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अघोर मूर्ति सहस्रनाम - aghora murti sahasranaam

अघोर मूर्ति सहस्रनाम – aghora murti sahasranaam

अघोर मूर्ति सहस्रनाम – aghora murti sahasranaam : श्रीरुद्रयामलतंत्र में अघोर मूर्ति सहस्रनाम स्तोत्र मिलता है जो अतिमहत्वपूर्ण है। यहां अघोर मूर्ति सहस्रनाम स्तोत्र (aghora murti sahasranaam) संस्कृत में दिया गया है।

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अघोर कवच स्तोत्र - aghor kavach

अघोर कवच स्तोत्र – aghor kavach

अघोर कवच स्तोत्र – aghor kavach : शिव कल्याणकारी हैं, अघोर हैं, अभयंकर हैं। शिव के अघोर स्वरूप में उनका नाम ही अघोर है। अघोर के उपासक ही अघोरी कहलाते हैं। शिव के अघोर रूप की उपासना में अघोर कवच की भी आवश्यकता होती है। यहां अघोर कवच (aghor kavach) संस्कृत में दिया गया है।

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पढ़िये अघोर स्तव संस्कृत में ~ aghor stotra

पढ़िये अघोर स्तव संस्कृत में ~ aghor stotra

पढ़िये अघोर स्तव संस्कृत में ~ aghor stotra : अघोर का तात्पर्य है जो घोर न हो अर्थात भयंकर न हो। भगवान शिव का ही एक नाम अघोर भी है और इनके अघोर रूप की उपासना के लिये मंत्र, स्तोत्र आदि भी मिलते हैं। यहां अघोर स्तव संस्कृत में दिया गया है।

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यहां पढ़ें अर्द्धनारीश्वर सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में - ardhnarishwar sahasranam

यहां पढ़ें अर्द्धनारीश्वर सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में – ardhnarishwar sahasranam

यहां पढ़ें अर्द्धनारीश्वर सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में – ardhnarishwar sahasranam : वर्त्तमान काल में भिन्नमना, स्वतंत्रता आदि का कुतर्क करते हुये सामान्य लोगों के दामपत्य जीवन को नारकीय बनाया जा रहा है। परिवार में सुख-शांति हेतु यह आवश्यक है कि पति-पत्नी के विचार समान हों। दामपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना हो तो अर्द्धनारीश्वर की उपासना करते हुये एकमना होना चाहिये।

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स्कन्द पुराणोक्त अर्द्धनारीश्वर अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र ~ ardhnarishwar ashtottarshatnam stotra

स्कन्द पुराणोक्त अर्द्धनारीश्वर अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र ~ ardhnarishwar ashtottarshatnam stotra

स्कन्द पुराणोक्त अर्द्धनारीश्वर अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र ~ ardhnarishwar ashtottarshatnam stotra : एक दिव्यवस्त्र धारण करती हैं तो दूसरे दिगम्बर हैं, एक सिंहवाहिनी हैं तो दूसरे वृषारूढ़ हैं फिर भी दोनों एकाकार हो गये। दाम्पत्य जीवन को सुख-शांतिमय करने का सन्देश देता है भगवान शिव-पार्वती का एकाकार स्वरूप जिसे अर्द्धनारीश्वर नाम से जाना जाता है।

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उपमन्युकृत अर्द्धनारीश्वर अष्टक स्तोत्र - ardhnarishwar ashtak

उपमन्युकृत अर्द्धनारीश्वर अष्टक स्तोत्र – ardhnarishwar ashtak

उपमन्युकृत अर्द्धनारीश्वर अष्टक स्तोत्र – ardhnarishwar ashtak : शास्त्रों में भी शिव और शक्ति को भिन्न नहीं माना गया है। शिव और शक्ति एक-दूसरे से उसी प्रकार अभिन्न हैं, जिस प्रकार सूर्य और उसका प्रकाश, अग्नि और उसका ताप तथा दूध और उसकी धवलता, चन्द्रमा और उसकी शीतलता ।

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पढ़िये शिवपार्वती का प्रिय अर्द्धनारीश्वर स्तोत्र - ardhnarishwar stotra

पढ़िये शिवपार्वती का प्रिय अर्द्धनारीश्वर स्तोत्र – ardhnarishwar stotra

पढ़िये शिवपार्वती का प्रिय अर्द्धनारीश्वर स्तोत्र – ardhnarishwar stotra : भगवान शिव और पार्वती का एकत्व होने पर जो स्वरूप बनता है उसे अर्द्धनारीश्वर कहते हैं। भगवान शिव को माता पार्वती इतनी प्रिय हैं कि उन्हें भिन्न समझना ही नहीं चाहिये क्योंकि इसी कारण से भगवान शिव ने पार्वती को पृथक रहने ही नहीं दिया एक हो गये।

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लिङ्गोत्पत्तिस्तवः - ब्रह्मा और विष्णु द्वारा किया गया लिंग स्तोत्र | ling stotra

लिङ्गोत्पत्तिस्तवः – ब्रह्मा और विष्णु द्वारा किया गया लिंग स्तोत्र | ling stotra

लिङ्गोत्पत्तिस्तवः – ब्रह्मा और विष्णु द्वारा किया गया लिंग स्तोत्र | ling stotra : शिवरहस्य में ब्रह्मा और विष्णु द्वारा किया गया एक लिङ्गोत्पत्तिस्तव अर्थात लिंग स्तवन मिलता है जिसके महत्वपूर्ण होने का सबसे बड़ा कारण तो यही है कि यह ब्रह्मा और विष्णु द्वारा किया गया है। इस स्तोत्र का पाठ करने वाला पापरहित हो जाता है ऐसा स्तोत्र में ही कहा गया है।

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यहां पढें रुद्र विभूति स्तोत्र संस्कृत में - rudra vibhuti stotra

यहां पढें रुद्र विभूति स्तोत्र संस्कृत में – rudra vibhuti stotra

यहां पढें रुद्र विभूति स्तोत्र संस्कृत में – rudra vibhuti stotra : भगवान शिव का एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है जिसे रुद्र विभूति स्तोत्र कहा जाता है। यहां रुद्र विभूति स्तोत्र (rudra vibhuti stotra) संस्कृत में दिया गया है।

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