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करम प्रधान विश्व करि राखा का मूल तात्पर्य क्या है ? – karm pradhan vishwa kari rakha

सत्तालोलुप समूह, षड्यंत्रकारी आदि अपने ही कुतर्कों के जाल में किस प्रकार फंसते हैं इसे इस प्रकार से समझा जा सकता है : आज के समय में वर्णव्यवस्था का महत्व नहीं है ।

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राष्ट्रहित सर्वोपरि मानकर राष्ट्र की सुरक्षा के लिये सेना को विशेषाधिकार की आवश्यकता है

एक गंभीर प्रश्न है कि जब सत्ता एवं विपक्ष की राजनीतिक लड़ाई चल रही हो और संविधान का संरक्षक मूकदर्शक बन जाये तो खतड़े में पड़ी राष्टीय सुरक्षा व आम नागरिकों के मौलिक अधिकार को कौन बचायेगा ?

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वर्ण व्यवस्था की उत्पत्ति के सिद्धांत

वर्ण व्यवस्था की उत्पत्ति के सिद्धांत – जन्म से या कर्म से

वर्ण व्यवस्था की उत्पत्ति के सिद्धांत – जन्म से या कर्म से : आज के भारत में वर्ण और जाति का आधार क्या है, इसका निर्णय अब शास्त्र और शास्त्रार्थ से नहीं होगा, जैसे सारे निर्णय राजनीतिक होते हैं उसी तरह वर्ण और जाति का निर्णय भी राजनीति से किया जाएगा धर्मशास्त्रों और प्रमाणों से नहीं। अथवा ये निर्णय आर्यसमाजी करेगा जो स्वयं धर्म-शास्त्रों को नहीं मानता या केवल उतना मानता है जितना प्रचार-प्रसार के लिये अर्थात अस्तित्व के लिये आवश्यक है।

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देश का विकास और शांति के लिये चाहिये एक नया कानून – जैसे को तैसा …

वास्तविक न्याय भी उसी को कहा जा सकता है जिसका मूल सिद्धांत “जैसे को तैसा” हो। न्याय तंत्र का ध्येय ये होना कि अपराध होने के बाद ही हम सक्रिय होंगे लेकिन अपराध रोकने के लिये हम सक्रिय नहीं हो सकते और सरकार/प्रशासन/समाज सबके हाथ भी बांध देंगे ताकि अपराध हो जिससे हमारा (न्याय तंत्र) औचित्य, प्रभाव, शक्ति बढ़ता जाये उचित नहीं है।

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हिन्दू आतंकवाद और असहिष्णुता – क्या हिन्दुओं को अपना अस्तित्व त्याग देना चाहिये ?

जिसने हिन्दुओं के बड़े भू-भाग को हड़प लिया है वो असहिष्णु है या जिसका बड़ा भू-भाग हड़पा गया है वो असहिष्णु है ?
जिसने पारसियों के देश को हड़प लिया वो असहिष्णु है या जिसने पारसियों को शरण दिया वो असहिष्णु है ?
जिसने रक्तपात किया था वो असहिष्णु है या जिसका रक्त बहा वो असहिष्णु है ?

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मंदिर मस्जिद विवाद में एक नये कानून की आवश्यकता है

हिन्दुओं ने गैर हिन्दुओं को या तो भीख में बड़े-बड़े भू-भाग दिया था या उन्होंने हड़प लिया। हिन्दुओं ने दिया है इसलिये हिन्दू का अधिकार स्वतः सिद्ध है।

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अयोध्या धर्मशाला कांटेक्ट नंबर

कई शताब्दी के बाद २२ जनवरी २०२४ को राम लला पुनः अपने श्री अयोध्या धाम के मंदिर में विराजमान हुये हैं। ऐसे में देश विदेश के श्रद्धालु भक्त जन राम लला का दर्शन करना चाहते हैं।

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बलि प्रथा एक अभिशाप क्यों

बलि प्रथा एक अभिशाप क्यों

सब मम प्रिय सब मम उपजाये – ये भगवान राम का कथन है और इसे किसी प्रकार से नकारा नहीं जा सकता कि सारी सृष्टि ईश्वर की ही कृति है। इस अध्याय में हम बलि जिसे प्रथा कहा जाने लगा है और एक अभिशाप सिद्ध किया जा रहा है इसकी उपादेयता, प्रमाणिकता आदि की चर्चा करेंगे।

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क्या आप जानते हैं सबसे बड़ा भगवान कौन है - सच कोई नहीं बतायेगा

क्या आप जानते हैं सबसे बड़ा भगवान कौन है ?

सबसे बड़े भगवान के बारे में निर्णय करना अत्यंत कठिन है और अपराध भी है, किन्तु स्वयं के लिये सबसे बड़े भगवान के बारे में जानना अत्यंत सरल है। इस विषय को गंभीरतापूर्वक चिंतन करने, बार-बार विचार करने पर ही समझा जा सकता है केवल एक बार इस अध्याय को पढ़ लेने से नहीं समझा जा सकता।

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ज्ञानवापी सर्वे का निष्कर्ष क्या है

ज्ञानवापी सर्वे का निष्कर्ष क्या है ?

वर्षों से चल रहे ज्ञानवापी प्रकरण का सर्वे रिपोर्ट न्यायालय के आदेश से 25 जनवरी 2024 को सार्वजनिक की जा चुकी है। सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद कई महत्वपूर्ण बातें सामने आयी है। सनातनियों का दृढ विश्वास की ज्ञानवापी ही भगवान विश्वनाथ का वास्तविक मंदिर है यह और पुष्ट हो गया है।

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