भूमि पूजन मुहूर्त 2024 – गृहारम्भ मुहूर्त
जब भी घर का निर्माण करना होता है तो निर्माण से पूर्व अनेकानेक विचार करके फिर गृहारंभ का मुहूर्त बनाया जाता है। मुहूर्त निर्धारण तो पंचांगकर्ता ज्योतिर्विद ही किया करते हैं और पंचांगों में अंकित करते हैं।
कर्मकांड में पूजा, पाठ, जप, हवन, शांति, संस्कार, श्राद्ध आदि सभी प्रकरण समाहित हो जाते हैं। कर्मकांड विधि द्वारा इन सभी कर्मकांड पूजा पद्धति से संबंधित विधि और मंत्रों का यहाँ पर्याप्त संग्रहण उपलब्ध है – karmkand
जब भी घर का निर्माण करना होता है तो निर्माण से पूर्व अनेकानेक विचार करके फिर गृहारंभ का मुहूर्त बनाया जाता है। मुहूर्त निर्धारण तो पंचांगकर्ता ज्योतिर्विद ही किया करते हैं और पंचांगों में अंकित करते हैं।
पुण्याहवाचन विधि : प्रत्येक विशेष पूजा-अनुष्ठान, मंगलकार्य आदि में पुण्याहवाचन का विशेष विधान किया गया है। ब्राह्मणों ईश्वर का मुख बताया गया है और ब्राह्मण के वचन का विशेष महत्व होता है। ब्राह्मण के वचन के ही व्रत-पूजा आदि की पूर्णता भी होती है। इसी क्रम में कल्याण कामना हेतु ब्राह्मणों से कल्याणकारी वचन प्राप्त करना पुण्याहवाचन कहलाता है।
जब किसी नये वर-वधू का विवाह होता है तो विवाहोपरांत वधू विदा होती है और वर के घर जाती है। वर के घर में जब वधू प्रथम बार प्रवेश करती है तो उसे वधू प्रवेश कहा जाता है। वधू प्रवेश के लिये भी मुहूर्त का विधान है तथापि विवाह से 16 दिनों तक वधूप्रवेश हेतु मुहूर्त बनाने की आवश्यकता नहीं होती है।
भूमि पूजन किस दिशा में करें – खात की दिशा कैसे ज्ञात करें : फाल्गुन, चैत्र, वैशाख – वायव्य कोण
ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण – नैऋत्यकोण
भाद्र, आश्विन, कार्तिक – अग्निकोण और
मार्ग, पौष, माघ – ईशानकोण में खात को प्रशस्त बताया जाता है।
अन्य किसी विधि-व्यवस्था में अपेक्षित व्यक्ति के बिना करने की चर्चा नहीं की जाती है किन्तु सनातन में लगभग सभी कर्मकांड बिना पंडित के करने के लिये प्रेरित किया जा रहा है। नाना प्रकार के आलेख-विडियो आदि माध्यमों से उत्प्रेरित करते हुये ऐसा प्रयास किया जाता है कि कर्मकांड बिना पंडित कैसे कैसे किया जा सकता है
गृह प्रवेश के नियम – गृह प्रवेश पूजा विधि की 21 महत्वपूर्ण बातें : इसके साथ ही गृहप्रवेश के संबंध में भी कई महत्वपूर्ण बातें होती हैं जो सामान्य जन नहीं जान पाते। यहां गृहप्रवेश से संबंधित 21 महत्वपूर्ण बातें बताई गयी है जो गृहप्रवेश करने से पहले जानना आवश्यक होता है।
गृह प्रवेश पूजा विधि – Grihpravesh vidhi :गृहप्रवेश की संपूर्ण विधि एवं मंत्रों का इस आलेख में वर्णन किया गया है एवं गृहप्रवेश से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर भी दिये गये हैं। इस आलेख में गृह प्रवेश करने की संपूर्ण पूजा और विधि समाहित की गयी है साथ इसे डाउनलोड करके अधिक सुविधा पाने के लिये गृह प्रवेश पद्धति pdf file भी अंत में दिया गया है। जो विषय (लेख/विधि) पूर्व प्रकाशित है वह नीले रंग में रेखांकित किया गया है जिसमें उसका लिंक समाहित है और अनुगमन को आसान करता है।
गृह प्रवेश पूजा सामग्री : सामान्यतया व्यवहार में गृहप्रवेश करने के बाद पूजा आदि करते हुये देखा जाता है। किन्तु यहां ऐसा माना गया है कि गृह प्रवेश के लिये शास्त्रानुसार एक मंडप निर्माण करके पूजा आदि किया जाना चाहिये और उसी के अनुसार सामग्री का विचार किया गया है।
भूमि पूजन विधि – गृहारंभ विधि पूजन मंत्र सहित : जब किसी नये घर का निर्माण आरंभ करते हैं तो उसके लिये जो पूजा की जाती है उसे गृहारंभ या भूमि पूजन कहा जाता है। गृहारंभ का सर्वप्रथम शुभ मुहूर्त बनवाया जाता है तत्पश्चात गृहारंभ सामग्रियां व्यवस्थित की जाती है फिर शुभ मुहूर्त में भूमि-वास्तु आदि पूजन करके गृहारंभ किया जाता है।
भूमि पूजन सामग्री अर्थात गृहारंभ पूजन सामग्री : आवास गृहस्थों की अनिवार्य आवश्यकता है। पैतृक आवास कितना भी सुदृढ़ हो उसमें दो पीढ़ी का निवास करना भी असंभव सा ही होता है। घर बनाने से पूर्व गृहारंभ की विशेष विधि बताई गयी है। इस आलेख में गृहारंभ सामग्रियों की सूची दी गई है।