भगवान श्रीराम की जैसी भी पूजा हो उसे रामार्चा ही कहा जायेगा किन्तु एक विशेष पूजा का नाम ही रामार्चा है। रामार्चा राजसी पूजा है जिसमें नाना प्रकार के राजोपचारों से भगवान राम की सपरिवार पूजा-अर्चना की जाती है। वैष्णव जन जीवन में एक बार भी रामार्चा करने की प्रबल इच्छा रखते हैं। इस आलेख में रामार्चा पूजा में लगने वाली सामग्रियों (Ramarcha Pujan Samagri) की सूची दी गयी है एवं आलेख के अंत में PDF फाइल भी दिया गया है जिसे डाउनलोड किया जा सकता है।
रामार्चा पूजा क्या है ?
रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन ।
नरौ न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥
जब हम रामार्चा पूजा कहते हैं तो थोड़ी से त्रुटि होती है, भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना करना रामार्चा है। इसलिए रामार्चा या रामार्चा नामक पूजा कहा जा सकता है किन्तु रामार्चा पूजा कहना असंगत है। रामार्चा कथा में वर्णित है कि सबसे पहले सृष्टि आरंभ करने के लिये ब्रह्मा जी ने रामार्चा किया था। रामार्चा आध्यात्मिक उन्नति प्रदायक तो है ही सांसारिक कामनाओं की भी सिद्धि करने वाला है।

रामार्चा की पूजा विधि अन्य सभी पूजाओं से थोड़ा हटकर है क्योंकि यह राजसी पूजा है। रामार्चा में बहुत सारी विशेष सामग्रियां लगती है, पूजा का मण्डप बनाया जाता है, नैवेद्य हेतु घी के लड्डू बनाये जाते हैं, छप्पन भोग की व्यवस्था की जाती है इत्यादि। यहां रामार्चा में लगने वाली सभी सामग्रियों की सूची प्रस्तुत की जा रही है और साथ ही उसके pdf file डाउनलोड करने का लिंक भी दिया गया है। रामार्चा वेदी भी दी गई है।
रामार्चा पूजन सामग्री – Ramarcha Pujan Samagri
- बडा कलश – १, छोटा कलश – १२
- चौमुख – १, दीप – ५५, ढकनी – १३
- नारियल (सजल) – १३, छिला नारियल – १
- पीली सरसों – ५० ग्राम
- तिल – ५०० ग्राम
- जौ – २५० ग्राम
- अरवा चावल – ११ किलो
- चंदन, पीला चंदन, श्रीखंड चंदन, कुंकुम, सिंदूर
- अबीर – कई रंगों के, हल्दी चूर्ण
- चावल का आटा – १ किलो
- रंग – लाल, पीला, हरा, काला + नील
- रक्षासूत्र
- धूप – १ किलो (अगरबत्ती प्रयोग अनुचित)
- धूना, गुग्गुल – १००-१०० ग्राम
- सप्मृत्तिका, सप्तधान्य, सर्वौषधि, पंचरत्न – ६-६
- गाय का घी – २ किलो
- शक्कर – ५०० ग्राम
- मधु – १०० ग्राम
- सुगंधि द्रव्य (इत्र), सुगंधित तेल, गुलाब जल
- कपूर – ५० ग्राम
- पीला, लाल कपड़ा (सालू) – २-२ मीटर
- नवग्रह लकड़ी
- गरीगोला – २
- सपरिवार भगवान श्रीराम का वस्त्र – ५ सेट
- हनुमान जी के लिए – लंगोट, अन्य देवताओं हेतु – गमछा या रुमाल – ५ दर्जन
- यज्ञोपवीत, डांरकडोर – २५-२५
- भगवान की स्वर्ण प्रतिमा या शालिग्राम
- सिंहासन
- मधुपर्क पात्र – कांसा थाली + कटोरी
- पूर्णपात्र (हवन) – पीतल का टोकना
- स्रुवा, स्रुचि, प्रोक्षणी, प्रणीता, स्फय
- पान – ७५, लगाया पान
- सुपारि – ७५, लौंग, इलायची – २५-२५ ग्राम
- जायफल – ३
- पताका – ४
- पंचपात्र – ५
- फल, मिठाई – ५ प्रकार
- मेवा – काजू, किशमिश, मखाना, छुहारा, अखरोट
- बतासा, लड्डू
- मूंज की डोरी – मंडप के अनुसार
- चांदनी – मंडप के अनुसार
- केशर, सांवा, कंकोल, कूट, मजीठ, हल्दी, मोथा, शिलाजीत, बच, खस
- आभूषण
- शृंगार सामग्री – ५
- ब्रह्मा वरण सामग्री – धोती १ जोड़ा, गमछा
- आचार्य वरण सामग्री – धोती (जोड़ा), गमछा, गंजी, कुर्ता, पाग, चादर, आसनी, पंचपात्र-अर्घा, तुलसी माला, गोमुखी, यथा संभव भोजनपात्र, (आचार्य के सहयोगी ब्राह्मण हों तो उनके लिये भी)
अन्य सामग्री :
- पुष्प – नाना प्रकार, माला – ५५, तुलसी मंजरी माला, बेलपत्र, दूभी, शमीपत्र, (अतिरिक्त आवश्यक पुष्प – विष्णुक्रांता, कमल, चम्पा)
- गंगाजल, सरयू जल, दूध, दही, गोमय, गोमूत्र
- ५६ भोग
- चौकी – १ (२ या ३ हाथ चौकोर)
- पताका वास्ते बांस की लकड़ी (करची या फरट्टी)
- घंटी, घड़ीघंट, शंख
- थाली, कटोरी, लोटकी, थार
- कम्बल या आसनी
- पंचपल्लव – आम, बड़, पाकर, पीपल, गुल्लड़
- केला का वृक्ष – ४ या ८ (फल सहित उत्तम)

शुभ मुहूर्त :- पंचमी, नवमी, द्वादशी, पूर्णिमा, अमावास्या, संक्रांति, अयन अथवा किसी भी दिन
मंडप निर्माण – शुभ दिन में नान्दीमुख श्राद्ध करके शास्त्रीय विधि से मंडप निर्माण करें। मंडप में ४ द्वार होने चाहिये। मंडप उत्तम से उत्तम बनाना चाहिये।
कर्मकांड विधि में शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रामाणिक चर्चा की जाती है एवं कई महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा पूर्व भी की जा चुकी है। तथापि सनातनद्रोही उचित तथ्य को जनसामान्य तक पहुंचने में अवरोध उत्पन्न करते हैं। एक बड़ा वैश्विक समूह है जो सनातन विरोध की बातों को प्रचारित करता है। गूगल भी उसी समूह का सहयोग करते पाया जा रहा है अतः जनसामान्य तक उचित बातों को जनसामान्य ही पहुंचा सकता है इसके लिये आपको भी अधिकतम लोगों से साझा करने की आवश्यकता है।