क्या आप जानते हैं सबसे बड़ा भगवान कौन है ?

क्या आप जानते हैं सबसे बड़ा भगवान कौन है - सच कोई नहीं बतायेगा

पहले त्रिदेव की बात होती है तो तीन देवताओं का नाम आता है – ब्रह्मा, विष्णु और महेश फिर त्रिदेवियां के भी नाम आते हैं – महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती, फिर पञ्चदेवता का नाम आता है, फिर षड्देवता का नाम आता है – गणेश, सूर्य, अग्नि, विष्णु, शिव और दुर्गा, फिर दशावतार, फिर दशमहाविद्या, फिर रुद्रावतार जिनमें सबसे अधिक हनुमान जी की पूजा की जाती है, फिर भगवान विष्णु के 24 अवतार ……… इत्यादि प्रकारों से बहुत सारे भगवानों की पूजा की जाती है।

क्या आप जानते हैं सबसे बड़ा भगवान कौन है ?

सबसे बड़े भगवान कौन हैं : इस प्रकार बहुत सारे भगवानों के बारे में जानने पर एक स्वाभाविक प्रश्न उत्पन्न होता है कि इन सबमें सबसे बड़े भगवान कौन हैं ?

सबसे बड़े भगवान के बारे में निर्णय करना अत्यंत कठिन है और अपराध भी है, किन्तु स्वयं के लिये सबसे बड़े भगवान के बारे में जानना अत्यंत सरल है। इस विषय को गंभीरतापूर्वक चिंतन करने, बार-बार विचार करने पर ही समझा जा सकता है केवल एक बार इस अध्याय को पढ़ लेने से नहीं समझा जा सकता।

इस अध्याय में हम सबसे बड़े भगवान को ही ढूंढेंगे आखिर सबसे बड़े भगवान कौन हैं ? इतने सारे भगवानों की पूजा करके क्या करें जो सबसे बड़े भगवान हैं उन्हीं की पूजा करेंगे। इस प्रश्न की एक विशेषता है कि जिन लोगों का बचपन धर्म (पूजा-पाठ) से जुड़ा हुआ रहा है वो ऐसा प्रश्न नहीं करते हैं, वो स्पष्टतः जिनकी पूजा करता है उन्हीं को सबसे बड़ा घोषित करता है यदि दूसरे भगवान को बड़ा मानने वाला भी वहाँ हो तो दोनों में शास्त्रार्थ शुरू हो जाता है।

लेकिन जिसका बचपन धर्म (पूजा-पाठ) से जुड़ा नहीं रहा हो ये प्रश्न वस्तुतः उसी के मन में उठता है, उसे उत्तर ज्ञात नहीं है उसके मन में जिज्ञासा होती है कि भगवान तो बहुत सारे हैं मगर किसकी पूजा करूँ, सबसे बड़ा भगवान कौन है ?

सबसे बड़ा भगवान कौन है
सबसे बड़ा भगवान कौन है
  • २२ जनवरी को अयोध्या में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा हुई, पूरा देश राममय हो गया और ऐसा लग रहा है जैसे राम सबसे बड़े भगवान हैं।
  • इसी तरह जब ज्ञानवापी मंदिर की बारी आयेगी तो पूरा देश शिवमय हो जायेगा और ऐसा लगेगा कि सबसे बड़े भगवान तो भगवान शङ्कर हैं।
  • फिर जब मथुरा में भगवान कृष्ण का मंदिर बनेगा तो ऐसा लगेगा कि सबसे बड़े भगवान तो भगवान कृष्ण हैं।

अच्छा इस प्रश्न की एक बड़ी विशेषता ये है कि अलग-अलग समय में अलग-अलग उत्तर मिलता है शंकासमाधान तो नहीं होता किन्तु संशय बढ़ता ही जाता है; जैसे :

  • रामनवमी को राम सबसे बड़े लगते हैं, देश राममय रहता है; तो
  • श्रावण में भगवान शंकर सबसे बड़े लगते हैं, देश में हर हर महादेव गूंजता रहता है; फिर
  • भाद्र में कृष्णाष्टमी को कृष्ण सबसे बड़े बन जाते है और हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की गूंजने लगता है, फिर
  • भाद्र माह के ही शुक्ल पक्ष में गणेश चतुर्थी को गणेश सबसे बड़े लगते है और गणपति बप्पा मौर्या गुंजायमान होता है, तो
  • आश्विन नवरात्रा आने पर सब दुर्गा पूजा करने लगते हैं और दुर्गा ही सबसे बड़ी लगती है, फिर
  • दीपावली को लक्ष्मी बड़ी लगती है तो
  • छठ पूजा में भगवान सूर्य और छठि मैया बड़ी हो जाती है, फिर
  • वसंतपञ्चमी को विद्या की देवी सरस्वती बड़ी होती है, तो
  • महाशिवरात्रि में भगवान शङ्कर की बारात सजती है।

विडम्बना ये है की हमेशा ऐसा लगता है लेकिन कभी भी ये अंतिम निर्णय नहीं हो पाया की सबसे बड़े भगवान कौन हैं ?

