पवित्रीकरण अर्थात शुद्धिकरण की संपूर्ण विधि

पवित्रीकरण-विधि

F&Q :

प्रश्न : पवित्रीकरण मंत्र कौन सा है ?
उत्तर : पवित्रीकरण मंत्र है :
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं सः बाह्याभयन्तर शुचिः। पुण्डरीकाक्षः पुनातु। ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु॥

प्रश्न : पवित्रीकरण मंत्र का अर्थ क्या है ?
उत्तर : पवित्रीकरण मंत्र का अर्थ है :
अपवित्र हो या पवित्र, किसी भी अवस्था को प्राप्त क्यों न हो, जो भगवान पुण्डरीकाक्ष का स्मरण करता है, वह बाहर-भीतर से सर्वप्रकारेण पवित्र हो जाता है। मैं उन्हीं पुण्डरीकाक्ष (विष्णु) भगवान का स्मरण करता हूँ, पुण्डरीकाक्ष भगवान मुझे भी पवित्र करें।

प्रश्न : पवित्रीकरण करने की विधि क्या है ?
उत्तर : पवित्रीकरण करने की विधि है :

  • दायें हाथ में जल लें।
  • जल को देखते हुये पवित्रीकरण मंत्र पढ़ें।
  • पवित्रीकरण मंत्र पढ़ने के बाद जल को पूजा की सभी वस्तुओं और शरीर पर छिड़कें ।
  • पवित्रता की भावना करें।

प्रश्न : आचमन का अर्थ क्या है ?
उत्तर : आचमन का अर्थ है, शास्त्रोक्त विधि के अनुसार निर्धारित मात्रा में पवित्र जल पीना।

प्रश्न : आचमन करने की सही विधि क्या है ?
उत्तर : आचमन करने की सही विधि इस प्रकार है :

  • पूर्वाभिमुख, उत्तराभिमुख या ईशानकोण की ओर मुख करके बैठें।
  • इस तरह से बैठें कि थोड़ा सा खड़ा रहने की भी स्थिति रहे और इसे चुकुमुकु करके बैठना भी कहा जाता है।
  • दोनों हाथों को जानु या घुटनों के अंदर रखें।
  • दाहिने हाथ को गोकर्णाकृति करके तीन बार थोड़ा-थोड़ा जल लेकर ब्रह्मतीर्थ से पान करें।
  • आचमन जलपान करते समय भगवान विष्णु का स्मरण करते रहें।
  • आचमन करते समय ‘ॐ केशवाय नमः, ॐ नाराणाय नमः, ॐ माधवाय नमः मंत्र का मानसिक उच्चारण करें।
  • फिर अंगूठे के मूल भाग से ओठों को पोछकर अगले मंत्र से हाथों को पीछे धो लें – ॐ ह्रषीकेशाय नमः।
  • आचमन करते समय सही दिशा का ध्यान रखना आवश्यक होता है। दक्षिण या पश्चिम की दिशा में मुख करके कभी भी आचमन नहीं करना चाहिये।

कर्मकांड विधि में शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रामाणिक चर्चा की जाती है एवं कई महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा पूर्व भी की जा चुकी है। तथापि सनातनद्रोही उचित तथ्य को जनसामान्य तक पहुंचने में अवरोध उत्पन्न करते हैं। एक बड़ा वैश्विक समूह है जो सनातन विरोध की बातों को प्रचारित करता है। गूगल भी उसी समूह का सहयोग करते पाया जा रहा है अतः जनसामान्य तक उचित बातों को जनसामान्य ही पहुंचा सकता है इसके लिये आपको भी अधिकतम लोगों से साझा करने की आवश्यकता है।

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