होली कब है 2024 में 25 या 26 मार्च को, होली कैसे मनाया जाता है ?
इस आलेख में हम होली निर्णय को शास्त्रीय प्रमाणों के साथ समझते हुये होली 2024 में कब है इसे जानेंगे। साथ ही होली से सम्बंधित और भी महत्वपूर्ण तथ्यों को समझेंगे।
सनातन में सांसारिक सुख की अपेक्षा आत्मकल्याण को अधिक महत्व दिया गया है और यहां तक कहा गया है कि आत्मकल्याण हेतु यदि सम्पूर्ण संसार का भी त्याग करना पड़े तो कर दे। आत्मकल्याण हेतु मनुष्य को निरंतर आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर रहने की आवश्यकता होती है और इसी लिये वर्ष पर्यन्त अनेकानेक व्रत-पर्व (Vrat-Parv) होते हैं। इस श्रेणी में वर्ष पर्यन्त होने वाले व्रत-पर्वों की जानकारी एवं उसकी पूजा विधि, मंत्र, कथा आदि संग्रहित किये गये हैं।
इस आलेख में हम होली निर्णय को शास्त्रीय प्रमाणों के साथ समझते हुये होली 2024 में कब है इसे जानेंगे। साथ ही होली से सम्बंधित और भी महत्वपूर्ण तथ्यों को समझेंगे।
होलिका दहन मंत्र और विधि – holika dahan kab hai : होलिका दहन मात्र एक परम्परा नहीं है। होलिका दहन की विधि एवं मंत्रों का उल्लेख शास्त्रों में हैं। होलिका दहन मुहूर्त के लिये कई विशेष नियम भी है। इस आलेख में हम होलिका दहन विधि और मंत्रों को समझेंगे।
होलिका दहन कब है 2025 – Holika Dahan : होलिका पौर्णमासी तु सायाह्न व्यापिनी मता । भूतविद्धे न कर्तव्ये दर्शपूर्णे कदाचन ॥ ब्रह्मवैवर्त पुराण – सबसे पहला प्रमाण यह है कि होलिका दहन सायं काल में उपलब्ध पूर्णिमा को करना चाहिये अर्थात् सायं काल को कर्मकाल बताया जा रहा है यह प्रमाण ब्रह्मपुराण का है।
भगवान शिव और पार्वती का विवाह फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को हुआ था और इसी कारण इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है। महाशिवरात्रि व्रत १४ वर्षों तक करना चाहिए। इस व्रत में रात के चारों पहर भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाती है, रात्रिजागरण, नृत्य-गीत, मन्त्र जप, स्तोत्र पाठ आदि करना चाहिए।
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का आयोजन होता है। पञ्चाङ्गों के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 26 फरवरी 2025 बुधवार को मध्याह्न में 11 बजकर 08 मिनट पर होगा और अगले दिन यानी 27 फरवरी 2025 गुरुवार को पूर्वाह्न 8 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगी।
अचला सप्तमी – अचला सप्तमी कब है – अचला का अर्थ – अचला सप्तमी 2025 : माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को अचला सप्तमी कहा जाता है।
इसका एक अन्य नाम रथ सप्तमी भी है।
शास्त्रों के नियमानुसार इस दिन किया गया प्रत्येक कर्म चाहे पुण्य कर्म हो या पाप कर्म अनन्त काल तक फलित होता है।
एकादशी उद्यापन की सामग्री – ekadashi udyapan samagri : दान सामग्री के संबंध में मुख्य नियम यही है कि यजमान का सामर्थ्य क्या है। यजमान से सामर्थ्य के अनुसार दान सामग्री में कमी भी हो सकती है और अधिक भी किया जा सकता है। यहां एक पुनरावृत्ति पुनः करना अपेक्षित है “एक दरिद्र यजमान यदि कुछ दान करने में समर्थ न हो तो मात्र ब्राह्मण भोजन कराकर भी उद्यापन कर सकता है।”
श्री सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में : सत्यनारायण व्रत कथा संस्कृत में अवश्य सुनें।
कथा सुनने का पुण्य संस्कृत (देववाणी) में सुनने से ही मिलता है।
हिन्दी या अन्य भाषाओं में समझने के लिये कर सकते हैं।
कथा का पुण्य पाने के लिये ब्राह्मण के द्वारा ही सुने।
कथा सुनते समय कथावाचक से नीचे आसन रखें।
हाथों में फूल रखकर कथा सुने और कथा के बाद भगवान को चढ़ा दें।
कथा के समय आपस में बातचीत न करें।
यदि संस्कृत समझ में न भी आये तो भी ध्यान से संस्कृत पाठ को अवश्य सुनें।
नरक निवारण चतुर्दशी (narak nivaran chaturdashi) कब है – पूजा विधि : लिङ्गपुराण में नरक निवारण चतुर्दशी की कथा है जिसमें इसकी महिमा बताते हुये कहा गया है : अश्वमेधसहस्राणि वाजपेयशतानि च। प्राप्नोति तत्फलं सर्वं नात्र कार्या विचारणा॥ एक हजार अश्वमेध यज्ञ और एक सौ वाजपेय यज्ञ करने से जो फल प्राप्त होता है वो फल नरक निवारण चतुर्दशी व्रत करने से प्राप्त होता है, इसमें विचार नहीं करना चाहिये अर्थात शंका नहीं करनी चाहिये।
सरस्वती पूजा विधि मंत्र सहित ~ Saraswati Puja Vidhi : इस लेख में, हम आपको माता सरस्वती की पूजा विधि और मंत्रों के बारे में बताएँगे। विद्या की देवी सरस्वती की पूजा के दिन मंदिर, मंडप, विद्यालय में पूजा की जाती है और जहाँ भी विशेष पूजा हो, वहां लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा भी स्थापित की जाती है।