दुर्गा पूजा विधि मंत्र सहित

दुर्गा पूजा विधि मंत्र सहित

त्रिकुशा-पान-सुपारी-पुष्प-चंदन-तिल-जल-द्रव्य इत्यादि दाहिने हाथ में लेकर अगले मंत्र को पढ़ें ।

संकल्प मंत्र :- ॐ अद्यैतस्य ब्रह्मणोह्नि द्वितीय परार्द्धे श्री श्वेत वाराह कल्पे वैवस्वत मन्वंतरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे प्रथम चरणे मासानां मासोत्तमे …………. मासे …………. पक्षे ………….. तिथौ …………. वासरे …………. गोत्रस्य ………… मम श्री …………. शर्मणः सपरिवारस्योपस्थित शरीराविरोधेन महाभयाभावपूर्वक विपुलधन धान्य सुतान्विताऽतुल विभूति चतुर्वर्ग फलप्राप्तिपूर्वक सर्वाऽरिष्ट निवारणार्थं सकल मनोरथ सिद्ध्यर्थं श्रीदुर्गायाः प्रीत्यर्थं साङ्गसायुधसवाहनसपरिवारायाः भगवत्याः श्रीदुर्गादेव्याः पूजनमहं करिष्ये ।

तत्पश्चात् संकल्प करें। संकल्प करने के बाद कलश स्थापन, पूजन, नवग्रह दशदिक्पालादि पूजन कर लें। नवग्रह मंडल बनाने की अनिवार्यता नहीं होती। विभिन्न वेदियां तब अनिवार्य होती है जब विस्तृत हवन करना हो । यहां पर विस्तृत हवन अनिवार्य नहीं है अतः केवल सर्वतोभद्र मंडल बनाना हो तो बना सकते हैं, सर्वतोभद्र मंडल की भी अनिवार्यता नहीं है। कलश पर ही सभी देवताओं का आवाहन पूजन किया जा सकता है।

यदि दुर्गा प्रतिमा हो तो ही अलग से सर्वतोभद्र मंडल बनाकर उसपर माता दुर्गा की पूजा की जाएगी। अथवा अष्टदल बनाकर भी स्थापित किया जा सकता है और अष्टदल पर ही नवग्रह दशदिक्पालादि की पूजा भी की जा सकती है। यदि कलश पर ही सभी देवताओं की पूजा करनी हो तो कलश स्थापन विधि के अनुसार स्थापित करते हुए प्राण-प्रतिष्ठा मंत्र में परिवर्तन करें ।

सभी देवताओं की कलश पर पूजा करने के लिये प्राण-प्रतिष्ठा मंत्र :- ॐ मनो जूतिर्ज्जुषतामाज्ज्यस्य बृहस्पतिर्य्यज्ञमिमं तनोत्वरिष्टं य्यज्ञᳪ समिमं दधातु। विश्वे देवासऽइह मादयन्तामों३ प्रतिष्ठ ॥ कलशे वरुणाद्यावाहितदेवता: सुप्रतिष्ठिता: वरदा: भवन्तु ॥ ॐ विनायकादि पञ्चदेवता नवदुर्गा नवचण्डिका नवग्रह दशदिक्पाल वाहन अस्त्रादि देवता सहित साङ्गसायुधसवाहनसपरिवार भुर्भुवः स्वः श्री दुर्गे इहागच्छ इहतिष्ठ॥ इह सन्निधेहि सन्निधेहि, अत्राधिष्ठानं कुरु कुरु, मम सर्वोपचारसहितां पूजां गृहाण-गृहाण स्वाहा॥

फिर – ॐ शांति कलश इहागच्छ इहतिष्ठ से कलश की प्राण प्रतिष्ठा करके ॐ शान्तिकलशाय नमः मंत्र से कलश पूजन करें।

पुष्पांजलि मंत्र – ॐ शांतिकुम्भ महाभाग सर्वकामफलप्रद। पुष्पं गृहाण शुभं यच्छ देवाधार नमोऽस्तुते॥ तत्पश्चात् गणपति का आवाहन करें :-

ॐ गणानान्त्वा गणपतिᳪ हवामहे प्रियाणान्त्वा प्रियपतिᳪ हवामहे निधीनान्त्वा निधिपतिᳪ हवामहे व्वसो मम। आहमाजानि गर्ब्भधमात्वमजासि गर्ब्भधम् ॥ कलशाधिष्ठित गणेश इहागच्छ इहतिष्ठ। फिर इस मंत्र से पूजा करें – ॐ शांतिकलशाधिष्ठित गणेशाय नमः॥

पुष्पाञ्जलि मंत्र – ॐ एकदन्तं महाकायं लम्बोदर गजाननं । विघ्न-विनाशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यऽहं ॥ तत्पश्चात् वरुण का आवाहन पूजन करें –

ॐ वरुणस्योत्तम्भनमसि वरुणस्य स्कम्भसर्जनी स्त्थो वरुण्स्य ऽऋतसदन्न्यसि वरुणस्य ऽऋतसदनमसि वरुणस्यऽऋत सदनमासीद् ॥ वरुण पूजा मंत्र – ॐ शांति कलशस्थ वरुणाय नमः॥

पुष्पांजलि मंत्र – ॐ नमो नमस्ते स्फटिकप्रभाय सुश्वेतहाराय सुमंगलाय। सुपाशहस्ताय झषासनाय जलाधिनाथाय नमो नमस्ते॥ तत्पश्चात् ब्रह्म पूजा करे –

ॐ आब्रह्मन् ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायतामाराष्ट्रे राजन्यः शूरऽइषव्योऽतिव्याधी महारथो जायतां दोग्ध्री धेनुर्वोढ़ाऽनड्वानाशुः सप्तिः पुरन्धिर्योषा जिष्णू रथेष्ठाः सभेयो युवास्य यजमानस्य वीरो जायतां निकामे-निकामे नः पर्जन्यो वर्षतु फलवत्यो नऽओषधयः पच्यन्तां योगक्षेमो नःकल्पताम् ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः ब्रह्मन् इहागच्छ इहतिष्ठ॥ इसके बाद बिना मंत्रोच्चार के ही ब्रह्मपूजन करें ।

पुष्पांजलि मंत्र – ॐ पद्मयोनिश्चतुर्मूर्तिर्वेदवासाः पितामहः । यज्ञाध्यक्षश्चतुर्वक्त्रः तस्मै नित्यं नमो नमः॥

तत्पश्चात् प्रधान पूजा अर्थात् भगवती दुर्गा की पूजा करे ।

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2 thoughts on “दुर्गा पूजा विधि मंत्र सहित

  1. नवरात्र के आखरी दिन पर हवन कराने का मंत्र?
    चाहिए ।

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