कथा सुनने से

आपके मन में एक बार ऐसा विचार आता है कि चलो बहुत सारी कथायें सुनकर ज्ञान बढ़ेगा और निर्णय कर लेंगे कि सबसे बड़ा भगवान कौन है ? और आप ढेरों कथायें सुन सकते है वास्तविक भी और दूरदर्शनों पर भी। यदि आप कथा सुनने जाते हैं और कथाओं में अपने इस प्रश्न का उत्तर जानना चाहते हैं तो वहां भी :

एक कथा में राम, तो दूसरी में कृष्ण, तीसरी में भगवान शिव, तो चौथी में माता दुर्गा, फिर पांचवीं में हनुमान जी तो छठी में भगवान गणेश, सातवीं में भगवान विष्णु तात्पर्य ये है कि यदि आपके मन में ये प्रश्न है कि सबसे बड़ा भगवान कौन है तो इसका उत्तर ढेरों कथायें सुनने के बाद भी नहीं मिल पाती है।

धार्मिक ग्रंथ अर्थात धार्मिक पुस्तक पढ़ने से

एक बार आपके मन में ये विचार भी आता है कि चलो स्वयं पढ़कर ही पता कर लेते हैं की सबसे बड़े भगवान कौन हैं और बाजार जाकर ढेरों धार्मिक ग्रंथ जैसे दुर्गा सप्तशती, गीता, रामायण, भागवत आदि पुराण क्रय करके पढ़ना आरम्भ करते हैं।

  • जब गीता पढ़ते हैं तो भगवान कृष्ण सबसे बड़े लगते हैं।
  • फिर जब रामायण पढ़ने लगते हैं तो भगवान राम सबसे बड़े लगते हैं।
  • फिर दुर्गा सप्तशती पढ़ने लगते हैं तो दुर्गा बड़ी लगने लगती है।
  • फिर जब भागवत पढ़ने लगते हैं तो फिर से भगवान कृष्ण बड़े लगने लगते हैं।
  • फिर शिवपुराण पढ़ने पर भगवान शिव बड़े लगते हैं।
  • फिर विष्णुपुराण पढ़ने पर भगवान विष्णु बड़े लगते हैं।

लेकिन बहुत सारे धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने के बाद भी किसी प्रकार से भी ये निष्कर्ष नहीं निकल पाता है कि सबसे बड़े भगवान कौन हैं ?

sabse bade bhagwan kaun hai
sabse bade bhagwan kaun hai

एक स्थिति यह भी होती है कि बार-बार किसी एक भगवान की ही कथायें पढ़ते और सुनते हैं और ऐसा लगता है कि वही भगवान सबसे बड़े हैं किन्तु वह विचार भी स्थिर नहीं रह पाता क्योंकि वर्षभर अनेक देवताओं की पूजा होती रहती है और विचार बदलते रहते हैं।

लेकिन बहुत सारे लोगों के विचार स्थिर भी तो होते हैं

  • अयोध्या वालों का विचार स्थिर होता है कि भगवान राम ही सबसे बड़े हैं।
  • काशी और अन्य ज्योतिर्लिंग क्षेत्र के निवासियों का विचार स्थिर होता है कि भगवान शंकर ही सबसे बड़े हैं।
  • शक्तिपीठों के क्षेत्र में निवास करने वालों का विचार भी विभिन्न देवियों के प्रति स्थिर ही होता है।
  • मथुरा और वृन्दावन वालों का विचार भगवान कृष्ण को लेकर स्थिर ही होता है।

इन लोगों का विचार तो इतना स्थिर होता है कि अपने-अपने भगवान को लेकर झगड़ा करने के लिये भी तैयार रहते हैं। परन्तु फिर भी सामान्य लोगों के इस प्रश्न का कि सबसे बड़े भगवान कौन हैं उत्तर नहीं मिल पाता।

