छठ पूजा का महत्व क्या है – 8 Points

छठ पूजा की विधि

न जाने मुझे ऐसा क्यों लगता है कि सनातन के साथ सदियों से होने वाला छल अभी भी हो ही रहा है और सनातनी छले ही जा रहे हैं। मेरी ये सोच गलत भी हो सकती है परन्तु कुछ तथ्य हैं जो प्रस्तुत किया जा रहा है। छठ पूजा का महत्व इस सम्बन्ध में हजारों पोस्ट-विडियो मिलेंगे लेकिन वास्तविक सच्चाई या वास्तविक महत्व कोई नहीं बताता है, सब मनगढंत तर्क-कुतर्कों से कुछ-कुछ गढ़ कर प्रस्तुत कर देते हैं। छठ पूजा का महत्व क्या है इसकी चर्चा हम आगे करेंगे उससे पहले जो महत्व बताया जाता है उसे देखेंगे।

छठ पूजा के महत्व से सम्बंधित तथ्य यहाँ जो दिया गया है वह AI से लेकर दिया गया है। छठ पूजा, जिसे छठी मैया या सूर्य षष्ठी भी कहा जाता है, एक अद्भुत पर्व है जो सूर्य देवता की पूजा के माध्यम से आत्मा की शुद्धि, प्राकृतिक संतुलन, और सामाजिक सरोकार की भावना को बढ़ावा देता है। यह पूजा सूर्य देवता (सूर्य भगवान) की पूजा के लिए की जाती है और इसका महत्व विभिन्न कारणों से है:

  1. सूर्योपासना : छठ पूजा में, सूर्य देवता की पूजा की जाती है, जिसे सूर्योपासना कहा जाता है। सूर्य को जीवन का स्त्रोत माना जाता है और इस पूजा के माध्यम से उसका कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।
  2. परिवारिक एकता: छठ पूजा को परिवार के सभी सदस्यों के साथ मनाने का एक विशेष माहौल होता है। इस त्योहार में परिवार के सभी लोग मिलकर समर्पित होते हैं और एक दूसरे के साथ प्यार और समर्पण का भाव बना रहता है।
  3. प्राकृतिक संरक्षण: छठ पूजा का आयोजन सूर्य और पृथ्वी के बीच संतुलन को बनाए रखने के लिए किया जाता है। सूर्योपासना के माध्यम से, मानव जीवन और प्राकृतिक पर्यावरण के बीच संतुलन को बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।
  4. आराधना और व्रत: छठ पूजा एक विशेष प्रकार का व्रत है जिसमें भक्त छठी माँ के पूजन के लिए विशेष प्रकार के आहार और विशेष तरीके से तैयार की गई मिठाईयों का सेवन करते हैं।
  5. निर्विघ्न का प्राप्ति: छठ पूजा का आयोजन संतान सुख, स्वास्थ्य, और निर्विघ्न सुख के लिए किया जाता है। इसमें भक्त सूर्य देवता से अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
  6. आदर्श समाज का प्रतीक: यह उत्सव सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है। परिवार के सभी सदस्य इसे साथ में मनाते हैं और एक-दूसरे के साथ साझा करते हैं। छठ पूजा के दौरान व्रत रखने वाले लोगों को अपने नैतिक और सामाजिक दायित्वों का समर्पण करने का अवसर मिलता है।
  7. आशीर्वाद और शुभकामनाएं: छठ पूजा एक समय है जब लोग अपने परिवार को आशीर्वाद और शुभकामनाएं देने के लिए एकत्र होते हैं। इस अवसर पर लोग अपने चाहने वालों को सौभाग्य, स्वास्थ्य, और समृद्धि की कामना करते हैं।
  8. आध्यात्मिक साक्षरता (Spiritual Significance): छठ पूजा में सूर्य देवता की पूजा से आध्यात्मिक साक्षरता में वृद्धि होती है। यह व्यक्ति को अपने आत्मा के साथ जुड़ने का एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करता है।

