रक्षाबंधन सनातनियों का एक प्रमुख पर्व है जो विशेष पवित्रता के साथ मनाया जाता है। सनातन पर वैचारिक प्रहार का एक जीवंत उदाहरण भी है जिसमें ऐसा प्रयास किया गया है कि जिन पापियों से व्रत-पर्वों पर वार्तालाप भी नहीं करनी चाहिये उसके साथ भी रक्षाबंधन का त्यौहार मनाने के लिये प्रेरित किया जाने लगा है और शहरों में तो देखा भी जाता है। मंत्र पूर्णरूप से राजा बलि से संबद्ध सिद्ध करता है किन्तु विचार थोपने वाले मुगल आक्रांताओं से जोड़कर बताते रहते हैं। यहां रक्षाबंधन 2024 मनाने से संबद्ध शास्त्रोक्त तथ्य प्रस्तुत किया गया है।
रक्षाबंधन निर्णय 2024 : रक्षाबंधन कब करें विस्तृत जानकारी
रक्षाबंधन मंत्र : ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः । तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥
यहां हम 2024 में रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त संबंधी चर्चा करेंगे यद्यपि अधिक विवाद की संभावना नहीं है तथापि दृश्य और अदृश्य पञ्चाङ्गानुसार थोड़ा बहुत अंतर तो अवश्य ही होता है। रक्षाबंधन में मुख्य विषय भद्रा का विचार होता है, यदि भद्रा विचार की आवश्यकता न हो तो सामान्य रूप से ही निर्णय लिया जा सकता अधिक विवाद का मुख्य कारण भद्रा विचार ही है। इस विषय में हम दृश्य पञ्चाङ्गानुसार ही चर्चा करेंगे।
दृश्य पञ्चाङ्गानुसार पूर्णिमा 18 अगस्त 2024 रात्र्यंत 3:04 बजे आरंभ होती है और पूर्णिमा के साथ ही भद्रा का आरंभ भी होता है जो अर्द्धतिथि तक रहती है। 19 अगस्त 2024 सोमवार को सूर्योदय काल से ही पूर्णिमा व भद्रा वर्त्तमान रहती है, पूर्णिमा रात्रि 11:55 को समाप्त होती है व भद्रा की समाप्ति मध्याह्न 1:32 बजे होती है।
यद्यपि अन्य दिनों दृश्य व अदृश्य पंचांगों में तिथ्यादि मानों में बहुत अंतर भी देखा जाता है तथापि 19 अगस्त 2024 सोमवार को भद्रा के विषय में अधिक अंतर नहीं देखने को मिल रहा है, अदृश्य पंचांगों में भी लगभग यही समय दिया गया है। कुछ मिनट का अंतर ही देखने को मिल सकता है और ये अच्छी बात है कि दोनों आधार से लगभग डेढ़ बजे के बाद का समय ही ज्ञात होता है।
भद्रा परिहार का विचार
वैसे भद्रा के विषय में नियम है जो भद्रावास है और भद्रा वास जहां हो फलद भी वहीं के लिये होती है : कुम्भ कर्कद्वये मर्त्य स्वर्गेऽब्जेऽजात्त्रयेऽलिगे । स्त्रीधनुर्जूकनक्रेऽधो भद्रा तत्रैव तत्फलम् ॥
- कुम्भ, मीन, कर्क और सिंह राशि में चन्द्रमा हों तो भद्रा मनुष्य-लोक (मर्त्यलोक) में स्थित रहती है ।
- मेष, वृष, मिथुन और वृश्चिक में चन्द्रमा विद्यमान रहे तो स्वर्ग में एवं
- कन्या, धनु, तुला व मकर राशि के चन्द्रमा हो तो भद्रा पाताल-लोक में वास करती है ।
- भद्रा का जिस लोक में वास हो उसका फल भी उसी लोक में प्रभावी होता है।
इस वर्ष रात्रि 6:59 तक चन्द्रमा मकर राशि में स्थित है जिस कारण भद्रा का वास पाताल में सिद्ध होता है।
