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संपूर्ण कर्मकांड विधि

संपूर्ण कर्मकांड विधि

विवाह क्या है, अर्थ, परिभाषा, प्रकार, उद्देश्य, बाल विवाह आदि की विस्तृत जानकारी – Vivah

विवाह क्या है, अर्थ, परिभाषा, प्रकार, उद्देश्य, बाल विवाह आदि की विस्तृत जानकारी – Vivah

विवाह गार्हस्थ जीवन का द्वार है और सृष्टि को अनवरत रखने में अपनी भूमिका निर्वहन करने के लिये अनिवार्य होता है। विवाह किये बिना किसी व्यक्ति के गृहस्थ आश्रम का प्रारम्भ नहीं होता।

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महामृत्युंजयष्टक

महामृत्युंजयष्टक

किसी भी भगवान की आराधना में स्तोत्र का भी महत्वपूर्ण स्थान होता है। स्तोत्रों में अष्टक का विशेष महत्व होता है। सभी देवताओं के विभिन्न स्तोत्रों के साथ ही उनके अष्टक स्तोत्र भी होते है। इसी प्रकार महामृत्युंजय भगवान का भी अष्टक स्तोत्र है। इस आलेख में महमृत्युञ्जय अष्टक दिया गया है।

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महामृत्युंजय कवच हिन्दी अर्थ सहित

महामृत्युंजय कवच हिन्दी अर्थ सहित

महामृत्युंजय कवच रुद्रयामल तंत्र में वर्णित है।महामृत्युंजय कवच का पाठ, श्रवण और यंत्र में धारण करने का विधान है। महामृत्युंजय कवच pdf डाउनलोड

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महामृत्युंजय जाप कितने दिन का होता है

महामृत्युंजय जाप कितने दिन का होता है

महामृत्युंजय जाप कितने दिन का होता है – महामृत्युंजय जप को पहले दो भागों में बांटेंगे तब यह सही-सही समझा जा सकता है। स्वयं करना और ब्राह्मणों द्वारा कराना; इन दोनों को विभक्त रूप से समझने पर ही दिन संख्या निर्धारित की जा सकती है।

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महामृत्युंजय जप करने की सम्पूर्ण विधि और जानकारी – mahamrityunjay jaap

महामृत्युंजय जप करने की सम्पूर्ण विधि और जानकारी – mahamrityunjay jaap

महामृत्युंजय जप – यदि स्वयं/सपरिवार के निमित्त जप करना हो तो त्रिकुशा, तिल, जल, पुष्प, चन्दन, द्रव्य आदि लेकर इस प्रकार संकल्प करे : ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः श्रीमद् भगवतो महापुरूषस्य,विष्णुराज्ञया …… महामृत्युंजय जप विधि pdf डाउनलोड

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क्या आप तीर्थ यात्रा के महत्वपूर्ण तथ्यों को जानते हैं – tirth yatra

क्या आप तीर्थ यात्रा के महत्वपूर्ण तथ्यों को जानते हैं – tirth yatra

तीर्थ यात्रा : वह यात्रा जो पापनिवृत्ति और पुण्य प्राप्ति के उद्देश्य से विधि पूर्वक की जाती है जिसमें तीर्थदर्शन, मुण्डन, स्नान, पूजन, पितरों का पिण्डदान, दान, ब्राह्मण भोजन आदि किया जाता है, तीर्थ यात्रा कहलाती है।

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धर्म का त्याग कब कर सकते हैं ?

धर्म का त्याग कब कर सकते हैं ?

लोकविरुद्ध होने पर धर्म के त्याग की छूट का तात्पर्य अधर्म या शास्त्रविरुद्ध करने की छूट नहीं है। “यद्यपि शुद्धं लोक विरुद्धम्। नाऽचरणीयं नाऽचरणीयं” का अर्थ यद्यपि शुद्ध हो अर्थात सही हो किन्तु लोक विरुद्ध हो अर्थात हानिकारक हो या हानि संभावित हो तो वह वैसा आचरण मत करो वह कर्म मत करो।

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महामृत्युंजय स्तोत्र pdf सहित

महामृत्युंजय स्तोत्र pdf सहित – Maha mrityunjaya Stotra

महामृत्युंजय स्तोत्र pdf सहित – Maha mrityunjaya Stotra – महामृत्युंजय स्तोत्र के दो प्रकार पाये जाते हैं एक मार्कण्डेयकृत और दूसरा लोमशकृत । यहाँ दोनों प्रकार के महामृत्युंजय स्तोत्र दिये गये हैं जिससे महामृत्युंजय उपासना में अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

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महामृत्युंजय जाप सामग्री

महामृत्युंजय जाप सामग्री – maha mrityunjaya jaap samagri

महामृत्युंजय जाप सामग्री – maha mrityunjaya jaap samagri : कलश – 5, ढकनी – 7, ताम्र कलश – 1, कांस्य कलश – 1 (पुण्याहवाचन हेतु) नारियल (पानी वाला) – 5

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मीडिया की भूमिका एवं समस्याएं और ग्रामीण संस्कृति पर घातक प्रभाव – impact of media

10 वर्षों से ऐसा लग रहा है जैसे देश में मात्र 1 मुख्यमंत्री केजरीवाल था और अब आगे भी संभावना यही है कि केजरीवाल की जगह लेने वाला ही देश का मुख्यमंत्री दिखाया जायेगा, जैसे दिल्ली का मुख्यमंत्री न हो भारत का मुख्यमंत्री हो।

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