यथानामगोत्रायब्राह्मणाय का रहस्य : पुरोहित अपने नाम और गोत्र का उच्चारण करके दान-दक्षिणा क्यों नहीं लेते ?

यथानामगोत्रायब्राह्मणाय का रहस्य : पुरोहित अपने नाम और गोत्र का उच्चारण करके दान-दक्षिणा क्यों नहीं लेते ?

“मिथिला के पुरोहित अपने नाम-गोत्र का उच्चारण क्यों नहीं करते? जानें ‘यथानामगोत्राय ब्राह्मणाय’ के प्रयोग के पीछे का शास्त्रीय रहस्य। प्रतिग्रह दोष, ब्राह्मण की पात्रता और दर्भबटु (कुश ब्राह्मण) के विकल्प पर एक प्रमाणिक शोधपूर्ण आलेख।”

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