संशोधित अपात्रक सपिंडीकरण श्राद्ध विधि - वाजसनेयी

संशोधित अपात्रक सपिंडीकरण श्राद्ध विधि – वाजसनेयी

वाजसनेयी संशोधित ‘अपात्रक सपिण्डीकरण श्राद्ध विधि’: जानें प्रेतवेदी और पितृवेदी के पृथक्करण का शास्त्रीय महत्त्व। सपिण्डीकरण का उचित काल, आसनादि क्रम और ‘तंत्र’ निषेधों का प्रामाणिक विश्लेषण।

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द्वादशाह विधि | सपिण्डीकरण सहित – छन्दोग

द्वादशाह विधि | सपिण्डीकरण सहित – छन्दोग

मासिक श्राद्ध और सपिण्डीकरण श्राद्ध द्वादशाह के दिन किया जाता है जो यहां दिया गया है। श्राद्ध करने की विधि और श्राद्ध के मंत्रों को विशेष शुद्ध रखने का प्रयास किया गया है

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द्वादशाह विधि | सपिंडी श्राद्ध विधि | वाजसनेयी

द्वादशाह विधि | सपिंडी श्राद्ध विधि | वाजसनेयी

मासिक श्राद्धों में प्रथम के स्थान पर क्रमशः प्रयोग करे : द्वितीय – तृतीय – चतुर्थ – पञ्चम – ऊनषाण् – षष्ठ – सप्तम – अष्टम – नवम – एकादश – ऊनवार्षिक और द्वादश। 11 मास के मध्य यदि अधिकमास हो तो त्रयोदश मासिक की वृद्धि होगी। लेकिन फिर क्रम में परिवर्तन होगा – एकादश-द्वादश-ऊनवार्षिक और त्रयोदश।

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