मन की बात मोदी जी के साथ
मोदी जी तो लगातार कई वर्षों से मन की बात करते आ रहे हैं; आज इस आलेख में हम अपने मन की बात मोदी जी के साथ करेंगे।
मोदी जी तो लगातार कई वर्षों से मन की बात करते आ रहे हैं; आज इस आलेख में हम अपने मन की बात मोदी जी के साथ करेंगे।
हनीमून क्या होता है : हनीमून – “वास्तविक भारतीय वो नहीं है जिसनें भारत में जन्म लिया है, वास्तविक भारतीय वो है जिसके विचार भी भारतीय हैं, आलेख को समझने हेतु भारतीय विचार होना अनिवार्य है”
विवाह गार्हस्थ जीवन का द्वार है और सृष्टि को अनवरत रखने में अपनी भूमिका निर्वहन करने के लिये अनिवार्य होता है। विवाह किये बिना किसी व्यक्ति के गृहस्थ आश्रम का प्रारम्भ नहीं होता।
महामृत्युंजय जाप कितने दिन का होता है – महामृत्युंजय जप को पहले दो भागों में बांटेंगे तब यह सही-सही समझा जा सकता है। स्वयं करना और ब्राह्मणों द्वारा कराना; इन दोनों को विभक्त रूप से समझने पर ही दिन संख्या निर्धारित की जा सकती है।
तीर्थ यात्रा : वह यात्रा जो पापनिवृत्ति और पुण्य प्राप्ति के उद्देश्य से विधि पूर्वक की जाती है जिसमें तीर्थदर्शन, मुण्डन, स्नान, पूजन, पितरों का पिण्डदान, दान, ब्राह्मण भोजन आदि किया जाता है, तीर्थ यात्रा कहलाती है।
यद्यपि शुद्धं लोक विरुद्धम्। नाऽचरणीयं नाऽचरणीयं ॥ का अर्थ यद्यपि शुद्ध हो अर्थात सही हो किन्तु लोक विरुद्ध हो अर्थात हानिकारक हो या हानि संभावित हो तो वह वैसा आचरण मत करो वह कर्म मत करो।
10 वर्षों से ऐसा लग रहा है जैसे देश में मात्र 1 मुख्यमंत्री केजरीवाल था और अब आगे भी संभावना यही है कि केजरीवाल की जगह लेने वाला ही देश का मुख्यमंत्री दिखाया जायेगा, जैसे दिल्ली का मुख्यमंत्री न हो भारत का मुख्यमंत्री हो।
राम मंदिर ऐतिहासिक मंदिर है जो देश के इतिहास और राष्ट्रसम्मान से जुड़ा हुआ है। इस कारण राम मंदिर में जो भी हो उसमें शास्त्रोक्त वचनों का अक्षरशः पालन किया जाना चाहिये। यदि उपस्थित निर्णेता शास्त्र से अनभिज्ञ हों तो उन्हें विद्वानों से परामर्श लेना चाहिये और फिर कोई निर्णय करना चाहिये। अभी कुछ नये नियम बनाये गये हैं जिसकी चर्चा यहां की गयी है।
शुचि का अर्थ होता है पवित्र, शुद्ध, निर्मल, देव-पितृ कर्म के योग्य, आदि। इसी के आगे अशुचि का अर्थ होता है शुचि अर्थात शुद्धता, पवित्रता, निर्मलता, देवपितृ कर्म की योग्यता आदि का अभाव होना। अतः अशुचि अपवित्रता, अशुद्धि, देव-पितृ कर्म में अयोग्यता का बोधक है। – अशौच निर्णय pdf सहित । भाग १ । अशौच के प्रकार । सूतक क्या होता है
जब नये धर्म-शास्त्रों का निर्माण करना चाहते हैं या धर्म-शास्त्रों में परिवर्तन करना चाहते हैं तो जनता को जो-जो शंकायें हों उन शंकाओं का निवारण भी तो करना होगा।