उपनयन संस्कार विधि – वाजसनेयी
उपनयन संस्कार विधि – यद्यपि उपनयन एक ही संस्कार है तथापि युगव्यवस्था से उपनयन में एक साथ 4 संस्कार सम्पन्न किया जाता है :- चूडाकरण, उपनयन, वेदारंभ व समावर्तन ।
उपनयन संस्कार विधि – यद्यपि उपनयन एक ही संस्कार है तथापि युगव्यवस्था से उपनयन में एक साथ 4 संस्कार सम्पन्न किया जाता है :- चूडाकरण, उपनयन, वेदारंभ व समावर्तन ।
हनीमून क्या होता है : हनीमून – “वास्तविक भारतीय वो नहीं है जिसनें भारत में जन्म लिया है, वास्तविक भारतीय वो है जिसके विचार भी भारतीय हैं, आलेख को समझने हेतु भारतीय विचार होना अनिवार्य है”
विवाह मुहूर्त 2024 – 2024 के विभिन्न महीनो में प्राप्त सभी शुद्ध विवाह मुहूर्त दिये गए हैं। यहां जो विवाह मुहूर्त या विवाह दिन दिया गया है वह गौणकाल का विचार करके ही दिया गया है। गौणकाल से तात्पर्य है न्यूनतम शुद्धाशुद्ध काल, मास, पक्ष, तिथि, नक्षत्र, वार का विचार।
विवाह सामग्री लिस्ट – vivah samagri : यहाँ वाग्दान विधि से लेकर चतुर्थी कर्म तक की सामग्री सूचियां विभागशः दिया गया है : वर का वस्त्र, कांस्य स्थाली (जाम), जलपात्र, स्थाली, चावल (धान), सुंदर वस्त्र, हरिद्रा गांठ, पुंगीफल, पान, यज्ञोपवीत, दूर्वा, फल, द्रव्य, चांदी का सिक्का-पान-मछली-सुपारी, दधि, हरिद्रा चूर्ण आदि।
चतुर्थी का विवाह – सम्प्रदाने भवेत्कन्या घृतहोमे सुमङ्गली । वामभागे मवद्भार्या पत्नी चतुर्थीकर्मणि ॥ दान करने मात्र से कन्या, घृतहोम करने के पश्चात् सुमङ्गली, वाम भाग में स्थित होने से भार्या और चतुर्थी कर्म के पश्चात् पत्नी संज्ञा होती है।
विवाह पद्धति – vivah vidhi : धूआ-पानी, जयमाला विधि आदि कई महत्वपूर्ण विधियों को समाहित करने से उपरोक्त विवाह विधि विशेष उपयोगी सिद्ध होती है। ….. vivah vidhi
लग्न पत्रिका कैसे लिखें : लग्न पत्रिका (lagn patrika) लेखन में विवाह के लिये शुभ लग्न निश्चय करना आवश्यक होता है। शुभ लग्न निश्चय करने के बाद तदनुसार मासादि का उल्लेख किया जाता है।
विनायक शांति पूजा विधि | vinayak shanti – उपनयन-विवाहादि-निर्विघ्नता हेतु संकल्प : ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद् भगवतो ………… विनायकशांति करिष्ये ॥ मुंडन, उपनयन, विवाह, गृहारम्भ, गृहप्रवेश आदि में भी निर्धारित काल में यदि विघ्न उपस्थित हो जाये अथवा
वर वरण विधि | सगुन – sagun | हस्त ग्रहण वाग्दान कैसे करें ? वाग्दान विधि : अव्यंगेऽपतितेऽक्लीवे दशदोष विवर्जिते । इमां कन्यां प्रदास्यामि देवाग्नि द्विज सन्निधौ ॥ ………. शर्माणं (यथायोग्य) वरं कन्या प्रतिगृहीतृत्वेन त्वामहं वृणे॥
विवाह मुहूर्त – दिन की भांति रात्रि के 15 मुहूर्ताधिपति क्रमशः इस प्रकार होते हैं – ईश्वर (शिव), अजैकपाद, अहिर्बुध्न्य, पूषा, अश्विनी कुमार, यमराज, अग्नि, ब्रह्मा (धाता), चन्द्रमा, अदिति, बृहस्पति, विष्णु, सूर्य, त्वष्टा, समीरण (वायु) – रात्रौ पंचदशेश्वराज ..