहीं कहते हैं कामना के निमित्त किए जाने वाले कर्म का एक प्रकार है जिसको काम्य कर्म कहा जाता है।
  • समृद्धि, स्वास्थ्य, प्रेम या ज्ञान जैसे क्षेत्रों पर आत्म-चिंतन को प्रोत्साहित करें। :- यह पंक्ति उचित है तथापि जब दुराग्रही लोग ऐसा बोले तो समझ जाइए कि यह भी षड्यंत्र ही है । यह दुराग्रही, वामपंथी इत्यादि जो है आधुनिक हैं; स्वघोषित आधुनिक वैज्ञानिक सोच रखने वाले यह सब समृद्धि स्वास्थ्य ज्ञान शिक्षा आदि सकारात्मक और चिकनी चुपड़ी बातें तो करते हैं किंतु स्कूलों में ही इन लोगों ने अपने दलालों को बैठा रखा है और वह दिखता भी है। कोई कहता है कि तुम कांवड़ लेने मत जाना और यहां से स्पष्ट हो रहा है कि यह धर्म से विमुख करने के लिए ऐसी चिकनी चुपड़ी मीठी-मीठी अच्छी भली सकारात्मक बातें करते हैं ताकि उसको नकारा ना जा सके।

देवताओं और उनकी शक्तियों को समझना

इस पंक्ति को पुनः संगत कहा जाएगा कि जिनकी भी आप पूजा करते हैं उन सबके बारे में आपको जानना समझना चाहिए आपका कोई मित्र भी है तो मित्र के गुण दोष को व्यवहारों को प्रवृत्ति को प्रकृति को समझना होगा, आवश्यक है। देवताओं के विषय में भी सदैव कथा वार्ता करती रहनी चाहिए स्वाध्याय करना चाहिए और इसका ज्ञान इन्हीं माध्यमों से पुराण आदि से ही प्राप्त होता है। आगे आइडिया के अनुसार जो तीन बिंदु है वह यथावत छोड़ दिए गए हैं, क्योंकि यह इतने में ही ठीक है और अधिक चर्चा की आवश्यकता नहीं है।

  • त्रिदेव: ब्रह्मा, विष्णु और शिव, जो सृजन, संरक्षण और संहार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • लोकप्रिय देवता: बुद्धि के लिए गणेश, धन के लिए लक्ष्मी, ज्ञान के लिए सरस्वती, आदि।
  • अपनी वर्तमान आवश्यकताओं के आधार पर देवता का चयन: जीवन की विशिष्ट चुनौतियों के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करना।

विभिन्न देवताओं और उनके गुणों का अन्वेषण

अब पुनः इस चर्चा को आगे बढ़ते हुए जो तीन बिंदु यह दे रहा है वह यहां यथावत दिए गए हैं और इससे आप स्वयं ही समझने का प्रयास करें की क्या देवताओं के यह गुण हैं।

  • गणेश: विघ्नहर्ता और समृद्धि लाने वाले।
  • लक्ष्मी: धन, सौभाग्य और प्रचुरता की देवी।
  • सरस्वती: ज्ञान, संगीत और कला की देवी।
  • अन्य देवता: कम ज्ञात देवताओं और उनके विशिष्ट क्षेत्रों का अन्वेषण।
  • विभिन्न देवताओं का एक व्यापक अवलोकन प्रस्तुत करें, उनके विशिष्ट गुणों, प्रभाव क्षेत्रों और कथाओं पर प्रकाश डालें।
  • प्रत्येक देवता से जुड़े प्रतीकवाद और उनकी संबंधित परंपराओं में उनके महत्व के बारे में जानकारी प्रदान करें।
  • अपनी दैनिक पूजा पद्धति के लिए देवता को चुनने से पहले उनके बारे में शोध करने और उन्हें समझने के महत्व पर ज़ोर दें।

अपने लिए सही देवता ढूँढना

अपने लिए सही देवता ढूंढना यह इष्ट देवता के विषय में संगत है, किंतु दैनिक पूजा अर्थात नित्य पूजा क्रम में समझने का प्रयास करें अथवा कुल देवता के प्रसंग में भी ढूंढने का कोई विकल्प ही नहीं है वहां पर जो है वही है किंतु अपनी प्रवृत्ति और प्रकृति के अनुसार सभी किसी विशेष देवता को इष्ट बन सकता है।