जब तक आप निर्णय करना चाहेंगे, किसी प्रकार से निष्कर्ष निकालना चाहेंगे तो इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिल सकता कि सबसे बड़े भगवान कौन हैं। अपितु यह एक अपराध हो जाता है। गोस्वामी तुलसी दास की एक चौपाई है – “को बड़ छोट कहत अपराधु।”

सबसे बड़ा भगवान कौन है जब इस प्रश्न का उत्तर ढूंढना चाहते हैं तो अनजाने में ही अपराधी बन जाते हैं।

अब तो संकट और बढ़ गया कि भगवान भी बहुत सारे हैं और सबसे बड़े कौन हैं ये ज्ञात करना असंभव है। लेकिन प्रश्न का उत्तर तो होना चाहिये।

प्रश्न गलत नहीं है, और प्रश्न का उत्तर भी है लेकिन प्रश्न का उत्तर ढूंढना अपराध होगा और अपराध इस कारण होगा की जब आप किसी एक को बड़ा कहेंगे तो इसका तात्पर्य अन्य सभी को छोटा (बिना कहे) कहेंगे।

फिर से एक नया प्रश्न उत्पन्न हो रहा है : तो जब अयोध्या वाले राम को सबसे बड़ा कहते हैं और मथुरा वाले कृष्ण को तो क्या उन लोगों को अपराध नहीं लगता या ये बात उन्हें ज्ञात नहीं है ?

लेकिन इन विषयों में जितना उलझते जायेंगे दलदल की तरह और फंसते जायेंगे लेकिन इस अध्याय के मूल प्रश्न के उत्तर तक नहीं पहुँच पायेंगे। इसलिये और अधिक विषय विस्तार किये बिना मूल प्रश्न का उत्तर जानते हैं।

सबसे बड़े भगवान कौन है
सबसे बड़े भगवान कौन है

सबसे बड़े भगवान कौन है

  • विभिन्न ग्रंथों में जहां कहीं भी जिस भगवान का वचन आता है तो स्पष्ट वचन मिलता है कि सबसे बड़े भगवान वही हैं।
  • वास्तव में मनुष्य जन्म आत्मकल्याण के लिये प्राप्त होता है।
  • आत्मकल्याण के लिये धर्म आवश्यक होता है।
  • लेकिन मन स्वभावतः अधर्म में अधिक लगता है।
  • धर्म में मन को यत्नपूर्वक लगाना पड़ता है।
  • पूर्वजन्मों के कर्म के प्रभावानुसार प्रत्येक मन की प्रवृत्ती भी अलग-अलग होती है।
  • यदि भगवान का कोई एक रूप ही रहे तो कुछ व्यक्ति को ही आत्मकल्याण का अवसर प्राप्त हो सकेगा क्योंकि मन की विशेष प्रवृत्ति के अनुसार कुछ विशेष व्यक्ति ही उस भगवान में मन को लगा पायेंगे, शेष का मन नहीं लगेगा।
  • वास्तव में भगवान या ईश्वर या परमात्मा एक ही हैं लेकिन विभिन्न प्रवृत्ति के मन वाले सभी व्यक्ति को आत्मकल्याण का समान अवसर देने के लिये भगवान ने विभिन्न रूप धारण किया।
  • पूर्वकर्म के प्रभाव से जिसके मन की जो प्रवृत्ति है उस प्रवृत्ति के अनुकूल भगवान के जिस स्वरूप में मन लगे उस व्यक्ति के लिये वही सबसे बड़े भगवान होते हैं।
  • इसमें क्षेत्र विशेष का भी महत्व होता है, क्षेत्र विशेष में जन्म होना यह निर्धारित करता है कि उसके लिये भगवान विष्णु बड़े हैं या भगवान शिव या भगवान गणेश या भगवती दुर्गा आदि या भगवान सूर्य।
  • क्षेत्र विशेष में जन्म लेने वाले का पालन-पोषण यदि अन्य क्षेत्र में हो अर्थात अन्य क्षेत्र का वातावरण-व्यवहार दिया जाय तो विकृति आ जाती है और उस व्यक्ति के लिये अपना सबसे बड़ा भगवान (इष्ट) निर्धारण करना कठिन हो जाता है, क्योंकि स्वाभाविक प्रवृत्ति तो अपने क्षेत्रीय इष्ट में होती है और अन्य क्षेत्र का प्रभाव पड़ने के कारण दूसरे क्षेत्र के अनुकूल स्वरूप वाले भगवान की जानकारी मिलती है।

