कर्मकांड के प्रकार

कर्मकांड के प्रकार

कर्मकांड को सीखने समझने हेतु कर्मकांड के प्रकार को भी जानना-समझना आवश्यक हो जाता है। यहां क्रियात्मक पक्ष के आधार पर कर्मकांड के प्रकार की विस्तृत चर्चा की गयी है। क्योंकि हम देखते हैं कुछ कर्म बिना ब्राह्मण के ही किये जाते हैं अर्थात ब्राह्मण की आवश्यकता नहीं होती और कुछ कर्म ऐसे होते हैं जिसमें ब्राह्मण की अनिवार्यता होती है।

कर्मकांड कितने प्रकार के होते हैं ?

कर्मकांड के प्रकार संबंधी प्रश्न में एक उलझन है पहले इसे दूर कर लेते हैं। कर्म के प्रकार अलग होते हैं और जब कर्मकांड के प्रकार का प्रयोग हो रहा हो तो कर्म के प्रकार इसका अर्थ नहीं समझा जाना चाहिये। कर्मकांड के प्रकार संबंधी प्रश्न के उत्तर में हमें कर्म के प्रकार का उत्तर सामान्यतः बताया जाता है जो कि कदापि उचित नहीं है।

हम यहाँ कर्मकांड के प्रकार की चर्चा करेंगे न कि कर्म के प्रकार की। यद्यपि कर्मकांड के अंग कर्म ही हैं लेकिन नित्य, नैमित्तिक और काम्य तीनों कर्म के प्रकार हैं कर्मकांड के नहीं। कर्मकांड के प्रकारों का निर्धारण भी कर्मों के आधार पर ही किया जायेगा किन्तु वह कर्म के प्रकार से भिन्न होना चाहिये।

कर्मकांड के प्रकार को वेदों के आधार पर भी विभाजित किया जा सकता है जैसे ऋग्वेद के कर्मकांड, यजुर्वेद के कर्मकांड, सामवेद के कर्मकांड, किन्तु ये विभाजन केवल मंत्रों के प्रयोग से सम्बंधित है और कर्मकांड मुख्यतः एक ही वेद यजुर्वेद से सम्बंधित है। हाँ कई जगहों पर अन्य वेदों के मंत्र भी प्रयुक्त होते हैं।

कर्मकांड क्या है
कर्मकांड क्या है

एक ही कर्म में कई वेदों के मंत्र प्रयोग किये जा सकते हैं अतः वेद मंत्रों के आधार पर या वेद के आधार पर कमर्काण्ड को विभाजित करना उपर्युक्त प्रतीत नहीं होता है। जैसे यज्ञों में चारों वेदमंत्रो का पाठ होता है।

सामान्य पूजा में भी यजुर्वेद और ऋग्वेद दोनों वेदमंत्रों का प्रयोग होता है। अतः कर्मकांड को हम वेदों के आधार पर विभाजित नहीं करेंगे।

कर्मकांड क्या है ?

“उन्नति के शास्त्रों में कई मार्ग बताये गए हैं जिसमें से एक भाग कर्म भी है और कर्ममार्ग का विधान कर्मकाण्ड है।“ अन्य प्रकार से परिभाषा : “लौकिक एवं पारलौकिक सुख/उन्नति की प्राप्ति के लिए कर्ममार्ग का विधान कर्मकाण्ड है।”

कर्मकांड क्या है ? अधिक जानकारी के लिये इस पोस्ट को पढ़ें।

कर्मकांड के प्रकार

वास्तव में कर्मकांड को दो भागों में ही विभाजित किया जा सकता है :

  1. अब्राह्मण और 2. सब्रह्माण
  • 1. अब्राह्मण या ब्राह्मण रहित –
  • जैसे संध्या में ब्राह्मण की आवश्यकता नहीं होती,
  • तर्पण में भी ब्राह्मण की आवश्यकता नहीं होती,
  • इसी तरह अन्य नित्यकर्मों में भी ब्राह्मण की आवश्यकता नहीं होती है।
कर्मकांड के प्रकार
कर्मकांड के प्रकार

ध्यातव्य : यद्यपि जिन लोगों को विधि और मंत्र का ज्ञान नहीं होता उन्हें ब्राह्मण ही कराते हैं; इस विषय में उन लोगों को सीखने की आवश्यकता होती है, यहां ब्राह्मण की आवश्यकता सिद्ध नहीं होती है।

