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kali puja 2024 – काली पूजा कब है ? श्यामा पूजा या काली पूजा से सम्बंधित विशेष बातें

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कार्तिक कृष्ण अमावास्या (निशीथव्यापिनी) को निशिथ काल में काली, तारा आदि की पूजा की जाती है। विशेष रूप से काली की पूजा ही की जाती है जिसे श्यामा पूजा भी कहा जाता है। श्यामा पूजा भी लगभग नवरात्र में की जाने वाली दुर्गा पूजा के समान विधि से ही की जाती है। अंतर मात्र नवरात्र के उन अन्य विधियों और पूजा का होता है जो सप्तमी, अष्टमी आदि तिथि को किया जाता है और वो काली पूजा में नहीं होता है जैसे बिल्वाभिमन्त्रण, पत्रिका प्रवेश आदि। इस आलेख में काली पूजा कब है इसकी जानकारी के साथ ही अनेकों महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर दिये गये हैं।

kali puja 2024 – काली पूजा कब है ? श्यामा पूजा या काली पूजा से सम्बंधित विशेष बातें

प्रश्न : श्यामा पूजा कब होती है ?
उत्तर : श्यामा पूजा कार्तिक अमावस्या को होती है। कार्तिक कृष्ण अमावस्या को प्रदोषकाल में जहां लक्ष्मी पूजा होती है वहीं निशीथ यानि मध्य रात्रि में काली पूजा या श्यामा पूजा भी की जाती है। काली पूजा भी दुर्गा पूजा के तरह ही बड़े-बड़े पंडाल बनाकर किये जाते हैं। बंगाल में काली पूजा विशेष रूप से होती है और बिहार में भी बहुत धूम-धाम से किया जाता है।

प्रश्न : श्यामा किस देवी का नाम है ?
उत्तर : श्यामा काली माता का नाम है।

मां काली, श्यामा पूजा,
मां काली

प्रश्न : श्यामा पूजा करने का शास्त्रवर्णित समय क्या है ?
उत्तर : श्यामा पूजा का शास्त्र वर्णित समय निशीथकाल (मध्यरात्रि) है।

काली पूजा कब है – kali puja 2024

प्रश्न : काली पूजा 2024 में कब है ?
उत्तर : काली पूजा भी दीपावली के दिन ही होती है अतः 2024 में 31 अक्टूबर गुरुवार को काली पूजा है।

काली पूजा 2024 की पूजा कब करें ?
अमावस्या का आरम्भ15:52 बजे, 31 अक्टूबर 2024 – गुरुवार
निशीथ काल (काली पूजा हेतु शास्त्रोक्त समय)23:03 से 23:55 तक
ये निशीथ काल बेगुसराय (मिथिला) आधारित है। अन्य शहरों में अंतर होगा।

प्रश्न : काली पूजा 2025 में कब है ?
उत्तर : काली पूजा भी दीपावली के दिन ही होती है अतः 2025 में 20 अक्टूबर सोमवार को काली पूजा है।

काली पूजा 2025 की पूजा कब करें ?
अमावस्या का आरम्भ15:44 बजे, 20 अक्टूबर 2025 – सोमवार
निशीथ काल (काली पूजा हेतु शास्त्रोक्त समय)23:05 से 23:55 तक
ये निशीथ काल बेगुसराय (मिथिला) आधारित है। अन्य शहरों में अंतर होगा।

प्रश्न : क्या श्यामा पूजा में काली प्रतिमा बनाना अनिवार्य है ?
उत्तर : श्यामा/काली मंत्र दीक्षित घर में बिना प्रतिमा बनाये भी पूजा कर सकता है, लेकिन मंदिरों में प्रतिमा अनिवार्य है। घर की पूजा में चित्र का प्रयोग भी किया जा सकता है।

प्रश्न : श्यामा पूजा के आरम्भ में किसकी आज्ञा लेना अनिवार्य है ?
उत्तर : श्यामा पूजा में भैरव की आज्ञा लेना अनिवार्य है।

प्रश्न : भैरव से किस प्रकार आज्ञा ली जाती है ?
उत्तर : भैरव से आज्ञा ग्रहण करने के लिए भैरव की पूजा करके यह मंत्र पढ़ना चाहिए : ॐ तीक्ष्णदंष्ट्र महाकाय कल्पान्तदहनोपम। भैरवाय नमस्तुभ्यमनुज्ञां दातुमर्हसि।

