ब्रह्मसूक्तं – brahm suktam
ॐ तेजोऽसि शुक्रममृतमायुष्पाऽआयुर्मेपाहि । देवस्य त्वा सवितुः प्रसवेऽश्विनोर्बाहुभ्याम्पूष्णोहस्ताभ्यामाददे ॥१॥ इमामगृभ्णन्रशनामृतस्य पूर्व ऽआयुषिव्विदथेषुकव्या । सा नो ऽअस्मिन्सुत ऽआ बभूवऽऋतस्य सामन्त्सरमारपन्ती ॥२॥
ॐ तेजोऽसि शुक्रममृतमायुष्पाऽआयुर्मेपाहि । देवस्य त्वा सवितुः प्रसवेऽश्विनोर्बाहुभ्याम्पूष्णोहस्ताभ्यामाददे ॥१॥ इमामगृभ्णन्रशनामृतस्य पूर्व ऽआयुषिव्विदथेषुकव्या । सा नो ऽअस्मिन्सुत ऽआ बभूवऽऋतस्य सामन्त्सरमारपन्ती ॥२॥
जिन घरों में श्राद्ध सही विधि से नहीं किया जाता उनके पितर अतृप्त होकर कुपित हो जाते हैं। किसी भी प्रकार से यदि पितृ दोष ज्ञात हो तो त्रिपिंडी श्राद्ध करना चाहिये। जब प्रेत बाधा हो और किसी प्रकार से शांत न हो रही हो तो उस स्थिति में त्रिपिण्डी श्राद्ध करना चाहिये।
श्राद्ध के दिन किये जाने वाले कार्यों को तीन भागों में विभाजित करके बताया गया है जिससे समझने में आसान है। साथ ही साथ शास्त्रों के प्रमाण भी दिये गये हैं जिससे विश्वनीयता में भी वृद्धि हो सके।
दान करने की विधि और मंत्र : पूर्वाभिमुख तण्डुल पाकपात्र (चावल सहित) पर तीन बार इस मंत्र से पुष्पाक्षत छिड़के : ॐ सतण्डुल पैत्तल तण्डुल पाकपात्राय नमः नमः ॥३॥ ब्राह्मण के दाहिने पैर की पुष्पाक्षत से तीन बार पूजा करे : ॐ ब्राह्मणाय नमः ॥३॥
राम मंदिर ऐतिहासिक मंदिर है जो देश के इतिहास और राष्ट्रसम्मान से जुड़ा हुआ है। इस कारण राम मंदिर में जो भी हो उसमें शास्त्रोक्त वचनों का अक्षरशः पालन किया जाना चाहिये। यदि उपस्थित निर्णेता शास्त्र से अनभिज्ञ हों तो उन्हें विद्वानों से परामर्श लेना चाहिये और फिर कोई निर्णय करना चाहिये। अभी कुछ नये नियम बनाये गये हैं जिसकी चर्चा यहां की गयी है।
श्राद्ध सामग्री लिस्ट : उजला चन्दन – 1, उजला कपड़ा – आधा मीटर, कच्चा सूता – 1, जौ – 1 पुड़िया, तिल – 50 ग्राम, अरबा चावल – 1 किलो, दाल – 250 ग्राम, केराव (मटर) – 100 ग्राम, आलू – 250 ग्राम, हरी सब्जी – 250 ग्राम, कच्चा केला – 3, ओल – 100 ग्राम, पका केला – 3
विश्वेदेव आसन : सव्य-पूर्वाभिमुख-त्रिकुशा-जौ-जल – पूर्वदिशा में उत्तरभाग में पित्रादि सम्बन्धी विश्वेदेवा का आसन दे और उनसे दक्षिण भाग में मातामहादि सम्बन्धी विश्वेदेवा का आसन दे –
पार्वण श्राद्ध संकल्प : सव्य-पूर्वाभिमुख त्रिकुशा धारण कर तिल-जलादि संकल्प द्रव्य लेकर इस प्रकार संकल्प करे – ॐ अद्य ………. मासे ……….. पक्षे ……….. तिथौ ……..… गोत्रस्य ……….. शर्मणः पार्वण श्राद्धमहं करिष्ये ॥ स.पू.त्रि.
मासिक श्राद्ध और सपिण्डीकरण श्राद्ध द्वादशाह के दिन किया जाता है जो यहां दिया गया है। श्राद्ध करने की विधि और श्राद्ध के मंत्रों को विशेष शुद्ध रखने का प्रयास किया गया है
एकादशाह श्राद्ध विधि | छन्दोग | shraddh vidhi : दीप जलाकर यदि पाककर्त्ता द्वारा पाककर्म हुआ हो तो श्राद्धकर्त्ता पाककर्त्ता से पूछे “सिद्धम्” और पाककर्त्ता कहे “ॐ सिद्धम्” ॥ यदि पाककर्ता न हो तो पूछने की आवश्यकता नहीं है।