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यजुर्वेदीय पुरुषसूक्त – Purush Shuktam

पुरुषसूक्त – Purush Shuktam – 1

वेदों में वर्णित पुरुषसूक्त विशेष महत्वपूर्ण सूक्त है। पुरुषसूक्त के मंत्रों से सभी देवताओं की षोडशोपचार पूजा की जाती है। विष्णु यज्ञ, महा विष्णु यज्ञ, अतिविष्णु यज्ञों में पुरुष सूक्त के मंत्रों द्वारा ही आहुति दी जाती है।

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पवमान सूक्त – यजुर्वेदोक्त, विभिन्न यज्ञ, पूजा, पाठ आदि कर्मकांड के लिये विशेष महत्वपूर्ण सूक्त

पवमान सूक्त – यजुर्वेदोक्त, विभिन्न यज्ञ, पूजा, पाठ आदि कर्मकांड के लिये विशेष महत्वपूर्ण सूक्त

पवमान सूक्त यज्ञ में महत्वपूर्ण है। यह सामग्री को पवित्र करता है और जल प्रोक्षण में उपयोग होता है। ऋग्वेद में इसका वर्णन है। इसमें देवों की पूजा और अनुष्ठान का विवरण है।

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रक्षोघ्न सूक्त – ऋग्वेदोक्त, यजुर्वेदोक्त – रक्षोघ्न मंत्र

रक्षोघ्न सूक्त – ऋग्वेदोक्त, यजुर्वेदोक्त – रक्षोघ्न मंत्र

रक्षोघ्न सूक्त यजुर्वेद, ऋग्वेद, और अथर्ववेद में पाया जाता है और यज्ञ-पूजा में इसका प्रमुख उपयोग होता है। श्राद्ध में भी इसका पाठ किया जाता है, लेकिन यह पूजा-यज्ञ-अनुष्ठानों में भी होता है। इसे पितरों का मंत्र मानना एक भ्रम है।

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धान्याधिवास – प्राण प्रतिष्ठा विधि

धान्याधिवास – प्राण प्रतिष्ठा विधि

किसी भी प्रतिमा में देवता की प्राण प्रतिष्ठा करने से प्रतिमा को कई प्रकार की वस्तुओं में अधिवास कराया जाता है जिनमें से तीन प्रमुख अधिवास माने गये हैं :

१. जलाधिवास, २. धान्याधिवास और ३. शय्याधिवास

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जलाधिवास – जलाधिवास क्या होता है ? जलाधिवास मंत्र क्या है ?

जलाधिवास – जलाधिवास क्या होता है ? जलाधिवास मंत्र क्या है ?

“जलाधिवास” आलेख में प्राण-प्रतिष्ठा का महत्वपूर्ण अंग जलाधिवास के विषय में चर्चा करते हुए विधि और मंत्र बताया गया है। जलाधिवास का तात्पर्य शास्त्रीय विधि से एक निर्धारित समय तक जल में वास करना है। इससे प्राण प्रतिष्ठा करने की क्षमता बढ़ती है और दाहत्व का निवारण होता है। जलाधिवास करने की विधि में पूजा, मंत्र और संस्कारों का वर्णन किया गया है।

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अग्न्युत्तारण विधि – प्राण प्रतिष्ठा

अग्न्युत्तारण विधि – प्राण प्रतिष्ठा

प्रतिमा की प्राणप्रतिष्ठा से पहले अग्न्युत्तारण संस्कार किया जाता है। इस लेख में अग्न्युत्तारण मंत्र दिया गया है जो प्राण प्रतिष्ठा के लिए उपयोगी हैं। अग्न्युत्तारण के महत्वपूर्ण बिंदु और विधि तत्व बताए गए हैं। मंत्र पाठ और आहुति द्वारा इसे पूर्ण करने के लिए विस्तृत जानकारी दी गई है।

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वास्तु शांति पूजा विधि – गृह वास्तु, मंडपांग वास्तु

वास्तु शांति पूजा विधि – गृह वास्तु, मंडपांग वास्तु

वास्तु शांति पूजा विधि – गृह वास्तु, मंडपांग वास्तु ~ यदि नया घर बनाया गया हो तो वास्तु शांति की विधि सर्वविदित है।
यदि पुराना घर हो तो भी वास्तु शांति अपेक्षित होती है।
यदि पुराने घर के ऊपर या बगल में नया घर बनाया जाता है तो उसमें भी मुख्य रूप से वास्तु शांति ही कर्तव्य होता है।

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जलयात्रा विधान – शास्त्रोक्त विधि के अनुसार

जलयात्रा विधान – शास्त्रोक्त विधि के अनुसार

जल यात्रा, धार्मिक आयोजन के रूप में सूचीत की जाती है। इसमें कुमारी कन्याओं और सौभाग्यवती स्त्रियों के साथ नदी या जलाशय से जल ग्रहण करके यात्रा करते हुए देवी-देवताओं के पूजन का कार्य होता है। इसके लिए शास्त्रों की विधि का पालन किया जाता है। यह एक पवित्र तीर्थ यात्रा के रूप में मानी जाती है।

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प्राण प्रतिष्ठा विधि - विधि-विधान की सम्पूर्ण जानकारी

प्राण प्रतिष्ठा विधि – विधि-विधान की सम्पूर्ण जानकारी

इस आलेख में सर्व देव प्राण प्रतिष्ठा विधि की विस्तृत जानकारी दी गयी है। मातृकादि पूजन पूर्वक आरंभ, संकल्प मंत्र, जलयात्रा, नेत्रोन्मीलन, अग्न्युत्तारण, जलाधिवास, धान्याधिवास, शय्याधिवास, वेदी पूजन, हवन आदि सभी विषयों की विस्तृत विधि का वर्णन करते हुये सबके लिंक भी दिये गये हैं।

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सरस्वती चालीसा

सरस्वती चालीसा

जो संस्कृत स्तोत्र आदि का पाठ न कर सकें उनके लिये चालीसा पाठ करना सरल और लाभकारी भी होता है। यहाँ सरस्वती चालीसा हिंदी में लिखा हुआ दिया जा रहा है जिसे पाठ करके माता सरस्वती की कृपा प्राप्त की जा सकती है। सरस्वती चालीसा आरती हिन्दी में दोनों दिया गया है।

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