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खरमास कब से कब तक है

खरमास कब से कब तक है ~ Kharmas

खरमास कब से कब तक है ~ Kharmas : जब सूर्य धनु और मीन राशि में होता है, उसे खरमास कहते हैं। इस दौरान सूर्य का तेज मंद हो जाता है और सभी प्रकार के मांगलिक कार्य निषिद्ध होते हैं। 2023 में खरमास 13 दिसम्बर से 14 जनवरी तक और 2024 में 14 मार्च से 13 अप्रैल और फिर 15 दिसम्बर 2024 से 14 जनवरी 2025 तक रहेगा। इस महीने में मांगलिक कार्यों के आयोजन का निषेध होता है।

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कारोबार बढ़ाने के उपाय जो सबसे अधिक प्रभावशाली है

कारोबार बढ़ाने के उपाय जो सबसे अधिक प्रभावशाली है

यह आलेख व्यापार वृद्धि के विभिन्न उपायों पर प्रकाश डालता है। इसमें बताया गया है कि कारोबार की वस्तु से संबंधित ग्रह को प्रसन्न करना कारोबार को बढ़ाने का प्रमुख उपाय है। ग्रहों के साथ जुड़ी विभिन्न वस्तुएँ, उनके मंत्र-रत्न, और उनसे मिलने वाले लाभ के विषय में चर्चा की गई है। यह आलेख व्यापारी के लिए श्रीदुर्गा सप्तशती के एक प्रभावशाली मंत्र का भी वर्णन करता है जो व्यापार वृद्धि में सहायता करता है।

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व्यापार बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए ? व्यापार बढ़ाने का सबसे बड़ा उपाय

व्यापार बढ़ाने के लिए क्या करना चाहिए ? व्यापार बढ़ाने का सबसे बड़ा उपाय

इस पोस्ट में यदि किसी व्यापार की वृद्धि नहीं हो रही हो, तो उसके व्रद्धि के लिए उपायों पर विचार किया गया है। इसमें बताया गया है कि सेवाओं को बेहतर बनाने, ग्राहकों की आवश्यकताओं को समझने, व्यापार स्थल को स्वच्छ बनाए रखने, कर्तव्यनिष्ठा और आत्मनिरीक्षण के माध्यम से व्यापार की संभावनाएं बढ़ाई जा सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण उपाय के रूप में, अपने व्यापार के वस्तु के ग्रह को समझने और उसके प्रति सकारात्मक रवैया अपनाने का सुझाव दिया गया है। यहां कई तरह की वस्तुओं और उनके संबंधित ग्रहों, मंत्रों की चर

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मकर संक्रांति कब है 14 या 15 को - Makar Sankranti

मकर संक्रांति कब है 14 या 15 को – Makar Sankranti

मकर संक्रांति कब है 14 या 15 को – Makar Sankranti : मकर संक्रांति 2024 में 15 जनवरी; सोमवार को होगी। मकर संक्रांति हर बार 14 जनवरी को होता है; तो अब 15 जनवरी को क्यों होगा? इसका उत्तर यह है कि सूर्य मकर राशि में 14 जनवरी की आधी रात के बाद प्रविष्ट होंगे। पुण्यकाल का निर्धारण यह स्वीकार करता है कि सूर्य का निकटतम उदित होने का दिन ही प्रमाणिक होता है। मकर संक्रांति का अर्थ है सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना। सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो देवताओं का दिन आरम्भ होता है। मकर संक्रांति में किया गया स्नान-दान विशेष पुण्यदायक होता है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत की ज्योतिष विद्या

विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत की ज्योतिष विद्या

भारतीय ज्योतिष शास्त्र रोगों की उत्पत्ति और उनके उपचार के लिए आवश्यक ज्ञान प्रदान करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन को इसका समुचित उपयोग करके विश्व को लाभान्वित करने की आवश्यकता है। इससे चिकित्सा विज्ञान और रोगी दोनों का लाभ होगा। भारत को इस विषय पर ढेर सारे शोध और संशोधन करके पाठ्यपुस्तकों में जोड़ने की जरूरत है ताकि विश्व को चिकित्सा में नए आयाम देखने को मिलें। ज्योतिष शास्त्र पर किए गए शोध और उनके नतीजों को साझा करने में आंतरराष्ट्रीय स्थापनाओं को उत्साहित करना चाहिए।

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कमजोर चंद्रमा के लक्षण और उपाय - आत्महत्या विषय के सन्दर्भ में

कमजोर चंद्रमा के लक्षण और उपाय – आत्महत्या विषय के सन्दर्भ में

चन्द्रमा मन का कारक होता है, मन के द्वारा सोच-विचार किया जाता है। विचारों की उत्पत्ति मन में होती है और आत्महत्या संबंधी विचार का जन्म भी मन में ही होता है; लेकिन इससे यह कैसे सिद्ध होता है कि चन्द्रमा आत्महत्या का भी कारक है? जितने भी शुभ-अशुभ विचार होते हैं सभी मन में…

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आत्महत्या के कारण – आत्महत्या रोकथाम के उपाय

आत्महत्या के कारण – आत्महत्या रोकथाम के उपाय

आत्महत्या की मूल समस्या आत्मबल की कमी मानी जाती है। सूर्य के सबल होने से आत्मबल बढ़ता है। निराशावादी और असफलतापूर्ण व्यक्ति के आत्मबल में कमी होती है। इस मुद्दे को दूर करने के लिए आत्महत्या रोकथाम के प्रयासों पर चर्चा करनी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आत्मशक्ति को बढ़ाने, सूर्य उपासना, आशावादी सोच, और परिवारिक एकता को बढ़ाने, और सनातन विद्या को मान्यता देने के बारे में सुझाव दिए गए हैं। आत्महत्या को दूर करने का सफल रास्ता आत्मबल में वृद्धि करना है।

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आत्महत्या क्या है ? आत्महत्या के कारण - या मूल कारण क्या हैं ?

आत्महत्या क्या है ? आत्महत्या के कारण – या मूल कारण क्या हैं ?

ईश्वर द्वारा प्रदत्त अमूल्य जीवन को स्वतंत्र रूप से समाप्त करना आत्महत्या है, जिस पर विचारणीय रूप से कम ही चर्चा होती है। इस लेख में, आत्महत्या का स्वरूप, इसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई, और क्यों किसी को आत्महत्या का अधिकार नहीं होता है पर विचार किया गया है। आत्मायुक्त शरीर का सम्मान किया जाना चाहिए क्योंकि इसमें ईश्वर का ही अंश विद्यमान होता है। आत्महत्या को अक्षम्य पाप माना जाता है और इसके प्रतीक आत्महत्या को रोकने का उपाय आत्मा से संबंधित जीवन को समझने और सूर्य की उपासना करने में निहित है।

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