  • आत्मनिरीक्षण और चिंतन: अपनी गहरी इच्छाओं और आकांक्षाओं की पहचान करना। :- चर्चा दैनिक पूजा से हटकर इष्ट देवता के चयन पर आती है दैनिक पूजा के पंच देवता में आपके पास चयन का कोई भी विकल्प नहीं है, किंतु इष्ट देवता  के विषय में ऐसा है की प्रथम तैयार स्वयं की प्रकृति और प्रवृत्ति को समझे आत्मनिरीक्षण करें चिंतन करें और अपनी प्रवृत्ति प्रकृति के अनुसार ही किसी विशेष देवता को जो अनुकूल हो उन्हें इष्ट देवता बनाएं।
  • आध्यात्मिक गुरु से मार्गदर्शन प्राप्त करना: व्यक्तिगत सलाह के लिए किसी गुरु या पुजारी से परामर्श करना। :- आध्यात्मिक गुरु से मार्गदर्शन प्राप्त करने की बात जब करता है तो यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि गुरु कौन होता है ? कोई दूसरा गुरु भी होता है क्या गुरु में आध्यात्मिक शब्द लगाने की धर्म शब्द लगाने की आवश्यकता ही नहीं है। गुरु धर्म के ही होते हैं अध्यात्म के ही होते हैं। अन्य यह जो पढ़ने वाले हैं इनको गुरुवत सम्मान दिया जा सकता है किंतु यह फटीचर गुरु नहीं माने जा सकते हैं परामर्श लेने की बात जहां तक है मार्गदर्शन की जो बात है तो यह सदैव गुरु से लेते रहना चाहिए।

निष्कर्ष: अपनी आध्यात्मिक प्रतिध्वनि ढूँढना

  • पूजा को अपने दैनिक जीवन में शामिल करना: एक पवित्र स्थान बनाना और एक नियमित दिनचर्या स्थापित करना। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यदि हम नित्यकर्म को न समझें तो यह दैनिक पूजा निरर्थक शब्द है, स्वेच्छाचार है, शास्त्रविरुद्ध व्यवहार है और इसका कोई औचित्य ही नहीं है।
  • दैनिक पूजा की परिवर्तनकारी शक्ति: अपनी आध्यात्मिक यात्रा को समृद्ध बनाना और आंतरिक शांति पाना। नित्यकर्म कहें तो विशेष लाभकारी है क्योंकि नित्यकर्म करने से पापों का शमन होता है, जो सफलता, सुख, शांति आदि के बाधक होते हैं।

यदि दैनिक पूजा को सरल शब्दों में समझना चाहें तो उसका तात्पर्य यह है कि आप शास्त्रानुसार नित्यकर्म/आचरण आदि नहीं करते हैं तो भी “कलयुग केवल नाम अधारा” के अनुसार नाम संकीर्तन, नाम जप आदि का विशेष महत्व है और कलयुग में तो विशेष कल्याणकारी है। नाम जप, कीर्तन आदि के लिये किसी न किसी एक को इष्ट तो बनाना ही होगा और जिसे इष्ट बनाएंगे उसकी प्रतिदिन पूजा भी तो करेंगे। यही दैनिक पूजा का मुख्य भाव है कि नित्यकर्मरहित व्यक्ति कलयुगी जीवन जीते हुये भी नाम जप, नाम कीर्तन करने के लिये जिसे इष्ट बनता है उसकी प्रतिदिन पूजा करना।

कर्मकांड विधि में शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रामाणिक चर्चा की जाती है एवं कई महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा पूर्व भी की जा चुकी है। तथापि सनातनद्रोही उचित तथ्य को जनसामान्य तक पहुंचने में अवरोध उत्पन्न करते हैं। एक बड़ा वैश्विक समूह है जो सनातन विरोध की बातों को प्रचारित करता है। गूगल भी उसी समूह का सहयोग करते पाया जा रहा है अतः जनसामान्य तक उचित बातों को जनसामान्य ही पहुंचा सकता है इसके लिये आपको भी अधिकतम लोगों से साझा करने की आवश्यकता है।

Leave a Reply