सूर्य कवच स्तोत्र – surya kavach stotra

सूर्य कवच स्तोत्र - surya kavach stotra

भगवान सूर्य की अराधना-उपासना करनी हो, पूजा-यज्ञादि हो अथवा सूर्य ग्रह शांति, अशुभ फल निवारण, शुभ फल प्राप्ति आदि का विषय हो, सदा सूर्य कवच स्तोत्र के पाठ की भी आवश्यकता होती है। यहां भगवान सूर्य के 1 नहीं 4 कवच स्तोत्र दिये गये हैं जिनमें से आपको जिस कवच का पाठ करना हो उसका चयन कर सकते हैं।

सर्वप्रथम ब्रह्मयामलोक्त त्रैलोक्यमङ्गल नामक सूर्यकवच दिया गया है तत्पश्चात स्कंदपुराणोक्त आदित्यकवच, तत्पश्चात श्रीहिरण्यगर्भसंहितोक्त श्रीसूर्यनारायण दिव्य कवचस्तोत्र और अंत में रुद्रयामलोक्त वज्रपञ्जराख्य सूर्यकवच दिया गया है।

त्रैलोक्यमङ्गल नामक सूर्यकवच – ब्रह्मयामलोक्त

स्कंदपुराणोक्त आदित्यकवच

श्रीहिरण्यगर्भसंहितोक्त श्रीसूर्यनारायण दिव्य कवचस्तोत्र

रुद्रयामलोक्त वज्रपञ्जराख्य सूर्यकवच

कर्मकांड विधि में शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रामाणिक चर्चा की जाती है एवं कई महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा पूर्व भी की जा चुकी है। तथापि सनातनद्रोही उचित तथ्य को जनसामान्य तक पहुंचने में अवरोध उत्पन्न करते हैं। एक बड़ा वैश्विक समूह है जो सनातन विरोध की बातों को प्रचारित करता है। गूगल भी उसी समूह का सहयोग करते पाया जा रहा है अतः जनसामान्य तक उचित बातों को जनसामान्य ही पहुंचा सकता है इसके लिये आपको भी अधिकतम लोगों से साझा करने की आवश्यकता है।

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