पढ़ें अश्वत्थ स्तोत्र संस्कृत में – ashwattha stotram

पढ़ें अश्वत्थ स्तोत्र संस्कृत में - ashwattha stotram

गीता में भगवान कृष्ण ने अश्वत्थ वृक्ष के महत्व को बताते हुये कहा है कि वृक्षों में अश्वत्थ वृक्ष हूँ। सोमवती अमावास्या, शनिवार, विष्णु प्रतिमा विवाह आदि विशेष अवसरों पर अश्वत्थ वृक्ष की भी पूजा अर्चना का विशेष विधान है। पीपल को ही अश्वत्थ भी कहा जाता है। जब हम अश्वत्थ वृक्ष की पूजा करते हैं तो हमारे मन में स्तुति करने का भी विचार उत्पन्न होता है किन्तु सरलता से उपलब्ध नहीं होते। यहां अश्वत्थ वृक्ष की पूजा में आवश्यक अश्वत्थ स्तोत्र (ashwattha stotram) संस्कृत में दिया गया है।

कर्मकांड विधि में शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रामाणिक चर्चा की जाती है एवं कई महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा पूर्व भी की जा चुकी है। तथापि सनातनद्रोही उचित तथ्य को जनसामान्य तक पहुंचने में अवरोध उत्पन्न करते हैं। एक बड़ा वैश्विक समूह है जो सनातन विरोध की बातों को प्रचारित करता है। गूगल भी उसी समूह का सहयोग करते पाया जा रहा है अतः जनसामान्य तक उचित बातों को जनसामान्य ही पहुंचा सकता है इसके लिये आपको भी अधिकतम लोगों से साझा करने की आवश्यकता है।

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