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संपूर्ण कर्मकांड विधि

संपूर्ण कर्मकांड विधि

कृष्ण अष्टोत्तर शतनाम - krishna ashtottara satanam

कृष्ण अष्टोत्तर शतनाम – krishna ashtottara satanam

कृष्ण अष्टोत्तर शतनाम – krishna ashtottara satanam : नारद पञ्चरात्र में भगवान श्री कृष्ण का अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र मिलता है श्री शेष कृत है। इस अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र का बहुत ही विशेष फल बताया गया है। अन्य सभी प्रकार के पुण्यप्रद कर्मों से कड़ोरों गुणित फल इसका कहा गया है। इसकी एक बड़ी विशेषता जो बताई गयी है वो है बालक और गोवंश के लिये पुष्टिकारक होना।

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श्री कृष्ण त्रैलोक्य विजय कवच | श्री कृष्ण कवच - krishna kavach

श्री कृष्ण त्रैलोक्य विजय कवच | श्री कृष्ण कवच – krishna kavach

श्री कृष्ण त्रैलोक्य विजय कवच | श्री कृष्ण कवच – krishna kavach : भगवान श्री कृष्ण के भी कई कवच स्तोत्र हैं जो पुराणों में मिलते हैं और इनमें से एक विशेष महत्वपूर्ण कवच है महादेव द्वारा परशुराम जी को दिया गया श्री कृष्ण कवच (krishna kavach) जो ब्रह्मवैवर्त्त पुराण में वर्णित है। इस कवच स्तोत्र का एक नाम श्री कृष्ण त्रैलोक्य विजय कवच भी है।

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यहां पढ़ें श्री कृष्ण स्तोत्र - shri krishna stotra

यहां पढ़ें श्री कृष्ण स्तोत्र – shri krishna stotra

यहां पढ़ें श्री कृष्ण स्तोत्र – shri krishna stotra : विष्णुधर्मोक्त अर्जुन कृत कृष्ण स्तोत्र, कूर्म पुराणोक्त अदिति कृत कृष्ण स्तोत्र, ब्रह्मवैवर्त पुराणोक्त धर्म कृत कृष्ण स्तोत्र, ब्रह्म पुराणोक्त अक्रूर कृत कृष्ण स्तोत्र, विष्णु पुराणोक्त कालिय कृत कृष्ण स्तोत्र, हरिवंश पुराणोक्त नारद कृत कृष्ण स्तोत्र, भविष्य पुराणोक्त मदालस कृत कृष्ण स्तोत्र।

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यहां पढ़ें अनेकों कृष्ण स्तुति - krishna stuti

यहां पढ़ें अनेकों कृष्ण स्तुति – krishna stuti

यहां पढ़ें अनेकों कृष्ण स्तुति – krishna stuti : यहां भागवत पुराणोक्त ब्रह्मा कृत श्रीकृष्ण स्तुति, पद्म पुराणोक्त अक्रूर कृत श्रीकृष्ण स्तुति, पद्म पुराणोक्त इन्द्र कृत श्रीकृष्ण स्तुति, गर्गसंहितोक्त दुर्वासा कृत श्रीकृष्ण स्तुति, गर्गसंहितोक्त देव कृत श्रीकृष्ण स्तुति दी गयी है।

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श्रीकृष्णमङ्गलं : कृष्ण मंगलाचरण श्लोक - krishna mangalam

श्रीकृष्णमङ्गलं : कृष्ण मंगलाचरण श्लोक – krishna mangalam

श्रीकृष्णमङ्गलं : कृष्ण मंगलाचरण श्लोक – krishna mangalam : भगवान के अनेकानेक स्तोत्रों में से एक प्रकार मंगल स्तोत्र भी होता है जिसमें भगवान के अनेकानेक नामों द्वारा उनसे मंगल प्रार्थना की जाती है, मंगल की कामना की जाती है। भगवान श्रीकृष्ण के अनेकों मंगल स्तोत्र हैं जो श्रीकृष्ण मङ्गलं (krishna mangalam), कृष्ण मंगलाचरण श्लोक, श्रीकृष्ण मङ्गल स्तोत्र आदि नामों से जाने जाते हैं।

