- नये घर में गृह प्रवेश : यदि नया घर बनाया गया हो तो विस्तृत वास्तु शांति पद्धति है जिसके अनुसार वास्तु शांति करके अन्य विधियों का पालन करते हुये शुभ मुहूर्त में गृह प्रवेश करना चाहिये।
- पुराने घर में वर्षों बाद प्रवेश : यदि घर से बाहर वर्षों रहने के बाद पुनः पुराने घर में प्रवेश करना या किसी बने-बनाये पुराने घर को खरीदे हों और उसमें प्रवेश करना हो तो भी वास्तु शांति आवश्यक होती है। बिना वास्तु शांति के पुराने घर में निवास करना भी शुभद नहीं होता।
किराए के मकान में गृह प्रवेश कैसे करें
यदि आपने किराये का मकान लिया है तो वह तीन प्रकार का हो सकता है :
- पुराना मकान : यदि किसी पुराने मकान में भी किराये पर रहने के लिये जाते हैं और आर्थिक तंगी न हो तो वास्तु शांति अवश्य करनी चाहिये। यदि आर्थिक तंगी हो तो मात्र स्वस्तिवाचन, मंगल गान आदि करके प्रवेश करें और ब्राह्मण भोजन करायें।
- नया मकान : नये मकान में भी यदि किराये पर रहने के लिये प्रवेश कर रहे हैं और मकान मालिक ने वास्तु शांति कराया हो तो आप कलश स्थापन करके कलश पर ही वास्तु पूजन कर सकते हैं। ब्राहण भोजन कराना आवश्यक होता है। यदि मकान मालिक ने वास्तु शांति न कराया हो तो आपको वास्तु शांति कराना चाहिये।
- खरीदा हुआ मकान : ऐसा भी होता है की कुछ वर्षों जैसे की 99 वर्ष के लिये फ्लैट खरीदा जाता है। यह भी एक तरह से किराये का ही मकान होता है अंतर मात्र इतना है कि स्थायी रूप से उसमें निवास किया जा सकता है और एक बार में ही जितने वर्षों का अनुबंध हो उसका किराया भुगतान कर दिया गया। यदि ऐसे खरीदे हुये फ्लैट में प्रवेश करना हो तो वास्तु शांति अवश्य करनी चाहिये।
नई दुल्हन का गृह प्रवेश कैसे करें :
जहां तक नयी बहु के गृहप्रवेश का प्रश्न है तो वास्तव में इसका नाम “वधूप्रवेश” है और जो लोग वधूप्रवेश नाम तक नहीं जानते वो इसकी विधि क्या बताएंगे। वधूप्रवेश (अज्ञानियों के अनुसार नयी बहु के गृहप्रवेश) विषयक महत्वपूर्ण तथ्य या विधि इस प्रकार है :
- विवाह के बाद जब पहली बार नयी बहू ससुराल आती है तो उसे वधूप्रवेश कहा जाता है।
- विवाह के बाद १६ दिनों के भीतर वधूप्रवेश के लिये विशेष शुभ मुहूर्त विचार करने की आवश्यकता नहीं होती है।
- यदि १६ दिनों के बाद बहू (दुल्हन) ससुराल जाये अर्थात वधूप्रवेश करना हो तो उसके लिये शुभ मुहूर्त की भी आवश्यकता होती है।
- वधूप्रवेश का एक विशेष नियम यह भी है कि वधूप्रवेश रात में ही करना चाहिये दिन में वधूप्रवेश का निषेध है।
- वधूप्रवेश के समय भी ब्राह्मणों द्वारा स्वस्तिवाचन कराना चाहिये एवं स्त्रियों को मङ्गल गान करना चाहिये।
- वधूप्रवेश के बाद पुण्याहवाचन करके पहले विघ्नहर्ता गणपति की और फिर महालक्ष्मी की पूजा करनी चाहिये।
- फिर वधू को कोई नया आभूषण पहनाना चाहिये।
- फिर वर-वधू दोनों को दुग्धपान करना चाहिये।
- कुलदेवता को प्रणाम करके अन्य स्थानीय लोकाचार करना चाहिये।
- तत्पश्चात अन्य श्रेष्ठ जनों का आशीर्वाद लेना चाहिये।

सारांश : कुल मिलाकर पंडित (ब्राह्मण) की आवश्यकता तो नयी दुल्हन के घर आने (वधूप्रवेश) में भी होती है। नया घर हो या पुराना, किराये का घर हो या 99 वर्षों के लिये खरीदा फ्लैट सभी में निवास करने के लिये ब्राह्मण की आवश्यकता होती ही है। हाँ यदि आर्थिक रूप से सक्षम न हो तो केवल स्वस्तिवाचनादि करके ब्राह्मण भोजन ही कराया जा सकता है। बिना पंडित (ब्राह्मण) के किसी भी तरह का प्रवेश करना सनातन शास्त्रों के अनुसार सही नहीं है।
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कर्मकांड विधि में शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रामाणिक चर्चा की जाती है एवं कई महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा पूर्व भी की जा चुकी है। तथापि सनातनद्रोही उचित तथ्य को जनसामान्य तक पहुंचने में अवरोध उत्पन्न करते हैं। एक बड़ा वैश्विक समूह है जो सनातन विरोध की बातों को प्रचारित करता है। गूगल भी उसी समूह का सहयोग करते पाया जा रहा है अतः जनसामान्य तक उचित बातों को जनसामान्य ही पहुंचा सकता है इसके लिये आपको भी अधिकतम लोगों से साझा करने की आवश्यकता है।