अर्थात सभी भगवान बड़े हैं लेकिन कोई भी छोटे नहीं हैं। व्यक्ति विशेष के लिये कोई भगवान सबसे बड़े इस आधार पर हो सकते हैं कि पूर्व कर्म के प्रभावानुसार उसके मन की प्रवृत्ति के अनुरूप उसका एक विशेष क्षेत्र में जन्म होता है और उस क्षेत्र के जो भगवान होते हैं वही उस व्यक्ति के लिये सबसे बड़े भगवान होते हैं।

सबसे बड़े भगवान कौन हैं यदि इसका निर्णय करना चाहें तो अपराध होगा लेकिन व्यक्ति विशेष के लिये सबसे बड़े भगवान कौन हैं इसका निर्णय करने की आवश्यकता नहीं होती यह पूर्वनिर्धारित होता है। सबसे बड़े भगवान का तात्पर्य यह है कि व्यक्ति विशेष के गुण-स्वभाव-मन की प्रवृत्ति के अनुकूल भगवान का सर्वाधिक कल्याणकारी स्वरूप।

  • अयोध्यावासियों (विस्तृत क्षेत्र के रूप में) के लिये भगवान राम सबसे बड़े हैं।
  • मिथिला के लिये शक्ति (दुर्गा/काली..) सबसे बड़ी है।
  • मथुरा, द्वारिका वासियों के लिये भगवान श्रीकृष्ण सबसे बड़े हैं।
  • ज्योतिर्लिंग वाले क्षेत्रों के लिये भगवान शिव सबसे बड़े होते हैं।
  • जिस क्षेत्र के लिये सबसे बड़े जो भगवान होते हैं उस क्षेत्र में उसी स्वरूप का सबसे बड़ा उत्सव देखा जाता है।
  • और अपने क्षेत्र में जो अपने भगवान को सबसे बड़ा बताते हैं इसमें कोई अपराध नहीं होता है लेकिन जब अन्य देवताओं से तुलनात्मक विवेचना की जाय तो अवश्य अपराध होता है।

जैसे : कई बार राम और कृष्ण की तुलनात्मक चर्चा होने लगती है अथवा कई बार ऐसा भी होता है कि शक्तिक्षेत्र में जाकर वैष्णव शक्ति से श्रेष्ठ अपने इष्ट को सिद्ध करने का प्रयास करते हैं, सिद्ध पीठों पर बलि का विरोध करते हुये उसे बंद कराने का प्रयास करते हैं यह अपराधश्रेणी में ही गण्य है।

को बड़ छोट कहत अपराधु
को बड़ छोट कहत अपराधु

इसी प्रकार यदि मिथिला के शक्ति उपासक अयोध्या जाकर राम की अवहेलना करते हुये शक्ति परम्परा स्थापित करने का प्रयास करे तो वहां भी – “को बड़ छोट कहत अपराधु” वाले अपराध की व्याप्ति होगी।

निष्कर्ष : बहुत सारे भगवानों में कौन सबसे बड़े हैं यह निर्धारित नहीं किया जा सकता लेकिन क्षेत्रविशेष के आधार पर सबसे बड़े भगवान (जिनकी अराधना में मन की प्रवृत्ति सर्वाधिक हो सकती है अर्थात अधिक यत्न की आवश्यकता नहीं होगी) पूर्वनिर्धारित होते हैं। सबसे बड़े भगवान का तात्पर्य ये है कि उस व्यक्ति के लिये भगवान का क्षेत्रानुसार जो स्वरूप है उसी की आराधना सर्वाधिक कल्याणकारी है।

सबसे बड़े भगवान कौन हैं – यदि इस प्रश्न का उत्तर अपने क्षेत्र के देवता का नाम कोई बताये तो उसका उत्तर सही होगा, लेकिन भगवान के विभिन्न स्वरूपों की कथाओं के आधार पर बड़े का निर्धारण करने लगे तो अपराध होगा।

इस विषय में आप अपने विचार से हमें अवगत करने के लिये टिप्पणी कर सकते हैं।

॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः सुशांतिर्भवतु सर्वारिष्ट शान्तिर्भवतु

कर्मकांड विधि में शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रामाणिक चर्चा की जाती है एवं कई महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा पूर्व भी की जा चुकी है। तथापि सनातनद्रोही उचित तथ्य को जनसामान्य तक पहुंचने में अवरोध उत्पन्न करते हैं। एक बड़ा वैश्विक समूह है जो सनातन विरोध की बातों को प्रचारित करता है। गूगल भी उसी समूह का सहयोग करते पाया जा रहा है अतः जनसामान्य तक उचित बातों को जनसामान्य ही पहुंचा सकता है इसके लिये आपको भी अधिकतम लोगों से साझा करने की आवश्यकता है।

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