खरमास कब से कब तक है ~ Kharmas

खरमास कब से कब तक है खरमास कब से कब तक है - खरमास 2024, खरमास 2025, खरमास 2026

खरमास में मांगलिक कार्य क्यों नहीं करना चाहिये ?

खरमास में गुरु की राशि में स्थित होने के कारण सूर्य मन्द हो जाते हैं अर्थात शुभफल दायकत्व से रहित हो जाते हैं। इसलिये खरमास में किये गये कार्यों में सूर्य द्वारा प्राप्त होने वाला शुभफल प्राप्त नहीं हो सकता। अतः खरमास में मांगलिक कार्यों के लिये शास्त्रों में निषेध किया गया है।

अपवाद : खरमास में वर्जित कार्यों का एक अपवाद भी है। चैत्र माह में खरमास होने पर भी उपनयन किया जा सकता है।

खरमास और मलमास

खरमास कब से कब तक है
खरमास कब से कब तक है – खरमास 2024, खरमास 2025, खरमास 2026

खरमास और मलमास दोनों पूर्णतः अलग हैं। कुछ लोग दोनों को एक ही समझने की भूल कर बैठते हैं।

खरमास क्या है – सूर्य जब धनु या मीन राशि में होता है तो उसे खरमास कहा जाता है।
मलमास क्या है – औसतन 30 महीने में चान्द्रमास की वृद्धि होती है जिसे अधिकमास या मलमास कहा जाता है। मलमास दो प्रकार के होते हैं एक अधिकमास और दूसरा क्षयमास। जब चंद्रमास में एक भी संक्रांति न हो तो वह अधिकमास होता है और जब चान्द्रमास में दो संक्रांति हो जाये तो क्षयमास होता है।

F & Q :

प्रश्न : क्या खरमास में नया दुकान खोलना चाहिये ?
उत्तर : नहीं नया दुकान खरमास में नहीं खोलना चाहिये।

प्रश्न : क्या खरमास में यात्रा करनी चाहिये ?
उत्तर : विशेष प्रयोजनीय यात्रायें जो यदा-कदा होती है अथवा कहीं पहली बार जाना हो तो वैसी यात्रा को छोड़कर अन्य यात्रायें की जा सकती है।

प्रश्न : क्या खरमास में नये फ्लैट में प्रवेश कर सकते हैं ?
उत्तर : नहीं, खरमास में नए फ्लैट में भी प्रवेश नहीं करना चाहिये।

प्रश्न : क्या खरमास में विवाह संबंधी गतिविधि की जा सकती है ?
उत्तर : नहीं खरमास में विवाह संबंधी गतिविधि नहीं करनी चाहिये।

प्रश्न : खरमास का कोई अपवाद बतायें।
उत्तर : उपनयन, चैत्र मास में खरमास होने पर भी उपनयन किया जा सकता है।

प्रश्न : 2024 मार्च में खरमास कब है?
उत्तर : 2024 मार्च में खरमास 15 मार्च से है।

प्रश्न : खरमास कितने दिन का होता है?
उत्तर : खरमास १ महीने अर्थात ३० दिन का होता है। १ दिन कम या अधिक भी हो सकता है अर्थात २९ या ३१ दिन का भी हो सकता है।

प्रश्न : खरमास में कौन कौन से कार्य वर्जित है?
उत्तर : खरमास में सभी तरह के मांगलिक कार्य निषिद्ध या वर्जित हैं। मांगलिक कार्यों में उपनयन-विवाहादि एवं नये कार्यों का आरम्भ एवं प्रवेश; गृहारम्भ, ग्रहप्रवेश, वधूप्रवेश आदि कार्य वर्जित हैं। पूजा-कथा मांगलिक कार्यों में नहीं आता है।

प्रश्न : खरमास में क्यों नहीं होते मांगलिक कार्य?
उत्तर : खरमास में गुरु की राशि में स्थित होने के कारण सूर्य मन्द हो जाते हैं अर्थात शुभफल दायकत्व से रहित हो जाते हैं। इसलिये खरमास में किये गये कार्यों में सूर्य द्वारा प्राप्त होने वाला शुभफल प्राप्त नहीं हो सकता। अतः खरमास में मांगलिक कार्यों के लिये शास्त्रों में निषेध किया गया है।

प्रश्न : खरमास और मलमास में क्या अंतर है?
उत्तर : खरमास क्या है – सूर्य जब धनु या मीन राशि में होता है तो उसे खरमास कहा जाता है। मलमास क्या है – औसतन 30 महीने में चान्द्रमास की वृद्धि होती है जिसे अधिकमास या मलमास कहा जाता है।

नित्य कर्म पूजा पद्धति मंत्र

कर्मकांड विधि में शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रामाणिक चर्चा की जाती है एवं कई महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा पूर्व भी की जा चुकी है। तथापि सनातनद्रोही उचित तथ्य को जनसामान्य तक पहुंचने में अवरोध उत्पन्न करते हैं। एक बड़ा वैश्विक समूह है जो सनातन विरोध की बातों को प्रचारित करता है। गूगल भी उसी समूह का सहयोग करते पाया जा रहा है अतः जनसामान्य तक उचित बातों को जनसामान्य ही पहुंचा सकता है इसके लिये आपको भी अधिकतम लोगों से साझा करने की आवश्यकता है।

Leave a Reply