असली सच्चाई ; जो आपको कोई नहीं बताएगा …

छठ पूजा अपनी विशेष पूजा विधि, गीत, और रंगीन धूप की वजह से एक आकर्षक और रमणीय त्योहार माना जाता है जो भारतीय सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। ये तथ्य AI की मदद से लेकर कुछ संशोधित किये गए हैं। आपको छठ पूजा का महत्व बताने के क्रम में इसी तरह की और भी कई बातें बताई जाती है, और आगे हम वास्तविक महत्व को समझने का प्रयास करेंगे तब जाकर ऐसा लगेगा कि वास्तव में हमारे साथ छल किया जा रहा है। वास्तविक तथ्यों को छुपाकर मनगढंत बातें बताई जाती है। आइये छठ पूजा के वास्तविक महत्व को समझते हैं :

वर्ष में दो बार छठ पर्व मनाया जाता है कार्तिक और चैत में जिसमें से कार्तिक मास का छठ विशेष महत्वपूर्ण है। कार्तिक मास के छठ पर्व को बहुत ही पवित्रता पूर्वक विशाल पैमाने पर मनाया जाता है। घर से दूर रहने वाले लोग भी इस पर्व पर घर आकर सूर्योपासना करते हैं।

लेकिन क्यों; सूर्योपासना है किन्तु कार्तिक में ही क्यों किया जाता है ? ये सबसे बड़ा यक्षप्रश्न है।

सूर्य जब तुला राशि में रहते हैं तो कार्तिक माह होता है। तुला में सूर्य नीच होते हैं। सूर्य सर्वाधिक प्रभावित करने वाले ग्रह हैं, ज्योतिष शास्त्र को प्रत्यक्षतः प्रमाणित करते हैं। सूर्य को ज्योतिष में आत्मकारक भी कहा गया है साथ ही आरोग्य प्रदाता भी हैं। आरोग्यं भास्करादिच्छेत् धनं इच्छेत् हुताशनात्। ज्ञानं च शंकरादिच्छेत् मुक्तिमिच्छेत्जनार्दनात्॥ “आरोग्यं भास्करादिच्छेत्” – अर्थात आरोग्य की कामना सूर्य से करें या आरोग्य की इच्छा सूर्य को प्रकट करे यानि सूर्य आरोग्य प्रदाता हैं।

छठ पूजा का महत्व क्या है

आत्माकारक और आरोग्य के देवता सूर्य जब नीच होते हैं तो सबसे अधिक शारीरिक व्याधि (रोग/कष्ट/दुःख) संभावित हो जाती है, आत्मशक्ति क्षीण हो सकती है और “पहला सुख निरोगी काया” कहा गया है जो नीच सूर्य से भंग हो जायेगा, आत्मशक्ति, उत्साह-साहस भी क्षीण हो जायेगी। अतः कार्तिक माह में जब सूर्य नीच होते हैं तो उनकी उपासना करके विभिन्न संभावित दुःखों के निवारण हेतु सूर्य के नीचत्व दोष का निवारण किया जाता है। साथ ही सूर्य ग्रहराज भी हैं। जब राजा निर्बल हो तो अराजकता हो जाती है, इसलिये भी सूर्य सबल करने का प्रयास किया जाता है।

यहाँ एक प्रश्न पुनः उत्पन्न होगा चलो कार्तिक में तो ठीक है फिर चैत में क्यों ? सबसे पहली बात चैत में गौण रूप से मनाया जाता है और चैत में मेष के उच्च सूर्य होते हैं एवं तीव्र ताप से जगत को संतापित करने के लिए अग्रसर होते हैं अतः सूर्य से तीव्र ताप का संताप निवारण हेतु उच्च सूर्य की भी उपासना की जाती है। जब राजा अत्यधिक सबल हो जाये तो निरंकुश होने की भी संभावना रहती है, अतः चैत में उच्च सूर्य (ग्रहराज) को भी प्रसन्न किया जाता है ताकि वो निरंकुश न हों।

अब हम छठ पूजा के वास्तविक महत्व को समझेंगे :