इसी प्रकार भद्रा के सबंध में एक अन्य तीसरा परिहार मुख-पुच्छ विचार भी बताया गया है और अंत की तीन घाटियों को पुच्छ कहा गया है। भद्रा पुच्छ को कार्यसिद्धिकारक भी बताया गया है : पृथिव्यां यानि कर्माणि शुभान्यप्यशुभानि वा । तानि सर्वाणि सिद्ध्यन्ति विष्टिपुच्छे न संशयः ॥ भद्रा मुख को विशेष रूप से त्याज्य कहा गया है।
पूर्णिमा के पूर्वार्द्ध में भद्रा होती है अतः दिवा भद्रा होती है और दिवा भद्रा दिन में पड़े तो त्याज्य होती है तथापि इस विचार से होलिका की रात्रि में पड़ने वाली भद्रा तो त्याज्य नहीं होती क्योंकि दिवा भद्रा रात्रि में व रात्रि भद्रा दिन में तो शुभद ही बताई गयी है : दिवा भद्रा यदा रात्रौ, रात्रि भद्रा यदा दिने। न तत्र भद्रा दोषस्तु सा भद्रा भद्रदायिनी॥
रक्षाबंधन में भद्रा परिहार का विचार करें या न करें
उपरोक्त तीन प्रकार के परिहार भद्रा के संबंध में मिलते हैं और जब भद्रा अधिक काल तक रहे जैसे रक्षाबंधन में लगभग दिन भर या होलिका में लगभग रात के अंत तक तो बहुत सारे विद्वान भी परिहार का विचार करने लगते हैं और इस वर्ष भी विचार करने लगें तो कोई बड़ी बात नहीं होगी।
किन्तु भद्रा के परिहार संबंधी जो तीनों नियम हैं वो अन्य सभी कार्यों के लिये विचारणीय हैं रक्षाबंधन व होलिका के संबंध में विचारणीय नहीं क्योंकि अन्य कार्यों के लिये परिहार बताने के पश्चात् भी रक्षाबंधन व होलिका का विशेष रूप से भद्रा में निषेध किया गया है : भद्रायां द्वे न कर्तव्ये, श्रावणी फाल्गुनी तथा । श्रावणी नृपतिं हन्ति, ग्रामं दहति फाल्गुनी ॥
होलिका में जो भद्रा होती है वो दिवा भद्रा होती है और होलिका रात्रि में होती है अतः रात में तो दिवा भद्रा का स्वतः परिहार हो जाता है फिर निषेध क्यों किया गया ? रक्षाबंधन व होलिका के लिये भद्रा का विशेष रूप से निषेध करने का तात्पर्य यही है कि इसमें किसी प्रकार के परिहार का विचार न करे, पूर्ण त्याग करे।
निष्कर्ष : इस प्रकार यह सिद्ध होता है कि रक्षाबंधन व होलिका में भद्रा का पूर्ण त्याग करना चाहिये बिना किसी परिहार का विचार किये। चूंकि 19 अगस्त 2024 को भद्रा की समाप्ति 1:32 बजे मध्याह्न में हो रही है अतः मध्याह्न 1:32 के पश्चात् ही रक्षाबंधन करना चाहिये।
कर्मकांड विधि में शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रामाणिक चर्चा की जाती है एवं कई महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा पूर्व भी की जा चुकी है। तथापि सनातनद्रोही उचित तथ्य को जनसामान्य तक पहुंचने में अवरोध उत्पन्न करते हैं। एक बड़ा वैश्विक समूह है जो सनातन विरोध की बातों को प्रचारित करता है। गूगल भी उसी समूह का सहयोग करते पाया जा रहा है अतः जनसामान्य तक उचित बातों को जनसामान्य ही पहुंचा सकता है इसके लिये आपको भी अधिकतम लोगों से साझा करने की आवश्यकता है।