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ये कौन लोग मंदिरों में जमे हुये हैं जब-जैसे जो करे पूजा करा देते हैं

किन्तु पुनः प्रश्न है कि ज्ञाननगरी काशी में भगवान विश्वनाथ मंदिर में भी ऐसे ब्राह्मण किस प्रकार जमे हुये हैं जो बिना धोती-धारण किये पूजा करा रहे थे ? अमित शाह ने एक हाथ से प्रणाम किया, तो ब्राह्मणों ने बताया क्यों नहीं कि दोनों हाथ से प्रणाम करें ?

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विवाह क्या है, अर्थ, परिभाषा, प्रकार, उद्देश्य, बाल विवाह आदि की विस्तृत जानकारी – Vivah

विवाह क्या है, अर्थ, परिभाषा, प्रकार, उद्देश्य, बाल विवाह आदि की विस्तृत जानकारी – Vivah

विवाह गार्हस्थ जीवन का द्वार है और सृष्टि को अनवरत रखने में अपनी भूमिका निर्वहन करने के लिये अनिवार्य होता है। विवाह किये बिना किसी व्यक्ति के गृहस्थ आश्रम का प्रारम्भ नहीं होता।

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यद्यपि शुद्धं लोक विरुद्धम्। सही-सही कैसे समझें ?

यद्यपि शुद्धं लोक विरुद्धम्। सही-सही कैसे समझें ?

यद्यपि शुद्धं लोक विरुद्धम्। नाऽचरणीयं नाऽचरणीयं ॥ का अर्थ यद्यपि शुद्ध हो अर्थात सही हो किन्तु लोक विरुद्ध हो अर्थात हानिकारक हो या हानि संभावित हो तो वह वैसा आचरण मत करो वह कर्म मत करो।

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रामनवमी पूजा विधि और मंत्र संस्कृत में – Ram navami puja vidhi

रामनवमी पूजा विधि और मंत्र संस्कृत में – Ram navami puja vidhi

कुलकोटि समुद्धरण पूर्वक भूरिदक्षिणानेकयज्ञ जन्यफल समफल दुष्करानेकतपोजन्यफल समफल द्वारकाधिकरण कपिलगवी कोटि दानजन्यफल समफल धरादानजन्यफल समफल बहुजन्मार्जितैकाददश्युपवास जन्य फल समफल प्राप्तिपूर्वकाऽनन्तकालिक विष्णु लोकमहितत्व कामनया साङ्गसायुधसपरिवार श्रीरामचन्द्रपूजनमहं करिष्ये ॥

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होली कब है 2024 में 25 या 26 मार्च को, होली कैसे मनाया जाता है ?

इस आलेख में हम होली निर्णय को शास्त्रीय प्रमाणों के साथ समझते हुये होली 2024 में कब है इसे जानेंगे। साथ ही होली से सम्बंधित और भी महत्वपूर्ण तथ्यों को समझेंगे।

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स्वस्तिवाचन – चारों वेदों का – swastiwachan mantra

स्वस्तिवाचन – चारों वेदों का – swastiwachan mantra

स्वस्तिवाचन – चारों वेदों का – swastiwachan mantra : इस प्रकार यहां सम्पूर्ण स्वस्तिवाचन मंत्र (यजुर्वेदीय) के साथ-साथ ऋग्वेद स्वस्तिवाचन, सामवेद का स्वस्तिवाचन और अथर्ववेद का स्वस्तिवाचन भी संकलित किया गया जो बहुत सारे लोगों के लिये उपयोगी सिद्ध होगा।

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करम प्रधान विश्व करि राखा का मूल तात्पर्य क्या है ? – karm pradhan vishwa kari rakha

सत्तालोलुप समूह, षड्यंत्रकारी आदि अपने ही कुतर्कों के जाल में किस प्रकार फंसते हैं इसे इस प्रकार से समझा जा सकता है : आज के समय में वर्णव्यवस्था का महत्व नहीं है ।

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पवित्रीकरण-विधि

पवित्रीकरण अर्थात शुद्धिकरण की संपूर्ण विधि

सम्पूर्ण कर्मकांड में पवित्रीकरण अर्थात शुद्धिकरण की सर्वप्रथम आवश्यकता होती है। चाहे पूजा स्थल की बात हो, पूजा सामग्री की बात हो अथवा शारीरिक या मानसिक शुद्धि का विषय हो, प्रत्येक कर्म का आरम्भ पवित्रीकरण से ही होता है। इस आलेख में पवित्रीकरण की संपूर्ण विधि बताई गयी है जो अत्यंत उपयोगी विषय है।

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नान्दीमुख श्राद्ध विधि pdf सहित

नान्दी श्राद्ध – षोडश मातृका पूजन, सप्तघृत मातृका पूजन सहित

दाह संस्कार के अतिरिक्त सभी संस्कारों में नान्दीमुख श्राद्ध किया जाता है। इसके साथ ही यज्ञ, प्राण-प्रतिष्ठा आदि कर्मों में नान्दीश्राद्ध आवश्यक होता है। लेकिन जिस प्रकार पवित्रीकरण, संकल्प, सम्पूर्ण कर्मकाण्ड का अनिवार्य प्रारंभिक अंग होता है उस प्रकार से सभी कर्मों में अनिवार्य नहीं होता। जिस प्रकार कलश स्थापन सभी पूजा पाठ में आवश्यक होता है उस प्रकार से नान्दी श्राद्ध सभी शुभ कर्मों में अनिवार्य नहीं है। जैसे सत्यनारायण पूजा करनी हो तो नान्दी श्राद्ध आवश्यक नहीं है।

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दुर्गा मानस पूजा अर्थ सहित

दुर्गा मानस पूजा अर्थ सहित – durga manas puja

दुर्गा मानस पूजा अर्थ सहित – durga manas puja : मानस पूजा उत्तम प्रकार है। अपने इष्ट का मन में ध्यान करके उनके मानस पूजा स्तोत्र का पाठ करते हुये मन में ही पूजा के विभिन्न दिव्य उपचारों (आसन, पाद्य, अर्घ्य आदि) की कल्पना करके अर्पित की जाती है। मानस पूजा में किसी वस्तु की नहीं केवल भाव की आवश्यकता होती है।

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