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सिद्ध सरस्वती स्तोत्र

सिद्ध सरस्वती स्तोत्र

विद्यार्थियों के लिये विद्या प्राप्ति हेतु एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है सिद्ध सरस्वती स्तोत्र। सिद्ध सरस्वती स्तोत्र श्री सनत्कुमान संहिता में वर्णित है। भक्तिभाव से जो मनुष्य (विद्यार्थी) प्रतिदिन उषाकाल में सिद्ध सरस्वती स्तोत्र का पाठ करता है उसे वाणी का वैभव प्राप्त होता है, वाक्पटु और मुक्तकंठ हो जाता है।

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सरस्वती पूजा विधि मंत्र सहित - saraswati puja vidhi

सरस्वती पूजा विधि मंत्र सहित ~ Saraswati Puja Vidhi

सरस्वती पूजा विधि मंत्र सहित ~ Saraswati Puja Vidhi : इस लेख में, हम आपको माता सरस्वती की पूजा विधि और मंत्रों के बारे में बताएँगे। विद्या की देवी सरस्वती की पूजा के दिन मंदिर, मंडप, विद्यालय में पूजा की जाती है और जहाँ भी विशेष पूजा हो, वहां लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा भी स्थापित की जाती है।

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22 या 23 जनवरी? जानें 2026 में सरस्वती पूजा की सही तिथि और सटीक शुभ मुहूर्त।

22 या 23 जनवरी? जानें 2026 में सरस्वती पूजा की सही तिथि और सटीक शुभ मुहूर्त।

22 या 23 जनवरी? जानें 2026 में सरस्वती पूजा की सही तिथि और सटीक शुभ मुहूर्त : जानें बसंत पंचमी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और शास्त्रीय महत्व। माँ सरस्वती की कृपा पाने के लिए राशि अनुसार उपाय और विशेष मंत्रों की पूरी जानकारी यहाँ विस्तार से दी गई है।

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वारवेला क्या है , काल वेला का अर्थ, अर्द्ध प्रहर विचार

वारवेला क्या है ? काल वेला का अर्थ, – अर्द्ध प्रहर विचार .

अर्द्धप्रहर क्या है, कालवेला क्या है, वारवेला क्या है, कालरात्रि क्या है, अर्द्धप्रहर कैसे ज्ञात करते हैं इत्यादि विषय इस आलेख में समाहित किये गये हैं।

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भद्रा वास विचार

भद्रा क्या है ? भद्रा कैसे देखते हैं – भद्रा वास विचार

भद्रा के तीनों परिहार दो कार्यों का त्याग करके ही किया जाता है। परिहार का विचार रक्षाबंधन और होलिका दहन में नहीं किया जा सकता। होलिका दहन रात्रि में ही किया जाना होता है अतः यदि भद्रारहित काल न मिले तो होलिका में भी पुच्छ भाग वाला परिहार ग्राह्य होता है।

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शिववास विचार

शिववास विचार – शिव वास देखने का नियम , फल और परिहार।

मुख्य रूप से जब शिव का प्रथम आवाहन करना होता है तब शिववास का विचार करना आवश्यक होता है तथापि बहुत विद्वान रुद्राभिषेक के लिये भी शिववास विचार करने का मत व्यक्त करते हैं।

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नामकरण कैसे करें ? नामकरण संस्कार

नामकरण कैसे करें ? नामकरण संस्कार

सूतिका को पंचगव्य प्राशन करा दे।
फिर पूर्व बताई विधि के अनुसार बालक को लेकर सूतिका पूजा स्थान पर आये।
बालक को गोद में ली हुई माता अग्नि की प्रदक्षिणा करके संस्कारकर्ता के बांयी ओर बैठे ।
आचमन करके पूजित देवताओं का स्मरण करके पुष्पांजलि दे।
फिर आचार्य अथवा बालक का पिता स्वर्ण शलाका से अष्टगंधादि द्रव्य का द्वारा पीपल के पांच पत्ते या श्वेत वस्त्र पर बच्चे के लिये निर्धारित पंचनाम लिखे।
फिर पंचनामों को तण्डुलपूर्ण पात्र में रखकर अक्षत-पुष्पादि लेकर उसकी प्रतिष्ठा करे :

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बिना पंडित के हवन कैसे करें

बिना पंडित के हवन कैसे करें

हवन का जो सबसे महत्वपूर्ण तथ्य वो यह है कि मात्र एक हवन जिसे नित्य होम कहा जाता है और नित्य होम करने वाले को अग्निहोत्री कहा जाता है, उस नित्य होम को छोड़कर अन्य कोई भी हवन बिना ब्राह्मण के नहीं हो सकता।

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अग्निवास

अग्नि वास चार्ट 2024

यहां अग्नि वास चार्ट 2024 दिया जा रहा है जिसके द्वारा बिना किसी गणितीय क्रिया के अग्निवास की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

यह हवन करने वालों के लिये बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकता है।

साथ ही यदि आप सभी महीनों के अग्नि वास चार्ट 2024 pdf फाइल डाउनलोड करना चाहें तो डाउनलोड भी कर सकते हैं।

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अग्निवास विचार - Agnivas Vichar

अग्निवास विचार – Agnivas Vichar

अग्निवास (agnivas) का मतलब है की कर्मकांड के परिप्रेक्ष्य में सूक्ष्म रूप से अग्नि पृथ्वी, पाताल और आकाश में वास किया करते हैं, जिसका निर्धारण विशेष ज्योतिषीय गणना द्वारा किया जाता है। अग्नि जब भूमिवास में हों तभी हवन करना चाहिये।

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