Headlines
अनंत पूजा विधि

अनंत पूजा कब है 2024 – अनंत पूजा विधि

संकल्प के उपरांत कलश में जल-गंध-पवित्री-पूगीफल-पल्लवादि देकर पूजन करे। कलश के ऊपर एक स्वर्ण-रजत अथवा ताम्र पात्र में चंदनादि से अष्टदल निर्माण करके रखे। उसपर कुशाओं से सात फनों वाला सर्पाकृति बनाकर रखे। उनके आगे चौदह ग्रंथि वाला अनंत रखे। फिर नवग्रह-दशदिक्पाल आदि का पंचोपचार पूजन करके अनंत भगवान की पूजा करे।

Read More
महालक्ष्मी व्रत पूजा विधि – Mahalaxmi Vrat Puja

महालक्ष्मी व्रत पूजा विधि – Mahalaxmi Vrat Puja

संकल्प करने के बाद 16 बार जल से हाथ-मुंह और पैर का प्रक्षालन करे (धोये) तत्पश्चात 16 तंतु युक्त सुंदर धागे में 16 गांठ लगाये और चंदन-पुष्पादि से अलंकृत कर दे, सोलह दूर्वा भी पूजा में रखे।

Read More
सिद्धिविनायक व्रत कथा – Siddhivinayak Vrat Katha

सिद्धिविनायक व्रत कथा – Siddhivinayak Vrat Katha

सिद्धिविनायक व्रत कथा में भरद्वाज मुनि सूत से पूछते हैं कि विघ्नों का निवारण कैसे होगा। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिया गया उत्तर में सिद्धिविनायक की पूजा व्रत करने को कहा गया, जिससे नष्टराज्य की पुनर्प्राप्ति हो सकती है। सिद्धिविनायक की पूजा से सभी कार्यों की सफलता होती है और चाहे विद्या हो या धन, विजय या सौभाग्य, सब इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

Read More
सिद्धिविनायक पूजा विधि और मंत्र – siddhivinayak puja

सिद्धिविनायक पूजा विधि और मंत्र – siddhivinayak puja

भाद्र शुक्ल चतुर्थी को सिद्धिविनायक की पूजा की जाती है। पूजा के लिये मध्याह्नकाल को प्रशस्त बताया गया है। यह तिथि वर्ष में एक बार ही उपलब्ध होती है किन्तु यदि भक्तिभाव हो तो अन्य दिनों में भी सिद्धिविनायक की पूजा की जा सकती है।

Read More
चौरचन पूजा विधि मंत्र

चौरचन पूजा विधि मंत्र

पूजा से पहले नित्यकर्म किया जाता है। चौरचन पूजा यद्यपि पुरुष भी कर सकते हैं तथापि अधिकांशतः स्त्रियां ही करती है। स्त्रियों के लिये नित्यकर्म का तात्पर्य पंचदेवता व गौरी पूजा है। पूजा सूर्यास्त के बाद होती है इसलिये गणपत्यादि पंचदेवता और गौरी की पूजा करे। विधवा स्त्री गणपत्यादि पंचदेवता व विष्णु पूजा करे। तत्पश्चात संकल्प करके चतुर्थी चंद्र पूजा करे।

Read More

हरितालिका तीज पूजा विधि और कथा

पूजा का काल प्रदोषकाल ही होता है अतः प्रदोषकाल में ही पूजा करे। पवित्रीकरणादि करके सर्वप्रथम संकल्प करे। यदि चौदह वर्षों तक ही करना हो तो प्रथम वर्ष चौदह वर्ष करने का संकल्प करे, अन्य वर्षों में संकल्प करे। यदि 14 वर्ष से अधिक भी करना हो तो 14 वर्षों वाला संकल्प प्रथम वर्ष न करे।

Read More
मंगल शांति के उपाय | मंगल शांति पूजा

मंगल शांति के उपाय | मंगल शांति पूजा 5th

मंगल शांति के उपाय : मंगल शांति का तात्पर्य है मंगल के अशुभ फलों के निवारण की शास्त्रोक्त विधि। यदि मंगल निर्बल हो तो सबल करने के लिये मूंगा आदि धारण करना लाभकारी होता है। किन्तु यदि मंगल के कोई अशुभ प्रभाव हों तो उसका निवारण रत्न धारण करना नहीं होता, अशुभ प्रभाव का निवारण करने के लिये शांति ही करनी चाहिये।

Read More
चंद्र ग्रह शांति विधि

चंद्र ग्रह शांति विधि | कमजोर चंद्रमा के लक्षण और उपाय 4th

चंद्र ग्रह शांति विधि : हम सभी जानते हैं कि चन्द्रमा मन का कारक है और चन्द्रमा यदि अशुभ हो तो क्या-क्या दुष्परिणाम होते हैं ? मुख्य रूप से चन्द्रमा मन को ही प्रभावित करता है एवं कमजोर चंद्रमा के लक्षण और उपाय समझने के लिये पूर्व में ही आलेख प्रकाशित किया

Read More
नवग्रह शांति विधि

नवग्रह शांति पूजा विधि – navgrah shanti puja 2nd

नवग्रह शांति पूजा विधि – कोई भी ग्रह न तो सदा शुभ फल प्रदान करते हैं न ही सदा अशुभ फल प्रदान करते हैं अर्थात सभी ग्रहों के शुभाशुभ मिश्रित फल होते ही हैं। नवग्रह शांति का तात्पर्य किसी एक अशुभ ग्रह की शांति नहीं है, अपितु सभी ग्रहों की शांति है।

Read More
हेमाद्रि संकल्प प्रयोग – विस्तृत संकल्प

हेमाद्रि संकल्प प्रयोग – विस्तृत संकल्प (Sankalp 2)

हेमाद्रि संकल्प बृहद् होने के कारण सामान्यतः प्रयोग नहीं किया जाता है किन्तु, प्रयास करना चाहिये। इसमें भारत का विशद विवरण किया गया है और जो लोग भारत को किसी मुगल या आक्रमणकारी से जोड़कर सिद्ध करने का प्रयास करते हैं उनको इसका विशेष रूप से अध्ययन करना चाहये।

Read More