  1. नीच सूर्य दोष का निवारण करने हेतु कार्तिक में तुला के सूर्य की उपासना की जाती।
  2. “आरोग्यं भास्करादिच्छेत्” – सूर्य आरोग्य प्रदाता हैं, इसलिये नीच सूर्य की विशेष अर्चना की जाती है ताकि आरोग्य हानि न हो अथवा न्यूनतम हो।
  3. सूर्य उपासना से कुष्ठरोग एवं चर्मरोग का निवारण होता है और इसे विज्ञान भी स्वीकारता है।
  4. सूर्य आत्मकारक भी हैं, कार्तिक माह के बाद स्वाभाविक रूप से शिथिलता व आलस्य की वृद्धि होती है, शिथिलता व आलस्य को बहुत बड़ा शत्रु कहा गया है – आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान रिपुः। अतः सूर्य उपासना से आत्मशक्ति को भी सबलता प्राप्त होती है एवं शिथिलता-आलस्य का निवारण होता है।
  5. ग्रहराज सूर्य को निर्बल होने पर इसलिये भी सबल करने के लिये उपासना की जाती है ताकि अराजकता न हो।
  6. सूर्य नमस्कार करने से दरिद्रता का निवारण होता है।
  7. छठि माता की कृपा से संतान लाभ भी होता है।

इस प्रकार छठ पूजा के वास्तविक महत्व की चर्चा के बाद हमें अवश्य चिंतन करने की आवश्यकता है कि आखिर क्या कारण है कि कुछ भी मनगढंत तथ्य प्रस्तुत किये जाते हैं। क्या ज्ञात नहीं है; चलो मान लेते हैं ज्ञात नहीं होती तो बताने से पहले शोध करना चाहिये न, मनगढंत बातें क्यों बताते हैं। लेकिन हमें ऐसा नहीं लगता, हमें तो लगता है कि जानबूझकर सच्चाई को छुपाया जाता है और मनगढंत बातें बताई जाती है। सनातन के साथ सदियों से जो छल होता आया है वह आज भी हो ही रहा है।

F & Q :

प्रश्न : छठ पूजा कार्तिक मास में ही क्यों मनाया जाता है ?
उत्तर : कार्तिक माह में तुला राशि में सूर्य नीच होते हैं अतः सूर्य का नीचत्व दोष निवारण करने के लिये कार्तिक मास में छठ पूजा किया जाता है।

प्रश्न : सूर्य प्रसन्न होने पर क्या प्रदान करते हैं ?
उत्तर : सूर्य प्रसन्न होने पर आरोग्य प्रदान करते हैं ।

प्रश्न : नीच सूर्य होने से क्या-क्या संभावित होता है ?
उत्तर : सूर्य नीच होने से आरोग्य हानि, आलस्य वृद्धि, अराजकता आदि संभावित होता है।

प्रश्न : चैत्र माह में छठ पूजा क्यों की जाती है ?
उत्तर : चैत्र माह में मेष के सूर्य उच्च होते हैं जिससे तापभय एवं ग्रहराज सूर्य के निरंकुश होने का भय होता है, अतः निवारण हेतु चैत्र माह में भी उच्च सूर्य की उपासना की जाती है।

प्रश्न : छठ माता का पति कौन है ?
उत्तर : छठ माता अर्थात षष्ठी देवी के पति स्कन्द या स्वामी कार्तिकेय हैं ।

प्रश्न : छठ माता कौन है ?
उत्तर : छठ माता , षष्ठी देवी को कहा जाता है जो बालकों की रक्षा करती हैं ।

प्रश्न : कार्तिकेय की पूजा क्यों नहीं होती ?
उत्तर : यह प्रश्न गलत है; कार्तिकेय की पूजा होती है। दुर्गा पूजा में भी होती है, स्कन्द षष्ठी को भी होती है।

प्रश्न : कार्तिकेय की पत्नी का नाम क्या है ?
उत्तर : कार्तिकेय की पत्नी का नाम देवसेना है जो षष्ठी देवी नाम से भी जानी जाती हैं।

कर्मकांड विधि में शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रामाणिक चर्चा की जाती है एवं कई महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा पूर्व भी की जा चुकी है। तथापि सनातनद्रोही उचित तथ्य को जनसामान्य तक पहुंचने में अवरोध उत्पन्न करते हैं। एक बड़ा वैश्विक समूह है जो सनातन विरोध की बातों को प्रचारित करता है। गूगल भी उसी समूह का सहयोग करते पाया जा रहा है अतः जनसामान्य तक उचित बातों को जनसामान्य ही पहुंचा सकता है इसके लिये आपको भी अधिकतम लोगों से साझा करने की आवश्यकता है।

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