पढ़ें अग्नि सहस्रनाम स्तोत्र स्तोत्र संस्कृत में - agni ashtak stotra

पढ़ें अग्नि सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में – agni sahasranama stotram

पढ़ें अग्नि सहस्रनाम स्तोत्र संस्कृत में – agni sahasranama stotram : मैथिलों की एक विशेषता है कि वो पंचदेवता के नहीं षड्देवता के उपासक होते हैं किन्तु बहुत लोगों को यह भ्रम रहता है कि मिथिला भी पंचदेवोपासक है।

Read More
पढ़ें अग्नि अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में - agni ashtottara shatanamavali

पढ़ें अग्नि अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में – agni ashtottara shatanamavali

पढ़ें अग्नि अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र संस्कृत में – agni ashtottara shatanamavali : षड्देवता में अग्नि भी आते हैं और अग्नि की उपासना अन्य देवोपासकों को भी करनी ही होती है। किसी भी देवता के उपासक हो हवन में अग्नि की उपासना करनी ही होती है। वैसे अग्नि उपासकों का एक विशेष वर्ग भी होते हैं जो अग्निहोत्री कहलाते हैं और साग्निक नाम से जाने जाते हैं एवं शास्त्रों में अग्निहोत्रियों का विशेष महत्व बताया गया है। सामान्य लोगों की तुलना में अग्निहोत्रियों के लिये भिन्न विधान भी होता है।

Read More
पढ़ें अग्नि अष्टक अर्थात वह्न्यष्टक स्तोत्र संस्कृत में - agni ashtak stotra

पढ़ें अग्नि अष्टक अर्थात वह्न्यष्टक स्तोत्र संस्कृत में – agni ashtak stotra

पढ़ें अग्नि अष्टक अर्थात वह्न्यष्टक स्तोत्र संस्कृत में – agni ashtak stotra : हम क्रमशः अग्नि स्तोत्रों का अवलोकन कर रहे हैं जो कि बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं और अब हमें अग्नि के अष्टक स्तोत्र का भी अवलोकन करना चाहिये। सभी देवताओं के अष्टक स्तोत्र होते हैं और अग्नि के भी अष्टक स्तोत्र हैं जो सीताकृत है और कूर्मपुराण में वर्णित है।

Read More
पढ़ें अग्नि स्तोत्र संस्कृत में - agni stotra

पढ़ें अग्नि स्तोत्र संस्कृत में – agni stotra

पढ़ें अग्नि स्तोत्र संस्कृत में – agni stotra : जल ही जीवन कहा जाता है किन्तु अग्नि भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं यह सरलता से समझ में नहीं आता है। ऐसा लगता है जैसे यज्ञादि करने में अथवा भोजन निर्माण आदि में ही अग्नि की आवश्यकता होती है। किन्तु सच यह है कि हम जो भोजन करते हैं उसका पाचन भी भी अग्नि ही करते हैं जिन्हें जठराग्नि नाम से जाना जाता है। कुपित अथवा क्षुधित अग्नि प्रलयंकर भी हो सकते हैं और इसलिये यह आवश्यक है कि अग्नि को प्रसन्न रखा जाय और क्षुधित न होने दिया जाय।

Read More
पढ़ें अग्नि स्तुति संस्कृत में - agni stuti

पढ़ें अग्नि स्तुति संस्कृत में – agni stuti

पढ़ें अग्नि स्तुति संस्कृत में – agni stuti : यज्ञ-हवन व अनेक अवसरों पर आपको जब अग्नि स्तुति की आवश्यकता होती है तो सामान्य रूप से ढूंढने पर नहीं मिलती, किन्तु अनेकानेक ऐसे अवसर होते हैं जब यदि उपलब्ध होती तो अग्नि की स्तुति करते। अब आपके लिये अग्नि स्तुति उपलब्ध है और जब आवश्यकता हो कर सकते हैं।

Read More
पढ़ें बृहस्पतिकृत अग्नि स्तवन संस्कृत में - agni stotram

पढ़ें बृहस्पतिकृत अग्नि स्तवन संस्कृत में – agni stotram

पढ़ें बृहस्पतिकृत अग्नि स्तवन संस्कृत में – agni stotram : अग्नि देव को हव्यवाहन कहा जाता है अर्थात यज्ञ में जो हवि प्रदान की जाती है वह अग्नि में ही दी जाती है एवं देवताओं तक अग्निदेव ही पहुंचाते हैं।

Read More