  • 2. सब्रह्माण या ब्राह्मण युक्त

सब्रह्माण कर्मकांड; कर्मकांड का वैसा प्रकार है जिसे ब्राह्मण के बिना सम्पादित नहीं किया जा सकता अर्थात जिस कर्म में ब्राह्मण का होना अनिवार्य हो भले ही भोजन मात्र के लिए क्यों न हो वह कर्मकांड का सब्रह्माण प्रकार माना जायेगा। इसमें नैमित्तिक कर्म और काम्य कर्म आते हैं।

कोई भी नैमित्तिक अथवा काम्य कर्म हो;

  • सर्वप्रथम उसे करने के लिये ब्राह्मण के आज्ञा की आवश्यकता होती है ।
  • पुनः विधिवत संपादन हेतु भी ब्राह्मण की आवश्यकता होती है ।
  • पुनः कर्म संबंधी दान-दक्षिणा ग्रहण करने के लिये भी ब्राह्मण की आवश्यकता होती है । और
  • ब्राह्मण भोजन के बिना भी कोई नैमित्तिक या काम्य कर्म पूर्ण नहीं होता अतः पुनः भोजन करने के लिये भी ब्राह्मण की आवश्यकता होती है।

सारांश : कर्मकांड के विभाजन की चर्चा करते समय हमें इसे ‘कर्म’ का प्रकार नहीं मानना चाहिए। यह भी स्पष्ट है कि वेदों के आधार पर कर्मकांड के प्रकार का विभाजन करने का विचार भी प्रासंगिक नहीं होता है। कर्मकांड को वास्तव में केवल दो प्रकार से विभाजित किया जा सकता है:

  1. अब्राह्मण कर्मकांड (ब्राह्मणरहित), जिसे स्वयं किया जा सकता है और इसमें ब्राह्मण की आवश्यकता नहीं होती।
  2. सब्रह्माण कर्मकांड (ब्राह्मण युक्त), जिसे बिना ब्राह्मण के सम्पादन नहीं किया जा सकता है।

अत: कर्मकांड की प्रकारों का निर्धारण कर्मों के आधार पर होता है, लेकिन वे कर्म के प्रकार से भिन्न हैं।

F & Q :

प्रश्न : क्या वेदों के आधार पर कर्मकांड को विभाजित किया जा सकता है ?
उत्तर : नहीं, कर्मकांड मुख्यतः एक ही वेद यजुर्वेद से सम्बंधित है; अतः वेदों के आधार पर कर्मकांड को विभाजित नहीं किया जा सकता है।

प्रश्न : कर्मकांड के कितने प्रकार हैं ?
उत्तर : कर्मकांड के दो प्रकार हैं : अब्राह्मण (ब्राह्मण रहित) और सब्रह्माण (ब्राह्मण युक्त)।

प्रश्न : अब्राह्मण (ब्राह्मण रहित) कर्मकांड क्या है ?
उत्तर : अब्राह्मण (ब्राह्मण रहित) कर्मकांड वैसा प्रकार है जिसमें ब्राह्मण की आवश्यकता नहीं होती है।

प्रश्न : सब्राह्मण (ब्राह्मण युक्त) कर्मकांड क्या है ?
उत्तर : सब्राह्मण (ब्राह्मण युक्त) कर्मकांड वैसा प्रकार है जिसमें ब्राह्मण की आवश्यकता होती है, भले ही भोजन मात्र के लिये ही क्यों न हो।

प्रश्न : सब्राह्मण (ब्राह्मण युक्त) कर्मकांड में ब्राह्मण की आवश्यकता क्यों होती है ?
उत्तर : सब्राह्मण (ब्राह्मण युक्त) कर्मकांड वैसा प्रकार है जिसमें ब्राह्मण की आवश्यकता आज्ञा ग्रहण, संपादन, दक्षिणा एवं दान ग्रहण और भोजन के लिये होती है।

प्रश्न : यदि सब्राह्मण (ब्राह्मण युक्त) कर्मकांड में ब्राह्मण की उपस्थिति न हो तो क्या होगा ?
उत्तर : सब्राह्मण (ब्राह्मण युक्त) कर्मकांड वैसा प्रकार है जिसमें ब्राह्मण की उपस्थिति न हो तो वह कर्मकांड पूर्ण नहीं होगा ।

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