सूर्य नमस्कार मंत्र – surya namaskar mantra
सूर्य नमस्कार क्या है : भगवान सूर्य को नमस्कार विशेष प्रिय कहा गया है। प्रतिदिन अर्घ्यदान तो महत्वपूर्ण है ही किन्तु नमस्कार की विशेष महत्ता है। नमस्कार प्रियो भानुः जलधारा शिवप्रियः । अलंकार प्रियः कृष्ण ब्राह्मणो मधुर प्रियः॥ सूर्य को नमस्कार, शिव को जल, कृष्ण को अलंकार और ब्राह्मण को मधुर प्रिय होता है।
सूर्य को नमस्कार प्रिय है इसलिये लिये नमस्कार का प्रयोग सूर्य के साथ ही किया जाता है। इसका तात्पर्य ये नहीं की अन्य देवताओं को नमस्कार नहीं किया जाता है किन्तु नमस्कार शब्द का प्रयोग सूर्य के साथ ही किया जाता है। सूर्य नमस्कार का विशेष महत्व समझने के लिये इस आलेख को भी पढ़ सकते हैं : दण्ड क्या है ? दण्ड का उद्देश्य क्या है?
सूर्य नमस्कार का मंत्र सभी को जानना आवश्यक है क्योंकि सूर्य को प्रतिदिन नमस्कार करना चाहिये। वैसे योग में भी सूर्य नमस्कार करने की एक विशेष विधि है। सूर्य नमस्कार करने का मंत्र है : ॐ आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिनेदिने। जन्मान्तरसहस्रेषु दारिद्रयं नोपजायते॥
सूर्य नमस्कार का विशेष महत्व : उपरोक्त नमस्कार मंत्र से ही स्पष्ट होता है कि जो प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते हैं उनको जन्म-जन्मांतर तक दरिद्रता नहीं सताती।
ब्रह्मपुराणोक्त सूर्य एकविंशतिनाम स्तोत्र
विकर्तनो विवस्वांश्च मार्तण्डो भास्करो रविः।
लोकप्रकाशकः श्रीमान् लोक चक्षुर्महेश्वरः॥
लोकसाक्षी त्रिलोकेशः कर्त्ता हर्त्ता तमिस्रहा।
तपनस्तापनश्चैव शुचिः सप्ताश्ववाहनः॥
गभस्तिहस्तो ब्रह्मा च सर्वदेवनमस्कृतः।
एकविंशतिरित्येष स्तव इष्टः सदा रवेः॥

भगवान सूर्य के 21 नाम : ‘विकर्तन, विवस्वान, मार्तण्ड, भास्कर, रवि, लोकप्रकाशक, श्रीमान, लोकचक्षु, महेश्वर, लोकसाक्षी, त्रिलोकेश, कर्ता, हर्त्ता, तमिस्राहा, तपन, तापन, शुचि, सप्ताश्ववाहन, गभस्तिहस्त, ब्रह्मा और सर्वदेव नमस्कृत- इस प्रकार इक्कीस नामों का यह स्तोत्र भगवान सूर्य को सदा प्रिय है।’