प्रश्न : भैरव आज्ञा लेने से पहले क्या-क्या करना चाहिये ?
उत्तर : भैरव आज्ञा लेने से पहले नित्यकर्म करके, पूजा की सम्पूर्ण व्यवस्था कर लेनी चाहिए।

प्रश्न : भैरव आज्ञा लेने से पहले क्या-क्या करना चाहिये ?
उत्तर : भैरव आज्ञा लेने से पहले नित्यकर्म करके, पूजा की सम्पूर्ण व्यवस्था कर लेनी चाहिए।

प्रश्न : भैरव आज्ञा लेने से पहले क्या-क्या करना चाहिये ?
उत्तर : भैरव आज्ञा लेने से पहले नित्यकर्म करके, पूजा की सम्पूर्ण व्यवस्था कर लेनी चाहिए।

प्रश्न : लक्ष्मीपूजा प्रदोषकाल में होती है तो कालीपूजा क्यों नहीं कर सकते ?
उत्तर : सभी देवताओं/व्रतों के लिए शास्त्रों में विशेष काल का वर्णन मिलता है। लक्ष्मी पूजा के लिये शास्त्रों में प्रदोषकाल और श्यामा पूजा (कालीपूजा) के लिये निशीथकाल का ही प्रमाण है।

प्रश्न : भैरव आज्ञा लेने के पश्चात् क्या करें ?
उत्तर : भैरव आज्ञा लेने के बाद स्वस्तिवाचन, अर्घ्यस्थापन, सामग्री सजाकर संकल्प करना चाहिये।

प्रश्न : संकल्प करने के बाद क्या करना चाहिए।
उत्तर : संकल्प के बाद घटस्थापन अर्थात कलशस्थापन करनी चाहिये ?

अथ देव्याः कवचम्
काली पूजा कब है

प्रश्न : रात्रि काल में कलशस्थापन करने के लिए शास्त्रों में निषेध है, तो कलशस्थापन कैसे किया जायेगा ?
उत्तर : रात्रि में कलश स्थापन न करे यह सामान्य नियम है। किन्तु सभी सामान्य नियम के कुछ अपवाद होते हैं। जैसे सावन में, सोमवार को, शान्ति कर्मादि में शिववास की आवश्यकता नहीं होती है; नवरात्रा में, वास्तु कर्म में, उपनयन-विवाहादि में हवन के लिए अग्निवास की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि वहां सामान्य नियम समाप्त हो जाता है। काली पूजा, जन्माष्टमी, गृहप्रवेश आदि कर्मों के निमित्त रात्रि में कलश स्थापन निषेध का सामान्य नियम समाप्त हो जाता है।

प्रश्न : कलश स्थापन किस स्थान पर करें ?
उत्तर : कलश स्थापन स्थान के सम्बन्ध में तीन बातों को ध्यान में रखनी चाहिये : हवन वेदी या कुण्ड के ईशान कोण में, यजमान स्वयं के वाम भाग में और देवी के दाहिने भाग अथवा सम्मुख करे।

प्रश्न : कलश के ऊपर दीप रखना आवश्यक है क्या ?

उत्तर : हाँ; कलश के ऊपर दीप रखना आवश्यक है। यदि गिरने का भय हो तो विकल्प है कि किसी पात्र में धान या चावल भरकर कलश के पूर्व भाग में रखे और उसी पर कलश के ऊपर रखा जाने वाला दीप रखे।

प्रश्न : कलश स्थापन-पूजन की अगली क्रिया क्या है ?

उत्तर : कलशस्थापन-पूजन के बाद नवग्रह-दशदिक्पाल-योगिनी पूजा करनी चाहिये। यदि सर्वतोभद्रादि मण्डल बनाया गया हो तो मंडलदेवताओं की पूजा भी करनी चाहिये। तत्पश्चात भगवती काली की पूजा करनी चाहिये।

सुविधा हेतु नीचे क्रमशः पूजा विधि दी जा रही है :

कर्मकांड विधि में शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रामाणिक चर्चा की जाती है एवं कई महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा पूर्व भी की जा चुकी है। तथापि सनातनद्रोही उचित तथ्य को जनसामान्य तक पहुंचने में अवरोध उत्पन्न करते हैं। एक बड़ा वैश्विक समूह है जो सनातन विरोध की बातों को प्रचारित करता है। गूगल भी उसी समूह का सहयोग करते पाया जा रहा है अतः जनसामान्य तक उचित बातों को जनसामान्य ही पहुंचा सकता है इसके लिये आपको भी अधिकतम लोगों से साझा करने की आवश्यकता है।

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