हरतालिका नाम जो बोला जाने लगा है वो सही नहीं है हरितालिका सही नाम है। हरितालिका को ही तीज भी कहा जाता है। लेकिन सनातन के साथ वैश्विक षड्यंत्र ही कुछ ऐसा किया जा रहा है कि सब कुछ विकृत कर दिया जा रहा है यहां तक कि नाम भी। रामायण को रामायणा, कृष्ण को कृष्णा, हरि को हैरी आदि उसी कड़ी में हरितालिका भी है जिसे हरतालिका बना दिया गया है। इस आलेख में हरितालिका अर्थात तीज कब है इस विषय की जानकारी दी गयी है।
तीज कब है 2024, हरतालिका तीज कब है
सर्वप्रथम तो हरतालिका अशुद्ध नाम है और हरितालिका शुद्ध है यही समझना आवश्यक है ताकि गूगल भी जो हरतालिका का परिणाम देता है उसे सुधार कर सके और जनमानस भी शुद्ध नाम जाने। हरितालिका के संबंध में व्रत कथा में ही बताया गया है कि यह नाम कैसे पड़ा। हरितालिका नाम के संबंध में कथा में जो वचन है वो है : “आलीभिर्हरिता यस्मात्तस्मात् सा हरितालिका” अर्थात आलीभिः हरिता के कारण हरितालिका नाम है।
हरितालिका : आलीभिः हरिता – आलि का तात्पर्य सखी है अर्थात आलीभिः का तात्पर्य बहुत सारी सखियों द्वारा है एवं हरिता का तात्पर्य हरण (अपहरण) से है। हिमाचल पार्वती का विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे लेकिन पार्वती भगवान शंकर से करना चाहती थी। पिता की इच्छा के कारण पार्वती क्षुब्ध हो गयी थी जो सखियों को अच्छा नहीं लगा और सखियों ने पार्वती का हरण कर लिया। सखियों द्वारा हरण करने के बाद पार्वती वन में चली गई और तपस्या करने लगी। हरितालिका नाम का तात्पर्य पूर्ण रूपेण स्पष्ट हो जाता है।
तीज : अब दूसरे नाम तीज को भी समझना आवश्यक है। हरितालिका का ही दूसरा नाम तीज भी है। यह व्रत भाद्र कृष्ण तृतीया को होता है। तृतीया को ही तीज भी बोला जाता है, जैसे द्वितीया को दूज। अर्थात तृतीया तिथि को व्रत किया जाता है इसलिये तृतीया तिथि के कारण हरितालिका व्रत का दूसरा नाम तीज या हरितालिका तीज भी है।
तीज कब है
भाद्र मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया कज्जली तृतीया होती है और शुक्ल पक्ष की तृतीया हरितालिका : “भाद्रस्य कज्जली कृष्णा शुक्ला च हरितालिका”; अब हम यह समझेंगे की हरितालिका तीज किस दिन किया जाता है और 2024 में हरितालिका तीज कब होगा।
हरितालिका के संबंध में लगभग सभी वचन यही कहते हैं कि इसके लिये द्वितीया युक्त तृतीया त्याज्य है और चतुर्थी युक्त तृतीया ग्राह्य है। स्कन्द पुराण का वचन है : कला काष्ठा मुहूर्ताऽपि द्वितीया यदि दृश्यते। सा तृतीया न कर्त्तव्या कर्त्तव्या गणसंयुता॥ अन्य सभ वचन भी द्वितीयायुक्ता तृतीया को त्याग कर चतुर्थीयुक्ता तृतीया को ही ग्रहण करने की आज्ञा देता है।
इस प्रकार स्पष्ट होता है कि यदि सूर्योदय काल में तनिक भी द्वितीया हो और उसके उपरांत संपूर्ण तृतीया हो तो भी उस दिन हरितालिका व्रत नहीं करना चाहिये। वहीं जब सूर्योदय काल में तनिक भी तृतीया हो और शेष सम्पूर्ण चतुर्थी हो तो भी उसी दिन हरितालिका व्रत करना चाहिये। आगे विचार हम दृश्य पञ्चाङ्गानुसार प्राप्त तिथ्यादि मान से करेंगे यद्यपि अदृश्य पञ्चाङ्गानुसार जो तिथ्यादि मान प्राप्त होते हैं उसे भी अंकित अवश्य करेंगे।
