संशोधित अपात्रक सपिंडीकरण श्राद्ध विधि – वाजसनेयी
वाजसनेयी संशोधित ‘अपात्रक सपिण्डीकरण श्राद्ध विधि’: जानें प्रेतवेदी और पितृवेदी के पृथक्करण का शास्त्रीय महत्त्व। सपिण्डीकरण का उचित काल, आसनादि क्रम और ‘तंत्र’ निषेधों का प्रामाणिक विश्लेषण।
वाजसनेयी संशोधित ‘अपात्रक सपिण्डीकरण श्राद्ध विधि’: जानें प्रेतवेदी और पितृवेदी के पृथक्करण का शास्त्रीय महत्त्व। सपिण्डीकरण का उचित काल, आसनादि क्रम और ‘तंत्र’ निषेधों का प्रामाणिक विश्लेषण।
गया श्राद्ध की शास्त्रों में अतिशय महत्वपूर्ण स्थान और माहात्म्य है। यहां तक कहा गया है कि पितरगण लालायित रहते हैं कि मेरे वंश में कोई गया श्राद्ध करे । गया श्राद्ध की महिमा का वर्णन करना संभव नहीं है और इस असीम महिमा के कारण लोगों की धारणायें भी शास्त्र-उल्लंघन करने वाली हो रही है।
पितृपक्ष कब है : 2024 में पितृपक्षीय तर्पण-श्राद्ध का आरंभ 18 सितंबर 2024 बुधवार से ही होगा।
अतः 2024 में पितृपक्षीय तर्पण-श्राद्धादि आश्विन कृष्ण अमावास्या 2 अक्टूबर बुधवार तक होगा।
श्राद्ध के दिन किये जाने वाले कार्यों को तीन भागों में विभाजित करके बताया गया है जिससे समझने में आसान है। साथ ही साथ शास्त्रों के प्रमाण भी दिये गये हैं जिससे विश्वनीयता में भी वृद्धि हो सके।
मासिक श्राद्ध और सपिण्डीकरण श्राद्ध द्वादशाह के दिन किया जाता है जो यहां दिया गया है। श्राद्ध करने की विधि और श्राद्ध के मंत्रों को विशेष शुद्ध रखने का प्रयास किया गया है
एकादशाह श्राद्ध विधि | छन्दोग | shraddh vidhi : दीप जलाकर यदि पाककर्त्ता द्वारा पाककर्म हुआ हो तो श्राद्धकर्त्ता पाककर्त्ता से पूछे “सिद्धम्” और पाककर्त्ता कहे “ॐ सिद्धम्” ॥ यदि पाककर्ता न हो तो पूछने की आवश्यकता नहीं है।
मासिक श्राद्धों में प्रथम के स्थान पर क्रमशः प्रयोग करे : द्वितीय – तृतीय – चतुर्थ – पञ्चम – ऊनषाण् – षष्ठ – सप्तम – अष्टम – नवम – एकादश – ऊनवार्षिक और द्वादश। 11 मास के मध्य यदि अधिकमास हो तो त्रयोदश मासिक की वृद्धि होगी। लेकिन फिर क्रम में परिवर्तन होगा – एकादश-द्वादश-ऊनवार्षिक और त्रयोदश।
shraddh karm : षोडशी श्राद्ध विधि उसकी क्रियाओं, श्राद्ध देश, श्राद्ध के अधिकारी, पात्र, सपात्रक और अपात्रक श्राद्ध, श्राद्ध में क्या करना चाहिए आदि की विस्तृत चर्चा की गयी है जो की श्राद्ध में आस्था रखने वालों के लिये विशेष उपयोगी है।
अपुत्र होने पर नाना का श्राद्ध नाती कर सकता है या नहीं। यदि अपुत्र नाना का श्राद्ध नाती कर सकता है तो अड़चन क्या है अथवा क्यों नहीं कर सकता? दौहित्र (नाती) मातामह श्राद्ध (नाना) का – श्राद्ध कैसे करें