षोडशोपचार पूजन विधि मंत्र – क्या है ?

षोडशोपचार पूजन विधि मंत्र - क्या है ?

षोडशोपचार पूजन विधि क्या है या षोडशोपचार में क्या-क्या आता है ?

षोडशोपचार विधि : १६ उपचारों/वस्तुओं/क्रियाओं द्वारा की जाने वाली पूजा षोडशोपचार विधि कहलाती है। षोडशोपचार पूजन के लिये शास्त्रों में ये सोलह उपचार वर्णित हैं –

आसनं स्वागतं चार्घ्यं पाद्यमाचमनं तथा।
मधुपर्काचमनस्नान वसनाभरणानि च॥
गंधपुष्प धूपदीप नैवेद्यं चन्दनं तथा।

१. आसन, २. स्वागत, ३. अर्घ्य, ४. पाद्य, ५. आचमन, ६. मधुपर्क, ७. आचमन, ८. स्नान, ९. वस्त्र, १०. आभूषण, ११. गंध (चन्दन), १२. पुष्प (पत्र, माला सहित), १३. धूप, १४. दीप, १५. नैवेद्य और १६. चन्दन (करोद्वर्तन) ।

षोडशोपचार पूजन विधि मंत्र - क्या है ?
षोडशोपचार पूजन विधि मंत्र – क्या है ?

किन्तु मधुपर्क व आभूषण के कारण यह विधि ग्रहण नहीं की जाती है। षोडशोपचार पूजा के अन्य प्रकार भी कहे गये हैं – १. आवाहन, २. आसन, ३. पाद्य, ४. अर्घ्य, ५. आचमन, ६. स्नान, ७. वस्त्र, ८. यज्ञोपवीत, ९. गंध, १०. पुष्प, ११. धूप, १२. दीप, १३. नैवेद्य, १४. नमस्कार/ताम्बूल, १५. प्रदक्षिणा/आरती व प्रदक्षिणा, और १६. उद्वासन/पुष्पांजलि व नमस्कार

बृहत्पाराशरसंहिता से – आद्ययावाहयेद्देवमृचा तु पुरुषोत्तमम् । द्वितीययासनं दद्यात्पाद्यं चैव तृतीयया ॥ अर्घ्यश्चतुर्य्या दावव्यः पञ्चम्याऽचमनं तथा । पष्ठ्या स्नानं प्रकुर्वीत सप्तम्या वस्त्रधौतकम् ॥ यज्ञोपवीतं चाष्टम्या नवम्या गन्धमेव च । पुष्पं देवयं दशम्या तु एकादश्या च धूपकम् ॥ द्वादश्या दीपकं दद्यात्त्रयोदश्या निवेदनम् । चतुर्दश्या नमस्कारं पञ्चदश्या प्रदक्षिणाः ॥ पोडश्योद्वासनं कुर्याच्छेषकर्माणि पूर्ववत् । तच्च सर्वं जपेद्भूयः पौरुषं सूक्तमेव च ॥

यह भी वाजसनेयी षोडशोपचार पूजा विधि में चौदहवें व सोलहवें उपचार में थोड़ा परिवर्तित होता है जो रेखांकित किया गया है। यहाँ इसी विधि का अनुसरण किया जायेगा।

ध्यातव्य : जब समंत्र व सविधि पूजा करनी हो तो षोडशोपचार करें या पञ्चोपचार करें। ऐसी पूजा न करें जो न तो पञ्चोपचार हो, न हि षोडशोपचार या अन्य शास्त्रोक्त विधि।

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