दृश्य पञ्चाङ्गानुसार : 5 सितम्बर 2024 गुरुवार को दोपहर 12:21 बजे तक द्वितीया है तत्पश्चात तृतीया का आरम्भ होता है। द्वितीया तनिक भी हो और शेष सम्पूर्ण तृतीया हो तो भी हरितालिका न करे इस कारण 5 सितम्बर को मध्याह्न तक द्वितीया होने से हरितालिका व्रत नहीं हो सकता। अगले दिन अर्थात 6 सितम्बर 2024 शुक्रवार को अपराह्न 3:01 बजे तक तृतीया है तत्पश्चात चतुर्थी। इस कारण 2024 में हरितालिका तीज व्रत 6 सितम्बर 2024 शुक्रवार को होना सिद्ध होता है।
अदृश्य पञ्चाङ्गानुसार : अदृश्य पञ्चाङ्गानुसार विचार करने की आवश्यकता इस कारण है कि अधिकतर पंचांग अदृश्य गणना से ही सारणी द्वारा निर्मित किये जाते हैं, तथापि अधिकांश पंचांग इसी प्रकार के हैं और पुरोहित-पंडित इन्हीं पंचांगों से व्रतादि की आज्ञा देते हैं। अदृश्य पंचांगों में 5 सितम्बर 2024, गुरुवार को सूर्योदय से लगभग साढ़े चार घंटे तक द्वितीया तिथि है अर्थात लगभग 10 बजे तक तत्पश्चात तृतीया। अगले दिन 6 सितम्बर शुक्रवार को सूर्योदय से लगभग 6 घंटा 32 मिनट अर्थात लगभग मध्याह्न 12:02 बजे (IST) तक तृतीया है तत्पश्चात चतुर्थी।
इस प्रकार अदृश्य पञ्चाङ्गानुसार विचार करने पर भी जैसे जन्माष्टमी व्रत में अंतर ज्ञात होता है वैसा अंतर हरितालिका व्रत के संबंध में नहीं है। दृश्य पञ्चाङ्गानुसार जहां 6 सितम्बर 2024 शुक्रवार को 3:01 अपराह्न तक तृतीया है वहीं अदृश्य पंचांगों में 3 घंटा कम 12:02 बजे अपराह्न तक ही तृतीया है तथापि व्रत निर्धारक वचनों में औदयिक तृतीया को ग्रहण करने की आज्ञा है और अदृश्य पंचांगों में भी औदयिक तृतीया 6 सितम्बर 2024 शुक्रवार को ही है जिससे हरितालिका तीज व्रत 2024 में 6 सितम्बर 2024 को ही होना सिद्ध होता है एवं पंचांगों में भी यही दिया गया है।
निष्कर्ष : हरितालिका तीज के संबंध में दृश्य और अदृश्य में पंचांगों में तिथि काल में 3 घंटे का अंतर होते हुये भी दोनों ही प्रकार से 5 सितम्बर 2024 गुरुवार को द्वितीयायुता तृतीया है एवं 6 सितम्बर शुक्रवार को चतुर्थीयुता तृतीया है। द्वितीयासहित तृतीया का निषेध किया गया है और चतुर्थीसहित तृतीया को व्रत के लिये ग्रहण करने का प्रमाण है अतः 2024 में सभी प्रकार के पंचांगों से विचार करने पर भी 6 सितम्बर शुक्रवार को ही हरितालिका तीज व्रत सिद्ध होता है।
कर्मकांड विधि में शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रामाणिक चर्चा की जाती है एवं कई महत्वपूर्ण विषयों की चर्चा पूर्व भी की जा चुकी है। तथापि सनातनद्रोही उचित तथ्य को जनसामान्य तक पहुंचने में अवरोध उत्पन्न करते हैं। एक बड़ा वैश्विक समूह है जो सनातन विरोध की बातों को प्रचारित करता है। गूगल भी उसी समूह का सहयोग करते पाया जा रहा है अतः जनसामान्य तक उचित बातों को जनसामान्य ही पहुंचा सकता है इसके लिये आपको भी अधिकतम लोगों से साझा करने की आवश्यकता है।