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संपूर्ण कर्मकांड विधि

संपूर्ण कर्मकांड विधि

वृद्धि श्राद्ध विधि अर्थात आभ्युदयिक श्राद्ध विधि

वृद्धि श्राद्ध विधि अर्थात आभ्युदयिक श्राद्ध विधि

नान्दी श्राद्ध : आचमन, पवित्रीकरणादि करके गया, विष्णु भगवान एवं पितरों का ध्यान करे : ॐ श्राद्धकाले गयां ध्यात्वा ध्यात्वा देवं गदाधरं। मनसा च पितृन ध्यात्वा वृद्धिश्राद्धं समारभे॥ फिर संकल्प करे ।

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नान्दीमुख श्राद्ध विधि pdf सहित

नान्दी श्राद्ध – षोडश मातृका पूजन, सप्तघृत मातृका पूजन सहित

दाह संस्कार के अतिरिक्त सभी संस्कारों में नान्दीमुख श्राद्ध किया जाता है। इसके साथ ही यज्ञ, प्राण-प्रतिष्ठा आदि कर्मों में नान्दीश्राद्ध आवश्यक होता है। लेकिन जिस प्रकार पवित्रीकरण, संकल्प, सम्पूर्ण कर्मकाण्ड का अनिवार्य प्रारंभिक अंग होता है उस प्रकार से सभी कर्मों में अनिवार्य नहीं होता। जिस प्रकार कलश स्थापन सभी पूजा पाठ में आवश्यक होता है उस प्रकार से नान्दी श्राद्ध सभी शुभ कर्मों में अनिवार्य नहीं है। जैसे सत्यनारायण पूजा करनी हो तो नान्दी श्राद्ध आवश्यक नहीं है।

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भगवती स्तोत्र – जय भगवती देवी नमो वरदे लिखा हुआ

भगवती स्तोत्र – जय भगवती देवी नमो वरदे लिखा हुआ

जय भगवति देवि नमो वरदे, जय पापविनाशिनि बहुफलदे।
जय शुम्भनिशुम्भ कपालधरे, प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे॥१॥

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हिन्दू आतंकवाद और असहिष्णुता – क्या हिन्दुओं को अपना अस्तित्व त्याग देना चाहिये ?

जिसने हिन्दुओं के बड़े भू-भाग को हड़प लिया है वो असहिष्णु है या जिसका बड़ा भू-भाग हड़पा गया है वो असहिष्णु है ?
जिसने पारसियों के देश को हड़प लिया वो असहिष्णु है या जिसने पारसियों को शरण दिया वो असहिष्णु है ?
जिसने रक्तपात किया था वो असहिष्णु है या जिसका रक्त बहा वो असहिष्णु है ?

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क्या आप जानते हैं राम लला की प्राण प्रतिष्ठा बाल रूप में क्यों हुई ?

यहां दिये गये 14 प्रश्नों से ही ये स्पष्ट होता है कि राम लला की प्राण प्रतिष्ठा बाल रूप में क्यों हुई ? और हम यह आशा करते हैं कि सभी को इस प्रश्न का उत्तर मिल भी गया होगा।

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मंदिर मस्जिद विवाद में एक नये कानून की आवश्यकता है

हिन्दुओं ने गैर हिन्दुओं को या तो भीख में बड़े-बड़े भू-भाग दिया था या उन्होंने हड़प लिया। हिन्दुओं ने दिया है इसलिये हिन्दू का अधिकार स्वतः सिद्ध है।

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भवान्यष्टकम् संस्कृत – न तातो न माता

भवान्यष्टकम् संस्कृत – न तातो न माता

भगवती को प्रसन्न करने के लिये पूजा अनुष्ठानों में भवान्यष्टक बड़े भक्ति भाव से गाते देखा जाता है। इस स्तुति में भक्त स्वयं को सभी प्रकार से दीन-हीन होने की घोषणा करता है

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एकादशी उद्यापन की सामग्री – ekadashi udyapan samagri

एकादशी उद्यापन की सामग्री – ekadashi udyapan samagri

एकादशी उद्यापन की सामग्री – ekadashi udyapan samagri : दान सामग्री के संबंध में मुख्य नियम यही है कि यजमान का सामर्थ्य क्या है। यजमान से सामर्थ्य के अनुसार दान सामग्री में कमी भी हो सकती है और अधिक भी किया जा सकता है। यहां एक पुनरावृत्ति पुनः करना अपेक्षित है “एक दरिद्र यजमान यदि कुछ दान करने में समर्थ न हो तो मात्र ब्राह्मण भोजन कराकर भी उद्यापन कर सकता है।”

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दस महाविद्या स्तोत्र संस्कृत में

दस महाविद्या स्तोत्र संस्कृत में

दस महाविद्यायें वास्तव में आदिशक्ति का ही अवतार है और इन महाविद्याओं की शक्तियां ही सम्पूर्ण संसार को चलाती है। इन सब महाविद्याओं का प्रयोग ज्ञान और शक्ति को अर्जन के लिए किया जाता है। इन दस महाविद्या काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्तिका, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातङ्गी माता आदि के नाम से जानी जाती है।

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दुर्गा आपदुद्धारक स्तोत्र हिन्दी अर्थ सहित – durga apaduddharaka stotram

दुर्गा आपदुद्धारक स्तोत्र हिन्दी अर्थ सहित – durga apaduddharaka stotram

दुर्गा आपदुद्धार स्तोत्र सिद्धीश्वरीतंत्र में उमामहेश्वर संवाद के रूप में वर्णित है।
इसके पाठ से सभी प्रकार के आपदाओं का निवारण होता है।
प्राणीमात्र के लिये सबसे बड़ी आपदा जन्म-मृत्यु का बंधन है।
इसके साथ ही सांसारिक जीवन में भी कई प्रकार के आपत् देखे जाते हैं।
दुर्गा आपदुद्धार स्तोत्र का पाठ करना सांसारिक आपत् का भी निवारक है।

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