संपूर्ण कर्मकांड विधि

संपूर्ण कर्मकांड विधि

रुद्राष्टक स्तोत्र संस्कृत में अर्थ सहित – rudrashtak stotra

रुद्राष्टक स्तोत्र संस्कृत में अर्थ सहित – rudrashtak stotra

रुद्राष्टक स्तोत्र गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में वर्णित है। इस स्तोत्र का भक्ति पूर्वक पाठ करने से भगवान शिव शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं। इस आलेख में रुद्राष्टक स्तोत्र संस्कृत में दिया गया है साथ ही विशेष लाभ हेतु हिन्दी अर्थ भी दिया गया है।

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लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम् – lingashtakam stotram

लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम् – lingashtakam stotram

भगवान शिव को प्रसन्न करने वाले स्तोत्रों में से एक है लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम्। लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम् में कुल 8 मंत्र हैं जिसमें शिवलिङ्ग की स्तुति की गई है। यहां लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम्त्र अर्थ सहित दिया गया है।

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शिव पंचाक्षर स्तोत्र अर्थ सहित – shiv panchakshar stotra

शिव पंचाक्षर स्तोत्र अर्थ सहित – shiv panchakshar stotra

पंचाक्षर मंत्र भगवान शिव की पूजा के लिये सबसे महत्वपूर्ण मंत्र है और पंचाक्षर मंत्र के पांचों वर्णों द्वारा की गयी भगवान शिव की स्तुति जिसे पंचाक्षर स्तोत्र कहा जाता है भगवान शिव का सबसे महत्वपूर्ण स्तोत्र है। यहां पंचाक्षर स्तोत्र अर्थ सहित दिया गया है।

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भोले बाबा के भजन लिखित में – शिव भजन हिंदी

भोले बाबा के भजन लिखित में – शिव भजन हिंदी

भगवान शिव की अराधना के लिये वेद मंत्र, पौराणिक स्तोत्र आदि का तो महत्व है ही किन्तु भगवान शिव की अराधना में भजन का भी विशेष महत्व सिद्ध होता है। भगवान शिव के भजन को नचारी भी कहा जाता है।

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महाशिवरात्रि पूजन सामग्री लिस्ट

महाशिवरात्रि पूजन सामग्री लिस्ट

प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महाशिवरात्रि महोत्सव मनाया जाता है। महाशिवरात्रि व्रत 14 वर्षों तक करने का विधान बताया गया है। महाशिवरात्रि व्रत में दिन भर उपवास करके रात में भगवान शिव की विशेष पूजा-कथा की जाती है। महाशिवरात्रि के दिन विशेष पूजा का विधान है। यहां महाशिवरात्रि में उपयोगी पूजन सामग्री की वह लिस्ट दी जा रही है जो शिवालय में पूजा करने के लिये आवश्यक होती है।

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महाशिवरात्रि पूजा विधि और मंत्र- mahashivratri puja vidhi

महाशिवरात्रि पूजा विधि और मंत्र- mahashivratri puja vidhi

भगवान शिव और पार्वती का विवाह फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को हुआ था और इसी कारण इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है। महाशिवरात्रि व्रत १४ वर्षों तक करना चाहिए। इस व्रत में रात के चारों पहर भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाती है, रात्रिजागरण, नृत्य-गीत, मन्त्र जप, स्तोत्र पाठ आदि करना चाहिए।

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महाशिवरात्रि कब है - Mahashivratri kab hai

महाशिवरात्रि कब है ? Mahashivratri kab hai

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का आयोजन होता है। पञ्चाङ्गों के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 26 फरवरी 2025 बुधवार को मध्याह्न में 11 बजकर 08 मिनट पर होगा और अगले दिन यानी 27 फरवरी 2025 गुरुवार को पूर्वाह्न 8 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगी।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) राजनीतिक संगठन है या धार्मिक

जब नये धर्म-शास्त्रों का निर्माण करना चाहते हैं या धर्म-शास्त्रों में परिवर्तन करना चाहते हैं तो जनता को जो-जो शंकायें हों उन शंकाओं का निवारण भी तो करना होगा।

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स्वस्तिवाचन – चारों वेदों का – swastiwachan mantra

स्वस्तिवाचन – चारों वेदों का – swastiwachan mantra

स्वस्तिवाचन – चारों वेदों का – swastiwachan mantra : इस प्रकार यहां सम्पूर्ण स्वस्तिवाचन मंत्र (यजुर्वेदीय) के साथ-साथ ऋग्वेद स्वस्तिवाचन, सामवेद का स्वस्तिवाचन और अथर्ववेद का स्वस्तिवाचन भी संकलित किया गया जो बहुत सारे लोगों के लिये उपयोगी सिद्ध होगा।

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क्या स्त्री हवन कर सकती है ? हवन करने की विधि

क्या स्त्री हवन कर सकती है ? हवन करने की विधि

शास्त्रों द्वारा स्त्री को पति के द्वारा किये गये हवन में ही फल का भागी बताया गया है तो अलग से हवन करने की आवश्यकता ही सिद्ध नहीं होती और पतिहीन (विधवा) के लिये आचार्य का वरण करके हवन का नियम ज्ञात होता है।

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