पढ़ें बृहस्पतिकृत अग्नि स्तवन संस्कृत में – agni stotram

पढ़ें बृहस्पतिकृत अग्नि स्तवन संस्कृत में - agni stotram

अग्नि देव को हव्यवाहन कहा जाता है अर्थात यज्ञ में जो हवि प्रदान की जाती है वह अग्नि में ही दी जाती है एवं देवताओं तक अग्निदेव ही पहुंचाते हैं। पंचदेवता में अग्नि की गणना नहीं होती है किन्तु जब षड्देवता की चर्चा की जाती है तो अग्निदेव भी सम्मिलित हो जाते हैं और मिथिला में पंचदेवता की नहीं षड्देवता की पूजा होती है। इस प्रकार अग्निदेव की भी उपासना महत्वपूर्ण हो जाती है। अग्निदेव की उपासना में हमें अग्नि स्तवन अर्थात अग्नि स्तुति की भी आवश्यकता होती है। यहां महाभारतान्तर्गत बृहस्पतिकृत अग्नि स्तवन और सहदेव कृत अग्नि स्तुति (agni stotram) संस्कृत में दिया गया है।

महाभारतान्तर्गत सहदेव कृत अग्नि स्तुति

कर्मकांड विधि में शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रामाणिक चर्चा की जाती है एवं कई महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा पूर्व भी की जा चुकी है। तथापि सनातनद्रोही उचित तथ्य को जनसामान्य तक पहुंचने में अवरोध उत्पन्न करते हैं। एक बड़ा वैश्विक समूह है जो सनातन विरोध की बातों को प्रचारित करता है। गूगल भी उसी समूह का सहयोग करते पाया जा रहा है अतः जनसामान्य तक उचित बातों को जनसामान्य ही पहुंचा सकता है इसके लिये आपको भी अधिकतम लोगों से साझा करने की आवश्यकता है।

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