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देवकीकृत श्री कृष्ण स्तोत्र - Devakikrita Shri krishna stotra

देवकीकृत श्री कृष्ण स्तोत्र – Devakikrita Shri krishna stotra

देवकीकृत श्री कृष्ण स्तोत्र – Devakikrita Shri krishna stotra : श्रीमद्भागवतमहापुराण में भगवान श्री कृष्ण का चरित विशेष रूप से वर्णित है और श्रीकृष्ण चरित्र दशम स्कंध में वर्णित है। कृष्णावतार में भगवान श्रीकृष्ण की एक स्तुति स्वयं देवकी ने किया है जो दशम स्कंध के तृतीय अध्याय में मिलता है। देवकी कृत श्री कृष्ण स्तुति में कुल ७ श्लोक हैं।

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श्री कृष्ण चतुर्विंशति स्तोत्रं - Shri Krishna chaturvimshati Stotram

श्री कृष्ण चतुर्विंशति स्तोत्रं – Shri Krishna chaturvimshati Stotram

श्री कृष्ण चतुर्विंशति स्तोत्रं – Shri Krishna chaturvimshati Stotram : भगवान श्री कृष्ण के अनेकानेक स्तोत्रों में एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है श्री कृष्ण चतुर्विंशति स्तोत्रं (Shri Krishnachaturvimshati Stotram) जिसमें 24 श्लोक है और इसी कारण इसका नाम श्री कृष्ण चतुर्विंशति स्तोत्र है। दो श्लोक फलश्रुति के हैं और इन दोनों श्लोकों को मिलाकर कुल 26 श्लोक हो जाते हैं।

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सुभद्राकृत अनन्तस्तव (अनंत स्तोत्र) - Anantastava

सुभद्राकृत अनन्तस्तव (अनंत स्तोत्र) – Anantastava

सुभद्राकृत अनन्तस्तव (अनंत स्तोत्र) – Anantastava : अनन्त भगवान विष्णु का ही नाम है, जब अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण से पूछा था कि अनंत कौन हैं तो भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था मैं ही अनंत हूँ। भगवान अनंत की पूजा अनंत चतुर्दशी को की जाती है और अनंत धारण भी किया जाता है। अनंत भगवान की पूजा में स्तोत्रादि की जब आवश्यकता होती है तो सरलता से मिलना कठिन होता है।

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श्रीशङ्कराचार्यविरचित अच्युताष्टकम् - achyutashtakam

श्रीशङ्कराचार्यविरचित अच्युताष्टकम् – achyutashtakam

श्रीशङ्कराचार्यविरचित अच्युताष्टकम् – achyutashtakam : श्री शङ्कराचार्यविरचित अच्युताष्टक जिसकी प्रथम पंक्ति है “अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्” और सभी श्रद्धालु बड़े भक्ति-भाव से इसका पाठ-गायन करते हैं। भगवान विष्णु-राम-कृष्ण की पूजा हो और स्तोत्र पाठ करना हो तो सर्वप्रथम अच्युताष्टकम् ही ध्यान में आता है।

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गरुडपुराणोक्त अच्युत स्तोत्र - achyut stotra

गरुडपुराणोक्त अच्युत स्तोत्र – achyut stotra

गरुडपुराणोक्त अच्युत स्तोत्र – achyut stotra : भगवान विष्णु का ही एक नाम है अच्युत, वह जो कभी च्युत न हो अच्युत कहलाता है। भगवान विष्णु के अच्युत नाम से स्तोत्र भी मिलते हैं और अच्युत स्तोत्र गरुड़पुराण में वर्णित है। यह स्तोत्र नारद जी के प्रश्न करने पर ब्रह्मा द्वारा वर्णित है।

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